फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Reactions of people on Triple Talaq ordinance

'तलाक के मामले में अल्लाह को मानेंगे', याचिकाकर्ता, मंत्री और उलेमाओं ने दी प्रतिक्रिया

Thu, 20 Sep 2018 01:47 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 20 Sep 2018 01:47 PM IST
विज्ञापन
Reactions of people on Triple Talaq ordinance

सुप्रीम कोर्ट में गैरकानूनी घोषित किए जा चुके तलाक-ए-बिद्दत (तीन तलाक) को दंडनीय अपराध बनाने वाले बिल को कानून के रूप में मंजूरी देने वाले अध्यादेश पर बुधवार देर रात राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हस्ताक्षर कर दिए। अब एक साथ तीन तलाक देना दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल हो गया है। ऐसा करने वाले को तीन साल तक की सजा भुगतनी होगी। सरकार के इस फैसले पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

विज्ञापन


तीन तलाक पर अध्यादेश की मंजूरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल करने वाली सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज ने कहा कि अगर
कांग्रेस हिम्मत दिखाती तो मुस्लिम महिलाओं की दुर्दशा नहीं होती।

जमीयत उलमा हिंद के अध्यक्ष एवं ऑल इंडिया मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि सरकार तीन तलाक पर जो अध्यादेश लाई है, वो अभी तक पूरी तरह सामने नहीं आया है। इसमें सरकार की कोशिश है कि यह दोबारा से वापस न आए।
विज्ञापन


तीन तलाक पर पहली याचिका दायर करने वाली आतिया साबरी का कहना है कि कानून बनने से मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिला है, जो जरूरी था। अब तीन तलाक पर रोक लग सकेगी। वह कहती हैं, 'निकाह के वक्त पति और पत्नी की सहमति जरूरी है तो तलाक एकतरफा कैसे हो सकता है।'
विज्ञापन
विज्ञापन


एक साथ तीन तलाक कानून का स्वागत

शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि एक साथ तीन तलाक पर सरकार द्वारा त्वरित कदम उठाते हुए अध्यादेश लाना स्वागत योग्य है। देश के संविधान के मुताबिक कानून का उल्लंघन करने वालों को सजा का प्रावधान है। ऐसे में किसी भी कानून को न मानने के दोषी व्यक्ति को सजा होनी ही चाहिए। तीन तलाक कानून लाने का मकसद महिलाओं को सुरक्षा देना है। कानून में जिन बिंदुओं को लेकर संशय है, सरकार को चाहिए कि उसमें सुधार करे। जो कानून बनाए जाएं, उनमें सभी की सहमति होनी चाहिए। 

इशरत जहां ने किया मंत्रिमंडल के फैसले का स्वागत

Reactions of people on Triple Talaq ordinance

इशरत जहां ने अध्यादेश के जरिए तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले का स्वागत किया है। हावड़ा में रहने वाली इशरत ने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि यह फैसला मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है।

उन्होंने कहा कि अब मुस्लिम पुरुषों और धार्मिक नेताओं को अपने तौर तरीकों में बदलाव लाना चाहिए। ऐसा नहीं होने की स्थिति में उन्हें नतीजा भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। इशरत उन पांच याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं, जिन्होंने तीन तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 22 अगस्त को तीन तलाक को गैरकानूनी घोषित कर दिया था।

इशरत जहां के पति ने वर्ष 2014 में उन्हें दुबई से फोन पर तीन तलाक दे दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। इशरत की 13 साल की एक बेटी और सात साल का एक बेटा भी है।

तलाक के मामले में अल्लाह के कानून को मानेंगे: आजम

तीन तलाक अध्यादेश पर पूर्व मंत्री आजम खां का कहना है कि 'भाजपा का यह चुनावी मुद्दा है। अल्लाह से बड़ा हमारे लिए कोई कानून नहीं है। इसलिए हम तलाक के मामले में सिर्फ अल्लाह के कानून को ही मानेंगे।' उन्होंने कहा कि 'अध्यादेश में किन बातों को शामिल किया, है इसकी जानकारी मुझे नहीं है।'

अब हुआ इंसाफ पूरा: आतिया

तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहली याचिका दायर करने वाली आतिया साबरी का कहना है कि कानून बनने से मुस्लिम महिलाओं को पूर्ण न्याय मिला है, जो जरूरी था। अब तीन तलाक पर रोक लग सकेगी। आतिया का निकाह हरिद्वार जिले के खानपुर थानांतर्गत जसोधर गांव में वाजिद के साथ हुआ था। दो बेटियां होने के बाद 12 दिसंबर 2015 को उसे जहर देकर मारने का प्रयास किया गया। दस रुपये के स्टांप पर तीन तलाक लिखकर उसके घर भेज दी गई। 2016 में दोषियों को सजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची और पहली जंग जीती। वह कहती हैं, 'निकाह के वक्त पति और पत्नी की सहमति जरूरी है तो तलाक एकतरफा कैसे हो सकता है।'

उलेमा को त्वरित टिप्पणी से परहेज

तीन तलाक के खिलाफ केंद्र सरकार के अध्यादेश पर देवबंदी उलेमा ने कोई त्वरित टिप्पणी नहीं की है। जमीयत उलमा हिंद के अध्यक्ष एवं ऑल इंडिया मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि अध्यादेश अभी तक पूरी तरह सामने नहीं आया है और इसे देखे बिना कुछ नहीं कहा जा सकता है। दारुल उलूम ने भी अध्यादेश को देखे बिना किसी तरह की टिप्पणी या प्रतिक्रिया देने से फिलहाल परहेज किया है। वहीं दूसरे देवबंदी उलेमा का कहना है कि अध्यादेश पर उलेमा का मशविरा भी लिया जाना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed