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कंट्रोल रूम से होगी रैंडम चेकिंग, बच्चों से पूछी जाएगी हकीकत

Sat, 23 Jul 2016 04:51 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Sat, 23 Jul 2016 04:51 AM IST
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 Reality check of teachers, now control room will directly ask to children
- फोटो : Getty

परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन का माहौल कितना बेहतर है, अब इसका राज बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से स्थापित हो रहे कंट्रोल रूम के जरिए खोला जाएगा। कंट्रोल रूम से रैंडम चेकिंग के जरिए पता लगाया जाएगा कि विद्यालयों में क्या पढ़ाई हुई। इसमें न सिर्फ शिक्षकों, बल्कि बच्चों से भी बातचीत कर पठन-पाठन की हकीकत जानी जाएगी। अच्छा काम करने पर शिक्षकों को शाबासी दी जाएगा तो पढ़ाने के नाम पर महज खानापूर्ति करने वालों के पेच भी कसे जाएंगे।

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परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने की नित नई-नई कवायदों के बीच जिले के अफसरों ने अब एक नई पहल की है। इसके तहत बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से एक मिनी कंट्रोल रूम खोलने की योजना बनाई गई है। यह कंट्रोल रूम जिले भर में स्थित परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों से मोबाइल के जरिए जुड़ेगा। इसके लिए जिले भर के स्कूलों में तैनात शिक्षकों-शिक्षिकाओं के मोबाइल नंबर इकट्ठा करने का काम भी शुरू कर दिया गया है।
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बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के मुताबिक कंट्रोल रूम स्थापित किए जाने के बाद यहां से प्रतिदिन स्कूलों में मॉनिटरिंग की जाएगी। रैंडम चेकिंग की जाएगी, जिसमें ये पता लगाया जाएगा कि शिक्षक अपना काम ठीक ढंग से कर रहे हैं कि नहीं। शिक्षकों की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी की पुष्टि कंट्रोल रूम में बैठे अधिकारी खुद बच्चों से भी बात कर करेंगे।

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इस तरह से होगा शिक्षकों का रियल्टी टेस्ट

 Reality check of teachers, now control room will directly ask to children
प्राथमिक विद्यालय - फोटो : Getty

बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अफसर बताते हैं कि कंट्रोल रूम में बैठा अधिकारी या कर्मी प्रतिदिन रैंडम आधार पर स्कूलों का चयन कर शिक्षकों से फोन पर संपर्क करेगा। सबसे खास बात ये कि जो किताबें विभाग की ओर से स्कूलों में भेजी जाएंगी, उसका एक सेट कंट्रोल रूम में भी उपलब्ध कराया जाएगा। फोन पर सपंर्क करने के बाद शिक्षकों से पूछा जाएगा कि उन्होंने उस दिन या उसके एक दिन पहले छात्र-छात्राओं को क्या पढ़ाया।

शिक्षकों द्वारा बताए जाने पर कंट्रोल रूम ऑफिसर खुद इसकी पुष्टि के लिए शिक्षकों के ही मोबाइल से बच्चों से भी बात करेगा। उनसे शिक्षक द्वारा बताए गए पाठ के बारे में पूछेगा। चूंकि उसके पास किताबों का सेट मौजूद होगा, ऐसे में पाठ से संबधित प्रश्न पूछने में उसे दिक्कत नहीं होगी।

‘स्कूलों में शैक्षिक माहौल में सुधार हो, इसके लिए कंट्रोल रूम स्थापित करने की योजना बनाई गई है। उच्चाधिकारियों के दिशा निर्देश पर कलेक्ट्रेट परिसर या बीएसए कार्यालय परिसर में कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। शिक्षकों के फोन नंबर एकत्र करने का काम भी शुरू कर दिया गया है। कंट्रोल रूम स्थापित होने के बाद रैंडम चेकिंग के जरिए स्कूलों में पढ़ाई की हकीकत जानी जाएगी।’
जयकरन यादव, बीएसए

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