SC: ओडिशा-गुवाहाटी और केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के लिए कॉलेजियम की सिफारिश, पढ़ें किसे मिली जिम्मेदारी
ओडिशा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में वकील सिबो शंकर मिश्रा और न्यायिक अधिकारी आनंद चंद्र बेहरा के नामों की सिफारिश की है। इसके अलावा, गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में न्यायिक अधिकारी बुदी हाबुंग के नाम की सिफारिश की गई है।
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने गुरुवार को ओडिशा, गुवाहाटी और केरल के उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के नाम की सिफारिश की है। न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए दो न्यायिक अधिकारी, एक वकील और एक अतिरिक्त न्यायाधीश को तर्जीह दी गई है।
कॉलेजियम ने की इन नामों की सिफारिश
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम में न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना शामिल थे। ओडिशा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में वकील सिबो शंकर मिश्रा और न्यायिक अधिकारी आनंद चंद्र बेहरा के नामों की सिफारिश की है। इसके अलावा, गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में न्यायिक अधिकारी बुदी हाबुंग के नाम की सिफारिश की गई है। वहीं, केरल उच्च न्यायालय के स्थाई न्यायाधीश के रूप में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में सी एस सुधा का नाम पेश किया गया है।
सर्वोच्च अदालत के वेबसाइट के अनुसार, ओडिशा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने 17 जनवरी 2023 ने अपने दो सहयोगियों के परामर्श के बाद मिश्रा और बेहरा के नामों की सिफारिश की थी। वहीं, मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने भी सिफारिश पर सहमति जताई है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दस्तावेजों की जांच की और उनका मूल्यांकन करने के बाद ही बेहरा और मिश्रा की सिफारिश की।
ईमानदार छवि के धनी हैं मिश्रा
सर्वोच्च अदालत के अनुसार, मिश्रा सात दिसंबर 1991 को वकील के रूप में पंजीकृत हुए थे। उनके पास 30 वर्षों का अनुभव है। मिश्रा सिविल, आपराधिक और सेवा कानून के विशेषज्ञ हैं। सरकार के इनपुट के आधार पर पता चला कि मिश्रा की व्यक्तिगत छवि अच्छी है। मिश्रा ईमानदार छवि के वकील हैं। वहीं बेहरा ओडिशा में विभिन्न पदों पर न्यायिक अधिकारी के रूप में काम कर चुके हैं। न्यायिक अधिकारी बुदी के लिए गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने अपने सहयोगियों के साथ चर्चा कर 26 अप्रैल 2023 को सिफारिश की थी। बुदी के नाम पर अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड सरकार भी सहमत है। बुदी हाबुंग 2010 में न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे। वे अरुणाचल प्रदेश न्यायिक सेवा के सबसे वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी हैं। उन्होंने प्रदेश में विभिन्न पदों पर काम किया है। वहीं, 21 जून 2023 को केरल उच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने अतिरिक्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति सीएस सुधा के नाम पर सहमित जताई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अब तक रेरा लागू नहीं करने वाले राज्यों को नोटिस जारी किया है। 11 अगस्त को शीर्ष अदालत ने नगालैंड, मेघालय, सिक्किम और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी कर अब तक रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) लागू नहीं करने का कारण पूछा है। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम और पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों को मौजूदा स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करने का भी निर्देश दिया। क्योंकि इन राज्यों ने सिर्फ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) को अधिसूचित करने के लिए अंतरिम आदेश जारी किया है। पीठ ने कहा कि संबंधित मुख्य सचिवों को आदेश प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल कर रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 के प्रवर्तन और कार्यान्वयन के संबंध में हुई प्रगति के बारे में बताना होगा। इस मामले में अगली सुनवाई अगले साल जनवरी में होगी।
चयन प्रक्रिया अवैध होने के बाद भी पद पर बने रहेंगे कुछ न्यायिक अधिकारी
सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक हित का हवाला देते हुए केरल में कुछ न्यायिक अधिकारियों को उनके पदों पर बने रहने की अनुमति दी, बावजूद इसके कि उनके चयन में केरल हाईकोर्ट की अपनाई गई प्रक्रिया अवैध और मनमानी थी। यह देखते हुए कि उनके चयन के छह साल बीत चुके हैं, शीर्ष अदालत ने कहा उन अधिकारियों को पद से हटाना सार्वजनिक हित के विपरीत होगा। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पांच सदस्यीय पीठ ने कहा, लगभग छह साल पहले चुने गए उम्मीदवारों को पद से नहीं हटाया जा सकता। वे सभी योग्य हैं और राज्य की जिला न्यायपालिका की सेवा कर रहे हैं। इस स्तर पर उन्हें पद से हटाना सार्वजनिक हित के विपरीत होगा। पीठ ने 12 जुलाई को खुली अदालत में फैसला सुनाया था लेकिन फैसले की प्रति बृहस्पतिवार को अपलोड हुई।
पीठ के समक्ष मुद्दा केरल हाईकोर्ट के मार्च 2017 में जिला जजों के चयन में मौखिक परीक्षा के आधार पर कट-ऑफ अंक तय करने के फैसले से जुड़ा था। पीठ ने कहा कि मौखिक परीक्षा के बाद हाईकोर्ट से कट-ऑफ तय की गई थी, जो स्पष्ट रूप से मनमाना था। केरल राज्य उच्च न्यायिक सेवा विशेष नियम के प्रावधानों में यह है कि नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा और मौखिक परीक्षा के योग को ध्यान में रखा जाएगा। हालांकि न्यायालय ने इस तथ्य के मद्देनजर उम्मीदवारों के चयन को अमान्य करने से परहेज किया कि उनकी नियुक्ति को छह साल बीत चुके हैं और इस दौरान नियुक्त उम्मीदवारों ने न्यायिक कार्य किए हैं। पीठ ने कहा, इतने समय तक अपने कर्तव्यों का पालन करने वाले उम्मीदवारों को पद से हटाने का निर्देश देना मुश्किल है।