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खुद ही आग लगाकर भाग रहा था रामवृक्ष, उसी में गिरकर जल गया

Sat, 11 Jun 2016 04:39 AM IST
चंद्रमोहन शर्मा/अमर उजाला, आगरा
चंद्रमोहन शर्मा/अमर उजाला, आगरा Updated Sat, 11 Jun 2016 04:39 AM IST
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ramvriksh dead in the fire

जवाहर बाग प्रकरण की न्यायिक जांच का आदेश होने के बाद पुलिस ने अभी तक दर्ज 75 मुकदमों की जांच-पड़ताल तेज कर दी है। प्राथमिकता पर दो केस लिए गए हैं। पहला मथुरा के एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ फरह संतोष यादव की शहादत का। दूसरा कब्जाधारियों के दबंग नेता रामवृक्ष यादव की मौत का। दोनों में आपस में संबंध भी है।

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जांच में आया है कि दोनों पुलिस अफसरों पर कब्जाधारियों के साथ रामवृक्ष ने भी गोली चलाई थी। इसके बाद वह अपने दफ्तर में आग लगाकर भाग रहा था। तभी आस पास के लोग पहुंच गए थे। उनकी पिटाई से ही वह घायल होकर आग में घिर गया। खुद की लगाई आग में ही उसकी जान निकल गई। यही रिपोर्ट न्यायिक आयोग के सामने रखे जाने की तैयारी है।
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दो जून की शाम आपरेशन जवाहर बाग में दो पुलिस अफसरों के अलावा 27 कब्जाधारियों की जान गई थी। गोलियां दोनों ओर से चली थीं। लेकिन 29 शवों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने से सिर्फ एक की मौत आई। यह एसओ फरह संतोष यादव थे। मुकुल की शहादत सिर में पत्थर की चोट से हुई थी। कब्जाधारियों ने उनके सिर पर पीछे से पत्थर मारे थे। 27 कब्जाधारियों में आधे से ज्यादा चोट लगने से मरे। शेष की जान आग में जलने से हुई।

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रामवृक्ष के मरते ही भागे कब्जाधारी

ramvriksh dead in the fire

रामवृक्ष यादव के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण चोट लगना था। उसका शव झुलसा हुआ था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इसकी जांच में मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और कब्जाधारियों के बयान दर्ज किए गए हैं।

पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों ने पुष्टि की है कि कि अभी तक की जांच में यही बात सामने आई है कि जब रामवृक्ष अपने दफ्तर में आग लगाकर भाग रहा था, तब पब्लिक आ चुकी थी। लोगों ने उसे लाठी-डंडों से पीटा। वह जख्मी होकर उसी आग में जा गिरा जो उसने खुद ने लगाई थी। यहीं उसकी जान गई। जिस जगह पुलिस अफसर शहीद हुए, रामवृक्ष की लाश उससे काफी दूर गेट के पास मिली थी।

पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि कब्जाधारियों ने पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग की। जवाहर बाग के 20 पेड़ों पर गोलियां धंसी मिलीं। पुलिस वाले उनका सामना भी नहीं कर पा रहे थे। आस-पास से लोगों के आने पर पुलिस की जान में जान आई। जैसे ही रामवृक्ष लड़खड़ाता हुआ आग की लपटों में जाकर गिरा, वैसे ही उसके समर्थकों के पैर उखड़ गए और वे भागने लगे।

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