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CM की अनुभवी पारी: विरोधी भी संभलकर चल रहे; समर्थक बोले- योगी के पास सत्ता-धन का मोह नहीं, इसलिए फार्म में

Thu, 02 Mar 2023 11:36 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Thu, 02 Mar 2023 11:36 PM IST
सार

मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार पर पहले की सरकारों की तरह भ्रष्टाचार का आरोप लगाने से पहले विरोधियों को सोचना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने खुद पूर्व मुख्यमंत्री के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि आपके समय में एक जिला से एक माफिया देने की पहल हुई थी।
 

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reaction of one year of second term of up cm yogi adityanath
योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

13 दिन बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा करेंगे। इस तरह से वह पांच साल और 347 दिन पूर्ण बहुमत की सरकार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इस कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजनीति का कई नए पैमाने हासिल कर  लिए हैं। पाटी के भीतर-बाहर विपक्ष में बैठे विरोधी मुख्यमंत्री से संभलकर चल रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने जब अखिलेश यादव को अपने पिता की इज्जत न करने के लिए खरी-खरी सुनाई तो दूसरे दिन पूर्व मुख्यमंत्री ने परिपक्वता का परिचय देते हुए राजनीतिक परंपरा की दुहाई से काफी कुछ संभालने का प्रयास किया। इसे मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के करीबी दूसरे नजरिए से देखते हैं।

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मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की पसंद का होने के कारण 2022 में पहली बार विधायक बने सूत्र का कहना है कि बाबा योगी के पास सत्ता, धन और वैभव की मोह माया नहीं है। इसलिए वह हमेशा फार्म में रहते हैं। खरी-खरी कह देने में कोई संकोच नहीं करते। सूत्र का कहना है कि अखिलेश यादव के बाद मुख्यमंत्री ने खुद सदन में जवाब दिया और पूर्व मुख्यमंत्री के हर सवाल पर अपना पक्ष रखा। कुछ नहीं छिपाया। 
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योगी के तेवर से माफिया हुए पस्त 
संघ और भाजपा से जुड़े ज्ञानेश्वर कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा काम किया है। पहले लोग आंदोलन और प्रदर्शन में सरकारी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते थे। दुकानदार और छोटे रेहड़ी-पटरी वाले भी इसका शिकार हो जाते थे। अब यह प्रथा न के बराबर है। मुख्यमंत्री ने ही इस नुकसान की भरपाई के लिए प्रदर्शनकारियों से वसूलने की शुरुआत की थी। योगी आदित्यनाथ की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सूत्र का कहना है कि विधानसभा चुनाव 2022 में बुलडोजर बाबा के नाम से विख्यात हो गए थे। आज इस बुलडोजर से उत्तर प्रदेश का हर कानून तोड़ने वाला डर रहा है। इसकी शुरुआत बाद में दूसरे राज्यों ने भी कर दी है। 
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लखनऊ के लोकभवन में बैठने वाले एक बड़े अधिकारी ने कहा कि प्रयागराज के धूमनगंज में बदमाशों ने उमेश पाल और उनके सुरक्षा गार्ड की हत्या कर दी। लेकिन गुजरात की जेल में बंद माफिया भी डर रहा है। सूत्र का कहना है कि, कानून को अपने हाथ में लेने की हिम्मत करने वालों में इससे पहले इतना भय नहीं था। भाजपा नेता सतीश कुमार सिंह कहते हैं कि कानून व्यवस्था से लेकर प्रशासन के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकार की छवि बनाई है। प्रदेश के माफिया को लगने लगा है कि कानून से खिलवाड़ की सजा मिलनी तय है।

राजनीति में भी बना रहे हैं दबदबा, प्रदेश को दे रहे हैं समय
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ अपने दूसरे कार्यकाल में राजधानी लखनऊ के दूर-दराज के क्षेत्रों और गृह नगर गोरखपुर को पर्याप्त समय दे रहे हैं। जबकि पहले कार्यकाल में वह उत्तर प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों के विधानसभा चुनावों में प्रचार समेत अन्य में काफी समय दे रहे थे। मुख्यमंत्री सचिवालय के सूत्र का कहना है कि योगी आदित्यनाथ के पास कामकाज के लिए काफी समय होता है। ब्रह्म मुहूर्त (तड़के) में उठना और देर शाम तक सक्रिय रहना। यह उनके जीवनचर्या का हिस्सा है। 

बताते हैं कि भाजपा की अंदरुनी राजनीति में भी अब पहले जैसी बात नहीं है। पार्टी और सरकार में एक तालमेल है। राज्य सरकार में एक से अधिक पावर सेंटर जैसी कोई स्थिति नहीं है। राज्य सरकार में सेवा देकर सचिव पद से हाल में अवकाश प्राप्त सूत्र की मानें तो तमाम विडंबनाओं के बाद भी मुख्यमंत्री बमुश्किल समस्याओं से समझौतावादी होते हैं। जैसे यूपी में अभी पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक कौन है? इसी तरह कई और चीजें हैं। लेकिन मुख्यमंत्री सचिवालय का प्रयास रहता है कि सबकुछ ठीक ढंग से चलता रहे।

जब 'पावर सेंटर' पर जताया था कड़ा एतराज
यह जानकारी सूत्रों के हवाले से है। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील बंसल लखनऊ में हैं। बंसल केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्रिय पात्रों में गिने जाते हैं। लेकिन मुख्यमंत्री के साथ उनका तालमेल कम बनना चर्चा में रहा है। बताते हैं बंसल को अभी भी यूपी में काम करना प्रिय है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसमें रोड़ा बताए जाते हैं। योगी आदित्यनाथ के पहले कार्यकाल में केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा उप मुख्यमंत्री थे। शुरू में सभी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के अलावा दोनों चेहरे होते थे। इसी तरह से मौजूदा समय में केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक उपमुख्यमंत्री हैं।


बताते हैं कि दोनों कार्यकाल में जब-जब उत्तर प्रदेश की सत्ता के एक से अधिक केन्द्र की भनक लगी, मुख्यमंत्री ने इसको लेकर संतुलित रुख अपनाया। सही फोरम पर एतराज करने में कोई संकोच नहीं किया। कभी लखनऊ में राजनीति और मीडिया में अच्छी हनक बनाने वाले एक सूत्रधार हैं। दिल्ली के एक बड़े नेता के चहेते हैं, लेकिन पिछले कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने तमाम कोशिशों के बावजूद एक भी अनचाही सिफारिश को फलीभूत नहीं होने दिया।

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