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Karnataka: कर्नाटक में OBC आरक्षण बढ़ाकर 51 फीसदी करने की सिफारिश, कुल कोटा हो सकता है 85%; इस बात का भी जिक्र

Sun, 13 Apr 2025 08:27 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 13 Apr 2025 08:27 AM IST
सार

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार के सामने जाति जनगणना आयोग ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण को 32% से बढ़ाकर 51% करने की सिफारिश की है। अगर राज्य सरकार इस रिपोर्ट को लागू करती है तो राज्य में कुल आरक्षण बढ़कर 85% हो जाएगा। 

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Recommendation to increase OBC reservation to 51 percent in Karnataka, total quota may be 85% News In Hindi
सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कर्नाटक में जाति जनगणना आयोग ने आरक्षण प्रणाली को लेकर राज्य सरकार को एक बड़ा सुझाव दिया है। आयोग ने शिक्षा और नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण को 32% से बढ़ाकर 51% करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो राज्य में कुल आरक्षण बढ़कर 85% हो जाएगा। 

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बता दें कि इसमें पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (इडब्लूयूएस) के लिए 10% और अनुसूचित जाति/जनजाति (एससी/एसटी) के लिए 24% आरक्षण शामिल है। इसके साथ ही, महिलाओं, दिव्यांगों जैसे समूहों को मिलने वाला क्षैतिज आरक्षण भी लागू रहेगा। (यहां क्षैतिज आरक्षण का अर्थ जो आरक्षण महिलाओं, विकलांग (दिव्यांग) व्यक्तियों, भूतपूर्व सैनिकों आदि के लिए होता है) 
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आर्थिक सर्वेक्षण के बाद राज्य सरकार को सिफारिश
आयोग द्वारा यह सिफारिश हाल ही में कराए गए सामाजिक-आर्थिक और शिक्षा सर्वेक्षण (जिसे जाति जनगणना भी कहा जाता है) के आधार पर की गई है। इस सर्वे के मुताबिक कर्नाटक में पिछड़े वर्गों की आबादी करीब 70% है। पैनल का मानना है कि अगर इतनी बड़ी आबादी को उनकी संख्या के हिसाब से सरकारी सुविधाएं और आरक्षण नहीं दिया गया, तो समानता नहीं हो पाएगी।

मामले में पैनल का मानना है कि हालांकि ओबीसी की जनसंख्या 69.6% है, फिर भी राज्य की आधी से भी कम आबादी को आरक्षण मिल पा रहा है। अगर आबादी के अनुपात में आरक्षण नहीं दिया गया, तो सरकारी लाभों का समान वितरण नहीं होगा।

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17 अप्रैल को विशेष चर्चा में विचार

गौरतलब है कि बहुप्रतीक्षित सामाजिक-आर्थिक और शिक्षा सर्वेक्षण रिपोर्ट बीते शुक्रवार को कर्नाटक कैबिनेट के समक्ष पेश की गई। इस रिपोर्ट को 'जाति गणना' के नाम से भी जाना जाता है। इसके बाद मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कुछ मंत्रियों ने कहा कि वे पहले सिफारिशों पर विचार करना चाहते हैं। इस कारण 17 अप्रैल को कैबिनेट की बैठक होगी। कर्नाटक के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि यह निर्णय किया गया है कि 17 अप्रैल को एक विशेष कैबिनेट बैठक में जाति जनगणना पर चर्चा की जाएगी।

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