{"_id":"5e4aeb658ebc3ef2a579a48b","slug":"recommendation-to-consider-1951-as-a-cut-off-year-to-define-the-original-inhabitants-of-assam","type":"story","status":"publish","title_hn":"असम के मूल निवासियों को परिभाषित करने के लिए 1951 को कट-ऑफ वर्ष मानने की सिफारिश","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
असम के मूल निवासियों को परिभाषित करने के लिए 1951 को कट-ऑफ वर्ष मानने की सिफारिश
Tue, 18 Feb 2020 01:09 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Tue, 18 Feb 2020 01:09 AM IST
सार
गृह मंत्रालय द्वारा गठित समिति ने असम में स्वदेशी नागरिक को परिभाषित करने और राज्य के बाहर के लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने को इनर लाइन परमिट (आईएलपी) लागू करने के लिए कटऑफ वर्ष 1951 रखने का सुझाव दिया है। सूत्रों ने सोमवार को इसकी जानकारी दी।
विज्ञापन
गृह मंत्रालय
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
समिति ने साथ ही असम विधानसभा और राज्य में संसदीय सीटों को मूल निवासियों के लिए आरक्षित करने को दो फॉर्मूला सुझाया है। इनमें राज्य के लोगों के लिए 67 फीसदी आरक्षण भी शामिल है। गृह मंत्रालय ने असम के लोगों को सांविधानिक सुरक्षा देने पर सुझाव देने के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई थी।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक रिटायर जस्टिस बिप्लब कुमार शर्मा की अध्यक्षता वाली 13 सदस्यीय समिति ने पिछले हफ्ते रिपोर्ट तैयार कर ली थी। इसे इसी हफ्ते सौंपे जाने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक समिति ने सर्वसम्मति से सिफारिश की है कि जो लोग 1951 में असम के निवासी थे, उनके वंशजों को जाति, संप्रदाय, भाषा और धर्म का भेद किए बिना राज्य का मूल निवासी माना जाए।
विज्ञापन