नोटबंदी के दौरान सहकारी बैंकों के घोटाले से अनजान है RBI
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नोटबंदी के एलान के कुछ ही दिन बाद सहकारी बैंकों में लेनदेन में करेंसी बदलने का आरोप लगा जिसके चलते इन बैंकों को नई करेंसी से दूर रखा गया था। गलगली ने आरबीआई से उन सहकारी बैंकों की जानकारी मांगी थी जहां आठ नवंबर से दस दिसंबर 2016 तक लेनदेन में अनियमितता पाई गई थी।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी मांगी थी कि जिन बैंकों में अनियमितता उजागर हुई है उनके खिलाफ को गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा दिया जाए। गलगली के इस सवाल के जवाब में केंद्रीय जन सूचना अधिकारी ए.जी.रे ने कहा हैं कि राज्य एवं जिला सहकारी बैंकों के बारे में मांगी गई जानकारी उनके पास उपलब्ध नहीं है, जबकि शहरी सहकारी बैंकों से संबंधित जानकारी दूसरे विभाग द्वारा दी जाएगी।
जिला सहकारी बैंकों की शाखाओं में नोट बदलने पर रोक लगा दी थी
मालूम हो कि 14 नवंबर 2016 को आरबीआई ने आदेश जारी कर सभी जिला सहकारी बैंकों की शाखाओं में एक हजार और 500 के नोट बदलने पर रोक लगा दी थी। आरबीआई को इन बैंकों से लगातार गड़बड़ी कर अपने परिचितों के नोट बदलने की शिकायत मिल रही थी।
गलगली का कहना हैं कि जब कोई जानकारी आरबीआई के पास नहीं है तब फिर इन बैंकों पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया। आरबीआई के इस कदम से किसान और मध्यमवर्गीय लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।