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BJP vs JDU: पूर्व जदयू अध्यक्ष ने नेहरू को निशाने पर लिया, जदयू में घमासान तेज होने के आसार
Thu, 19 May 2022 05:52 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 19 May 2022 05:52 PM IST
सार
जद (यू) के नेताओं के एक वर्ग का दावा है कि नरेंद्र मोदी सरकार में पार्टी के एकमात्र नेता सिंह भाजपा के करीब पहुंच गए हैं।
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जदयू नेता आरसीपी सिंह
- फोटो : एएनआई
विस्तार
जद (यू) नेता और केंद्रीय मंत्री आर सी पी सिंह ने गुरुवार को देश के प्रधानमंत्री के रूप में जवाहरलाल नेहरू की पसंद की तीखी आलोचना के साथ अपनी पार्टी के भीतर जुबान जंग तेज कर दी। उन्होंने दावा किया कि नेहरू को कांग्रेस संगठन में कम समर्थन मिलने के बावजूद शीर्ष पद मिला, यह हमारी पहली गलती थी। जद (यू) के पूर्व अध्यक्ष का नेहरू पर सख्त रुख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी के मुख्य चेहरे और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भारत के पहले प्रधानमंत्री के खिलाफ नरम रुख रखते हैं और अतीत में उनकी प्रशंसा भी कर चुके हैं।
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बलिदान दिए जाने के कांग्रेस द्वारा जिक्र का विरोध
आरएसएस से जुड़े रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी द्वारा आयोजित "राजनीतिक राजनीतिक दलों के लोकतांत्रिक शासन के लिए खतरा" पर एक सेमिनार में बोलते हुए सिंह ने गांधी परिवार के नेताओं द्वारा देश के लिए बलिदान देने के कांग्रेस द्वारा बार-बार जिक्र किए जाने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि बड़े पद की जिम्मेदारी के साथ जो भी होता है, उसे सहना ही होगा। उन्होंने कहा कि भगत सिंह जैसे लोगों ने भी बिना किसी पद के कुर्बानी दी।
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कभी नीतीश के थे विश्वासपात्र
कभी मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र माने जाने वाले सिंह भी गुरुवार को पटना में मौजूद नहीं थे, जहां नीतीश कुमार सहित पार्टी के शीर्ष नेता राज्यसभा उपचुनाव के उम्मीदवार अनिल हेगड़े के नामांकन दाखिल करने के दौरान मौजूद थे। जद (यू) के नेताओं के एक वर्ग का दावा है कि नरेंद्र मोदी सरकार में पार्टी के एकमात्र नेता सिंह भाजपा के करीब पहुंच गए हैं। राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है, और जद (यू) ने अभी तक एकमात्र पूर्णकालिक सीट के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, जो जीतने की स्थिति में है। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 मई है। किसी भी मंत्री का संसद सदस्य होना जरूरी है।
नीतीश के साथ नजर नहीं आए
जद (यू) के एक नेता ने कहा कि वह (सिंह) राज्यसभा उम्मीदवार द्वारा नामांकन दाखिल करने के दौरान पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ मौजूद नहीं थे और दिल्ली में एक कार्यक्रम में शामिल होकर नेहरू के बारे में कड़ी टिप्पणी कर रहे थे, जो कभी नीतीश कुमार का विचार नहीं रहा है। यह अपने आप में बहुत कुछ कहता है। अपने संबोधन में सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी के समर्थन के कारण नेहरू को प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया था। उन्होंने कहा, मैं उस युग पुरुष का नाम नहीं लेना चाहूंगा। जब पहली बार यह सवाल आया कि प्रधानमंत्री कौन होना चाहिए, तो किसे संगठन का समर्थन था, किसके पास वोट थे, सीडब्ल्यूसी (कांग्रेस वर्किंग कमेटी) के अधिक सदस्यों का समर्थन किसके पास था? लेकिन जिसके पास वोट नहीं थे, वह देश का पहला प्रधानमंत्री बना।