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Defamation Notice: सत्यपाल मलिक की बढ़ सकती हैं मुश्किलें; राम माधव ने भेजा मानहानि का नोटिस
Thu, 13 Apr 2023 09:56 PM IST
अभिषेक दीक्षित
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 13 Apr 2023 09:56 PM IST
सार
मामले में कांग्रेस ने भी राम माधव पर निशाना साधा था। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेरा ने मलिक के बयान का हवाला देते हुए कहा था कि सीबीआई या ईडी राम माधव का दरवाजा क्यों नहीं खटखटा रही है, जबकि एक पूर्व राज्यपाल ने उनका पर्दाफाश कर दिया है।
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राम माधव।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के नेशनल एग्जीक्यूटिव राम माधव ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक को मानहानि का नोटिस भेजा है। अपने वकीलों के जरिए भेजे गए नोटिस में आठ अप्रैल को एक साक्षात्कार में की गई मलिक की टिप्पणी के लिए माफी मांगने को कहा गया है।
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सूत्रों की मानें तो राम माधव ने सत्यपाल मलिक को उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर 48 घंटे के भीतर एक खुली और सार्वजनिक माफी जारी करने के लिए कानूनी नोटिस भेजा है। ऐसा न होने पर आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर कराने की चेतावनी भी दी गई है।
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दरअसल, सत्यपाल मलिक ने एक यूट्यूब चैनल पर दावा किया था कि जब वह जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे, तब आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने एक उद्योगपति से संबंधित दो फाइलों को निपटाने के लिए उन्हें 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की थी। मामले में कांग्रेस ने भी राम माधव पर निशाना साधा था। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेरा ने मलिक के बयान का हवाला देते हुए कहा था कि सीबीआई या ईडी राम माधव का दरवाजा क्यों नहीं खटखटा रही है, जबकि एक पूर्व राज्यपाल ने उनका पर्दाफाश कर दिया है।
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कांग्रेस नेता कहा था कि सीबीआई ने अपने मुख्यालय में पूर्व राज्यपाल से खुले तौर पर पूछताछ की थी, लेकिन राम माधव को अभी तक पूछताछ के लिए क्यों नहीं बुलाया गया है। ईडी-सीबीआई बार-बार विपक्षी नेताओं के यहां छापे मारती है या पूछताछ करती है, लेकिन भाजपा नेताओं से क्यों नहीं? ये दोहरे मानदंड क्यों?
इस बारे में पूछे जाने पर माधव ने कहा था ये पूरी तरह से झूठे आरोप हैं। सीबीआई पहले ही इस मामले की गहन जांच कर चुकी है। मैं बहुत जल्द इन झूठे आरोपों को बेचने वालों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करूंगा। मलिक अगस्त 2018 से अक्टूबर 2019 के बीच जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे और अक्तूबर 2021 में वह मेघालय के राज्यपाल थे।