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Rakesh Sharma: 'मुझे लग रहा था बच नहीं पाऊंगा....', भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री ने साझा किए अपने अनुभव

Mon, 12 Aug 2024 07:30 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 12 Aug 2024 07:30 PM IST
सार

Rakesh Sharma: 'पिक्सल स्पेस' के सह-संस्थापक अवैस अहमद के साथ चर्चा में भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने कहा कि वह अपनी अंतरिक्ष यात्रा के प्रक्षेपण चरण को लेकर चिंतित नहीं थे, क्योंकि सब कुछ एक कंप्यूटर से नियंत्रित किया गया था।

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Re-entry most thrilling part of space travel, thought wouldn't make it: Rakesh Sharma
'पिक्सल स्पेस' के सह-संस्थापक के साथ राकेश शर्मा। - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने सोमवार को कहा कि सोयुज अंतरिक्ष यान से पृथ्वी पर लौटना उनकी अंतरिक्ष यात्रा का सबसे रोमांचक अनुभव था। उन्होंने कहा कि एक पल के लिए उन्हें लगा था कि वह सुरक्षित वापस नहीं लौट पाएंगे। उर्जा, पर्यावरण और जल परिषद और संयुक्त राष्ट्र फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम 'युवा सभा 2047: भारत के भविष्य को आकार देना'में शर्मा ने एक अंतरिक्ष यात्री के रूप में अपने अनुभव साझा किए। 

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'मुझे लग रहा था बच नहीं पाऊंगा....'
'पिक्सल स्पेस' के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अवैस अहमद के साथ चर्चा में शर्मा ने कहा कि वह अपनी अंतरिक्ष यात्रा के प्रक्षेपण चरण को लेकर चिंतित नहीं थे, क्योंकि सब कुछ एक कंप्यूटर से नियंत्रित किया गया था। उन्होंने अपनी वापसी यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए कहा, " (सोयुज अंतरिक्ष यान से धरती के वायुमंडल में) दोबारा प्रवेश ज्यादा रोमांचक था, क्योंकि मुझे लग रहा था कि मैं नहीं बच पाऊंगा...तभी पैराशूट खुलता है और अंदर काफी शोर होता है जिसके लिए हम तैयार नहीं थे।" 

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Re-entry most thrilling part of space travel, thought wouldn't make it: Rakesh Sharma
राकेश शर्मा - फोटो : एएनआई (फाइल)

अंतरिक्ष में बिताए सात दिन, 21 घंटे, 40 मिनट
शर्मा को जनवरी 1982 में सोवियत इंटरकोस्मोस मिशन के लिए चुना गया था। उन्होंने 3 अप्रैल, 1984 को बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से सोयूज टी-11 अंतरिक्ष यान से उड़ान भरी थी। उन्होंने अंतरित में सात दिन, 21 घंटे और 40 मिनट बिताए और 11 अप्रैल को धरती पर लौट आए थे। 

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'लग रहा था पैराशूट टूट जाएगा, यात्रा मुश्किल होगी...'
सोयुज अंतरिक्ष यान से धरती के वायुमंडल में प्रवेश को याद करते हुए उन्होंने कहा, "धातु की अंगूठी यान के हुक से रगड़ती है, जिससे अंदर की आवाज बहुत तेज हो जाती है। मुझे लगा कि पैराशूट टूट जाएगा और आगे की यात्रा मुश्किल होगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।" अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण पर उन्होंने कहा कि तब अमेरिका की अंतरिक्ष शटल प्रणाली अंतरिक्ष यात्रियों को बाहर देने की अनुमति देता था। जबकि रूसियों ने पूरी रॉकेट को ढका हुआ था, जिससे बाहर देखना संभव नहीं था। 

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