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'समान नागरिक संहिता को यूपी चुनाव से जोड़कर देखना गलत'

Wed, 06 Jul 2016 08:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 06 Jul 2016 08:30 PM IST
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ravishankar statement about universal civil code
रवि शंकर को दूसरी बार कानून मंत्री की जिम्मेदारी मिली है। - फोटो : PTI

नए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि समान नागरिक संहिता (यूनिफार्म सिविल कोड) को लेकर सरकार की पहल को उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव तो उत्तराखंड में भी है। मोदी सरकार में रवि शंकर को दूसरी बार कानून मंत्री की जिम्मेदारी मिली है।

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बुधवार को कानून मंत्री का पदभार संभालने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में रविशंकर प्रसाद ने कहा कि समान नागरिक संहिता को लेकर विचार विमर्श की जरूरत है, लिहाजा विधि आयोग को इस बारे में सलाह मशविरा और अध्य्यन कर इस संबंध में रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है।
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उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद-44 समान नागरिक संहिता की बात करता है। पिछले कई मौकों पर सुप्रीम कार्ट ने भी समान नागरिक संहिता को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर व्यापक बहस की जरूरत है।

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चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा है समान नागरिक संहिता

ravishankar statement about universal civil code

मालूम हो कि समान नागरिक संहिता भाजपा के चुनावी घोषणापत्र का भी हिस्सा है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम समुदाय में होने वाले ‘ट्रिपल तलाक’ की वैधता को संविधान के आलोक में परीक्षण करने का निर्णय लिया है। इस बारे में केंद्र सरकार को भी अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था इस मसले पर व्यापक बहस की जरूरत है। वहीं कैथोलिक इसाई समुदाय के कैनन कानून से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और इस मामले में भी गत सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई करने का निर्णय लिया है।

कानून मंत्री ने यह भी कहा कि समय पर न्याय दिलाना और पारदर्शिता इस सरकार की प्राथमिकता है। प्रसाद ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति के मसले पर सरकार और न्यायपालिका के बीच कॉमन ग्राउंड तैयार करने की कोशिश करेंगे। हमारा प्रयास है कि सौहार्दपूर्ण से काम हो।

कानून मंत्री ने यह भी कहा कि जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया के लिए तैयार किए जाने वाले मेमोरेंडम ऑफ प्रोसिजर (एमओपी) को लेकर न्यायपालिका और सरकार केलिए गतिरोध खत्म करने के लिए सरकार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि वह न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अदालतों में आधारभूत सुविधाओं दुरूस्त करने की हर मुमकिन कोशिश की जाएगी।

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