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Ram Navami Violence: बंगाल-झारखंड और बिहार में हिंसा के पीछे कौन? सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी
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धर्म और समाज का मामला अपने दायरे से निकलकर बड़ा सियासी हो गया है। प. बंगाल के हावड़ा में राम नवमी पर शोभा यात्रा निकली। कुछ देर में ही सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया। इस बार बार की हिंसा का रूप पिछली बार से भयानक था। बिहार में भी कुछ ऐसा ही है। प. बंगाल की मुख्यमंत्री ने इसे सुनियोजित बताया और इसका आरोप सीधे भाजपा, बजरंग दल पर लगाया। इसके ठीक उलट भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत बनर्जी ने इसके लिए मुख्यमंत्री के भड़काऊ बयानों को जिम्मेदार बता दिया। आरोप-प्रत्यारोप का दौर यहीं नहीं रुका। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जिम्मेदारी निभाते हुए राज्यपाल से हिंसा पर रिपोर्ट मांग ली है। ममता बनर्जी जैसे ही आरोप बिहार में राजद के नेता लगा रहे हैं और भाजपा हमलावर है।
बिहार में सैंया कोतवाल हो गए हैं?
यह केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का कहना है। वह कहते हैं कि ताजिया पर पत्थर क्यों नहीं चलते? सिर्फ हिंदुओं की शोभा यात्रा पर पत्थर और तलवार क्यों चलते हैं? गिरिराज सिंह अजब अंदाज में मुंह खोलने और बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने लगे हाथ इसका कारण भी बता दिया। कहा कि पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पलटूराम थे। अब बिहार के अधिकारी भी हो गए हैं। उन्होंने नीतीश कुमार की सरकार पर हताशा का भी आरोप लगाया। उन्होंने नालंदा और सासाराम में हिंसा की घटनाओं को मुस्लिम तुष्टीकरण से जोड़ा और कहा सैंया कोतवाल हो गए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे कहां चुप रहने वाले। उन्होंने कहा कि बिहार में गृह मंत्री अमित की जनसभा को रोकने के लिए सब हुआ। सरकार की कमजोरी में सब हो रहा है। बुद्ध का बिहार बम सूत्र और बंटवारे में बदल रहा है।
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शोभा यात्रा में रिवाल्वर और तलवार का क्या काम?
वरिष्ठ पतत्रकार शांतनु बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में आइए। हावड़ा घूम जाइए। हमें कहने की जरूरत नहीं है। लोग खुद बताएंगे कि राम नवमी की शोभा यात्रा में कोई रिवाल्वर लहरा रहा था और कोई तलवार। क्या मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम शोभा यात्रा में तलवार और रिवाल्वर लेकर निकलते थे? शांतनु का सीधा ईशारा उन लोगों की तरफ है जो राम नवमी की शोभा यात्रा के बहाने लोगों को भड़काने का काम कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने तो साफ आरोप लगा दिया है। ममता बनर्जी का कहना है कि इस हिंसा की घटना के पीछे न हिंदू हैं, न मुसलमान। बाहर से लाए गए लोग हैं। यानी सब सुनियोजित, प्रायोजित है। उन्होंने शोभा यात्रा का मार्ग अचानक बदले जाने का भी सवाल उठाया।
नालंदा में हिंसा और तनाव
बिहार के सासाराम, नालंदा में हिंसा के बाद तनाव है। धारा 144 लागू है। इंटरनेट पर पाबंदी है। इस तरह का तनाव केवल दो राज्यों में नहीं हुआ। गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड से भी इस तरह की खबरे हैं। बिहार में हिंसा पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उन्हें बहुत तकलीफ हुई है। नीतीश कुमार ने कहा कि सासाराम में हिंसा की घटना को तुरंत कंट्रोल किया गया। देर शाम बिहार शरीफ की हिंसा का पता चला तो वहां भी कंट्रोल किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने साफ निर्देश दे दिया है कि इस घटना के पीछे कौन है, पता किया जाए। इस तरह की घटना पहले होती थी, वर्षों से सब ठीक चल रहा था, बहुत तकलीफ हुई है।
अपने इस बयान के जरिए नीतीश कुमार संकेत दे रहे हैं कि वर्षों से सब ठीक चल रहा था और अब अचानक गड़बड़ हो रही है। वह कहना चाह रहे हैं कि एनडीए छोड़कर महागठबंधन के साथ जद(यू) के आने के बाद यह हिंसा की घटना इस तरह हुई। आरोप (भाजपा पर) वही ममता बनर्जी वाला है। सांप्रदायिक हिंसा के पीछे की राजनीति। बिहार के पत्रकार संजय वर्मा कहते हैं कि जितना भी राम-रहीम टकराएंगे, उतना किसी न किसी को सियासी फायदा होगा। वह तंज कसते हुए कहते हैं कि आपका यूपी तो इसकी बड़ी प्रयोगशाला है। गुजरात का उदाहरण है। बिहार बचा था। प्रयोग फिर हो रहा है।
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कर्नाटक में विधानसभा चुनाव और अगले साल लोकसभा का महासंग्राम
सांप्रदायिक हिंसा के पीछे राजनीति की जमीन अब थोड़ी और चौड़ी हो रही है। राज्यसभा टीवी में एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के नतीजे 13 मई को आएंगे। 10 मई को मतदान होगा। चुनाव के तारीख की घोषणा से पहले वहां के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा की टीम ने अल्पसंख्यकों को आरक्षण के मुद्दे को हवा दी है। चुनाव तारीख की घोषणा के बाद अब कर्नाटक की जमीन से इस मुद्दे को हवा देना मुश्किल है। क्या पता गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, पंश्चिम बंगाल, बिहार का कुछ लाभ मिल जाए। इसके बाद 2024 तक केंद्रीय सत्ताधारी दल से जुड़े लोग इस तरह के तमाम प्रयोग कर सकते हैं। इसमें बहुत आश्चर्य चकित होने जैसा कुछ नहीं है। वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार कहते हैं कि एक वर्ग भड़कने के लिए तैयार बैठा है। भड़काइए तो भड़क जाएगा। सियासी लोग इसी की ताक में रहते हैं। वह फायदा उठा लेते हैं और जनता भुगतती रहती है। इसमें नई बात कौन सी है।