राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े वेदांती बोले- अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा में नहीं बनने देंगे कोई मस्जिद
- बाबर के नाम पर भारत में कोई मस्जिद स्वीकार नहीं
- सुन्नी वक्फ बोर्ड को मुकदमा हार जाने का अहसास, अब कर रहा है समझौते का प्रयास
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डॉ. राम विलास वेदांती को अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा में कोई भी नई मस्जिद स्वीकार नहीं है। राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े वेदांती का कहना है कि वह इस तरह की कोई मस्जिद वहां नहीं बनने देंगे। डा. वेदांती का यह भी कहना है कि उच्चतम न्यायालय में सुन्नी वक्फ बोर्ड मुकदमा हार चुका है। उसके वकील राजीव धवन को इसका अहसास हो चुका है और इसलिए उन्होंने अदालत में नक्शा फाड़ा है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में डा. वेदांती ने कहा कि वह धवन के कृत्य की घोर निंदा करते
सुन्नी वक्फबोर्ड कर रहा है समझौते का प्रयास
अदालत में मुकदमा हारने की प्रबल संभावना देखकर सुन्नी वक्फ बोर्ड अब समझौते का प्रयास कर रहा है। बुधवार 16 अक्टूबर को भी उसने इस तरह का प्रस्ताव दिया था कि काशी और मथुरा में मस्जिद का अस्तित्व रहने दिया जाए, लेकिन राम जन्मभूमि के पक्षकारों ने इसे नकार दिया है। डा. वेदांती का कहना है कि गुरुवार 17 अक्टूबर को भी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अदालत में हलफनामा दायर करके फिर समझौता करने का प्रयास किया है।
वेदांती के मुताबिक अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भगवान राम का भव्य मंदिर बनेगा। इसके अलावा काशी और मथुरा में मंदिर अपनी भव्यता के साथ रहेंगे। उन्होंने कहा कि अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा में मस्जिद निर्माण से संबंधित अगर उच्चतम न्यायालय का फैसला आएगा तो राम लला के पक्षकार किसी भी सूरत में उसे बनने नहीं देंगे और उसका विरोध करेंगे।
एक ही सूरत में हो सकता है समझौता
उनका कहना है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड के साथ एक ही सूरत में समझौता संभव है। वक्फ बोर्ड राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए समझौता करे, तो हम सहमत हैं। अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा को छोड़कर वह देश के किसी भी कोने में मस्जिद का निर्माण करे, तो हमें कोई आपत्ति नहीं होगी। यह मस्जिद भी बाबर के नाम पर बने। बाबर एक मुगल आक्रांता था। साथ ही, यह मस्जिद अल्लाह के नाम पर बने तो कोई बुराई नहीं है। डा. वेदांती ने कहा कि अयोध्या में 50 से अधिक मस्जिद हैं, वहां मुसलमान जाकर अपनी नमाज पढ़ें, राम लला को इस पर भी कोई आपत्ति नहीं है। इसके अलावा मथुरा और काशी का नाम सुन्नी वक्फ बोर्ड न ले।