Rare Disease: 16 करोड़ रुपये चाहिए इस मासूम की जिंदगी बचाने के लिए, मां-बाप को अब क्राउड फंडिंग से मदद की आस
Rare Disease: अनमय सिंह का इलाज कर रहीं सर गंगाराम अस्पताल की डॉ. वेरोनिका अरोरा ने बताया कि एसएमए टाइप-1 (Spino Muscular Atrophy) बेहद दुर्लभ किस्म की बीमारी है। इसमें बच्चों के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं और उन्हं सांस लेने तक में बहुत परेशानी होने लगती है...
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सात महीने के अनमय सिंह एसएमए टाइप-1 (SMA Type-1) नाम की बेहद दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं। इस बीमारी में बच्चों के हाथ-पैर धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं और उन्हें सांस लेने में भी परेशानी होने लगती है। बाद में ये अपनी किसी भी जरूरत के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अनमय की जान बचाई जा सकती है और वे भी किसी दूसरे सामान्य बच्चे की तरह जिंदगी जी सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें एक विशेष इंजेक्शन जल्द से जल्द लगवाना होगा। इस इंजेक्शन के एक डोज की कीमत 16 करोड़ रुपये है, जिसे चुकाना किसी भी निम्न मध्यम वर्गीय परिवार के लिए संभव नहीं है। लिहाजा बच्चे की जान बचाने के लिए उनके माता-पिता क्राउड फंडिंग के जरिए मदद की गुहार लगा रहे हैं।
दुर्लभ बीमारी है एसएमए टाइप-1
सर गंगाराम अस्पताल की डॉ. वेरोनिका अरोरा अनमय सिंह का इलाज कर रही हैं। उन्होंने बताया कि एसएमए टाइप-1 (Spino Muscular Atrophy) बेहद दुर्लभ किस्म की बीमारी है। इसमें बच्चों के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं और उन्हं सांस लेने तक में बहुत परेशानी होने लगती है। यदि इन बच्चों को सही समय पर एक विशेष इंजेक्शन (AVXS-101 Onasemnogene Abeparvovec-xioi) दिया जा सके तो न केवल इनकी जिंदगी बचाई जा सकती है, बल्कि ये दूसरे बच्चों की तरह सामान्य जिंदगी भी जी सकते हैं। लेकिन इसके लिए यह इंजेक्शन इन्हें जल्द से जल्द मिल जाना चाहिए। इस बीमारी से मुक्ति के लिए इस इंजेक्शन की एक डोज ही काफी होती है।
यदि बच्चों को सही समय पर इंजेक्शन नहीं मिल पाता है तो बॉडी के न्यूरॉन्स धीरे-धीरे सूख जाते हैं। ये मस्तिष्क को संदेश भेजना बंद कर देते हैं, जिससे बच्चे को किसी बात का अनुभव नहीं होता। इससे उसकी तकलीफें बढ़ने लगती हैं।
बिगड़ रही है अनमय की हालत- पिता
अनमय सिंह के पिता सुमित कुमार सिंह सुल्तानपुर के रहने वाले हैं, उन्होंने अमर उजाला को बताया कि उनका बच्चा जन्म के समय पूरी तरह स्वस्थ लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ी, उनमें सामान्य बच्चों के जैसी गतिविधियां नहीं दिख रही थीं। डॉक्टर से संपर्क करने के बाद पता चला कि उनके बच्चे को अतिदुर्लभ बीमारी है। इसमें बच्चे के शरीर के अंग धीऱे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं। अब बच्चे के इलाज के लिए वे दर-दर भटक रहे हैं। बीमारी को ठीक करने के लिए जरूरी इंजेक्शन की कीमत बहुत ज्यादा होने से उनकी उम्मीदें लोगों की मदद पर निर्भर रह गई हैं।
उन्होंने बताया कि इंपैक्ट गुरू नाम की क्राउड फंडिंग वेबसाइट पर अनमय सिंह के लिए लोगों से मदद की गुहार लगाई जा चुकी है। लोग मदद कर भी रहे हैं, लेकिन इलाज के लिए आवश्यक रकम इतनी ज्यादा है कि इतना पैसा आसानी से जुटता नहीं दिख रहा है। यही कारण है कि वे सबसे मदद की अपील कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि लोग आगे आएंगे और उनके बच्चे की जान बचाई जा सकेगी।
दरअसल, यह इंजेक्शन भारत में नहीं बनाया जाता है। इसे विदेश से मंगवाना पड़ता है जिसकी अमेरिकन मुद्रा में लगभग 2.1 मिलियन डॉलर कीमत आती है। इस समय इसकी कीमत भारत में लगभग 16 करोड़ रुपये है। इसके अलावा इसको आयात करने पर जीएसटी सहित कई टैक्स देने पड़ते हैं। इस प्रकार इसकी कीमत किसी भी परिवार की पहुंच से बाहर हो जाती है। कई संगठनों ने सरकार से अपील की है कि इस तरह की दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं और इंजेक्शन टैक्स फ्री कर दिया जाना चाहिए। लेकिन अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है।