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पहचान: इंजीनियरिंग की राह छोड़कर अभिनय को चुना; अब जमकर सुर्खियां बटोर रहे हैं फिल्म धुरंधर के 'जमील जमाली'

Sat, 28 Mar 2026 08:03 AM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Sat, 28 Mar 2026 08:03 AM IST
सार

अभिनेता राकेश बेदी फिल्म धुरंधर में अपने किरदार जमील जमाली के कारण जमकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। उनकी संवाद अदायगी की शैली सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। 
उन्होंने इंजीनियरिंग की राह छोड़कर अभिनय को चुना था। वे चार्ली चैपलिन से प्रेरित और जॉनी वॉकर, संजीव कुमार व महमूद साहब को आदर्श मानते हैं। उन्हें गजलें और नज्में लिखने का भी शौक है। 

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Rekesh Bedi: left engineering for acting, Jameel Jamali of film Dhurandhar is now making headlines
राकेश बेदी- सुर्खियां बटोर रहे हैं फिल्म धुरंधर के 'जमील जमाली' - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

यह वाकया दिल्ली के श्रीराम सेंटर फॉर आर्ट एंड कल्चर का है। सभागार दर्शकों से खचाखच भरा था और चल रहा एक नाटक अपने पूरे शबाब पर था। अचानक बिजली गुल हो गई। दर्शक शोर मचाने लगे। तभी एक कलाकार अंधेरे में ही मंच पर आया और अपनी खनकदार आवाज में किस्सा सुनाने लगा। यह सिलसिला करीब पंद्रह से बीस मिनट तक चला होगा। जब बिजली आई, तो नजारा देखने लायक था। हॉल में बैठा कोई भी दर्शक अपनी सीट से हिला तक नहीं था। पूरा हॉल मंत्रमुग्ध होकर उसे सुन रहा था। जब नाटक दोबारा शुरू हुआ, तो तालियों की गड़गड़ाहट इतनी तेज थी कि शायद ही श्रीराम सेंटर की दीवारों ने वैसी गूंज पहले कभी सुनी हो।
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समय के साथ 'ये जो है जिंदगी', 'श्रीमान श्रीमती' और 'भाभी जी घर पर हैं', और 'यस बॉस' जैसे टीवी शोज के जरिये उस कलाकार ने घर-घर में अपनी जगह बनाई। समय का पहिया चलता रहा और फिर आया मार्च, 2026। आदित्य धर की धुरंधर 2 फिल्म का एक डायलॉग 'बच्चा है तू मेरा' सोशल मीडिया पर इस कदर वायरल हुआ कि श्रीराम सेंटर फॉर आर्ट एंड कल्चर का वही कलाकार रातों-रात विज्ञापनों और मीम्स की दुनिया में छा गया। उस प्रतिभाशाली कलाकार का नाम है राकेश बेदी। वह ब्लॉकबस्टर फिल्म धुरंधर 2 में अपने गंभीर किरदार जमील जमाली के कारण सुर्खियां बटोर रहे हैं।
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ओम पुरी के सहपाठी
राकेश बेदी का जन्म एक दिसंबर, 1954 को नई दिल्ली में हुआ था। उनके पिता, मदन गोपाल बेदी, इंडियन एयरलाइंस में एयरोनॉटिकल इंजीनियर थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के केंद्रीय विद्यालय (एंड्रयूज गंज) से पूरी की। स्कूल के दिनों में वह मोनो-एक्टिंग प्रतियोगिताओं में काफी सक्रिय रहते थे। उन्होंने दिल्ली के शहीद भगत सिंह कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। अभिनय की बारीकियां उन्होंने पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) से सीखीं, जहां ओम पुरी जैसे दिग्गज कलाकार उनके सहपाठी थे। राकेश बेदी ने अपने कॅरिअर की शुरुआत थिएटर से की और दिल्ली के प्रसिद्ध थिएटर ग्रुप 'पियरोट्स ट्रूप' के साथ काम किया। आराधना बेदी उनकी जीवनसंगिनी हैं। दंपती की दो बेटियां-रिद्धिमा और रीतिका हैं।
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एक नाटक, 24 किरदार
राकेश बेदी के पिता चाहते थे कि उनका बेटा माइनिंग इंजीनियर बने, पर राकेश की रुचि बचपन से ही अभिनय और कला में थी। पिता के दबाव के कारण उन्होंने आईआईटी, दिल्ली की प्रवेश परीक्षा भी दी, लेकिन तीन घंटे की परीक्षा में सिर्फ पांच मिनट परीक्षा हॉल में रहे, फिर निकल गए, क्योंकि उन्हें सिर्फ एक सवाल का उत्तर आता था। इसके बाद उन्होंने एफटीआईआई का रुख किया। एफटीआईआई के दीक्षांत समारोह के दौरान 'शोले' के निर्माता जीपी सिप्पी मुख्य अतिथि थे। वह बेदी का नाटक 'लव इन पेरिस, वॉर इन कच्छ' देखकर इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने वहीं कह दिया था कि वह अपनी अगली फिल्म में उन्हें कास्ट करेंगे। इस तरह उन्हें उनकी पहली फिल्म 'एहसास' (1979) मिली। विजय तेंदुलकर द्वारा लिखित नाटक 'मसाज' में राकेश बेदी ने अकेले ही 24 अलग-अलग किरदारों को निभाया है।

