{"_id":"5bdf41c5bdec2232cd69b2b0","slug":"ram-temple-bill-or-ordinance-government-engaged-in-weighing-political-gains","type":"story","status":"publish","title_hn":"राम मंदिर निर्माण: बिल या अध्यादेश, सियासी नफा नुकसान तौलने में जुटी सरकार ","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
राम मंदिर निर्माण: बिल या अध्यादेश, सियासी नफा नुकसान तौलने में जुटी सरकार
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 05 Nov 2018 12:30 AM IST
विज्ञापन
नरेंद्र मोदी-अमित शाह ( फाइल फोटो)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अध्यादेश या फिर बिल। राम मंदिर मामले में फिर से चरम पर पहुंचे सियासी पारे के बीच सरकार और भाजपा इस मुद्दे पर संसद के शीतकालीन सत्र में बिल पेश किए जाने या सत्र के बाद अध्यादेश का सहारा लेने के सियासी नफा नुकसान तौलने में जुट गई है। सरकार, भाजपा और संघ का एक बड़ा धड़ा शीतकालीन सत्र में बिल पेश कर कांग्रेस समेत तमाम विपक्ष को सियासी पिच पर बैकफुट पर धकेलने के पक्ष में है। इस कड़ी में अगले महीने केदूसरे हफ्ते में संभावित शीत सत्र में बड़ा सियासी ड्रामा देखने को मिल सकता है।
विज्ञापन
सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के मुताबिक राम मंदिर मामले में 7 दिसंबर को पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद नाटकीय मोड़ आ सकता है। मंदिर निर्माण मामले में सरकार फ्रंट फुट पर खेलने के लिए तैयार है। फिलहाल दो विकल्पों अध्यादेश लाने या बिल पेश किए जाने के सवाल पर सरकार, भाजपा, संघ और संतों के बीच गहन विमर्श का दौर जारी है। विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद दोनों में से एक विकल्प पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। गौरतलब है कि बीते एक हफ्ते के अंदर भावी विकल्पों पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह संघ प्रमुख मोहन भागवत से महाराष्ट्र मे, यूपी के सीएम अयोध्या में संतों के साथ और सरकार के प्रतिनिधि तालकटोरा स्टेडियम में जारी धर्मादेश सम्मेलन में उपस्थित संतों के साथ विमर्श कर चुकी है।
विज्ञापन
बिल पेश करने का मतलब
सरकार, संघ और भाजपा का एक बड़ा धड़ा शीत सत्र में राम मंदिर निर्माण के लिए बिल पेश करने का पक्षधर है। रणनीतिकारों का मानना है कि बिल से कांग्रेस समेत तमाम विपक्ष की परेशानी बढ़ेगी। बिल के विरोध की स्थिति में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्र्रेस केनरम हिंदुत्व की हवा निकल जाएगी। हालांकि सरकार के लिए मुश्किल सहयोगियों को मनाना होगा। सवाल है कि क्या इसके लिए लोजपा, अपना दल, रालोसपा जैसे सहयोगी दल सरकार का साथ देंगे?
विज्ञापन
अध्यादेश का विकल्प
मंदिर निर्माण के लिए सरकार के पास अध्यादेश भी एक विकल्प है। एक धड़ा किसी की परवाह किए बिना सत्र के तत्काल बाद अध्यादेश लाने के पक्ष में है। इनका मानना है कि अध्यादेश लाने के बाद विपक्ष पर संत और बहुसंख्यक हिंदू समाज का दबाव पड़ेगा। सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के नतीजे पार्टी के पक्ष में नहीं आए तो राम मंदिर मामले में सरकार दो टूक निर्णय लेगी।