साहित्य, शायरी और चार्ली चैपलिन
अभिनय के अलावा राकेश बेदी को लिखने का भी बहुत शौक है। वह खाली समय में गजलें और नज्में लिखते हैं और अक्सर मुशायरों में अपनी रचनाएं सुनाते हुए देखे जाते हैं। वह चार्ली चैपलिन से प्रेरित हैं और जॉनी वॉकर, संजीव कुमार और महमूद साहब को अपना आदर्श मानते हैं। संवेदनशील कवि होने के साथ संगीत से भी उन्हें गहरा लगाव है। फिल्म एहसास (1979) का सारा जमाना छोड़ चले... और कितने रांझे तुझे देख के... तथा चश्मे बद्दूर (1981) का इस नदी को मेरा... उनका पसंदीदा गाना है। इसके अलावा, उन्हें साहित्य पढ़ना भी पसंद है।


सई परांजपे की वह शर्त
जब फिल्म 'चश्मे बद्दूर' बन रही थी, तब निर्देशिका सई परांजपे को एक ऐसे अभिनेता की तलाश थी, जो फारुख शेख और रवि वासवानी के साथ फिट बैठ सके। जब राकेश उनके सामने पहुंचे, तो सई ने एक अजीब शर्त रखी। उन्होंने कहा, 'मुझे तुम्हारा अभिनय नहीं, तुम्हारी चाल देखनी है।' राकेश बेदी ने कमरे के एक कोने से दूसरे कोने तक चलकर दिखाया। वह चाल इतनी अजीब और मजाकिया थी कि सई ने तुरंत उन्हें साइन कर लिया। इसी फिल्म के 'ओमी' किरदार से ही राकेश को असली पहचान मिली।

विवादों से नाता
हाल ही में, फिल्म 'धुरंधर' के ट्रेलर लॉन्च का एक वीडियो जारी हुआ। इसमें राकेश बेदी अपनी ऑन-स्क्रीन बेटी का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस सारा अर्जुन के कंधे पर किस करते नजर आते हैं। इसके बाद उन्हें काफी ट्रोलिंग और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। हालांकि, उन्होंने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि देखने वालों की आंख में खोट है। इसके अलावा, एक इवेंट का वीडियो भी सामने आया, जिसमें राकेश बेदी, अनन्या पांडे और कियारा आडवाणी से मिलते नजर आए। उन पर आरोप लगाया कि अनन्या पांडे उनके टच से थोड़ा असहज दिखीं। राकेश बेदी ने अपनी फिल्म 'धुरंधर' की सफलता के बीच कंगना रनौत की फिल्म 'इमरजेंसी' पर बिना नाम लिए तंज कसा था। एक ओटीटी शो शोस्टापर को लेकर निर्देशक के साथ पेमेंट विवाद हुआ, जिसे बाद में दोनों ने सुलझा लिया था।

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