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Rajya Sabha: पीयूष गोयल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस; जानें निलंबन के बाद भी क्यों राज्यसभा में आए डेरेक

Tue, 08 Aug 2023 05:13 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 08 Aug 2023 05:13 PM IST
सार

Rajya Sabha: विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के कई नेताओं ने राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। जिन दलों के नेताओं ने नोटिस दिया है, उनमें तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस, आप, द्रमुक, राजद, जदयू, राकांपा और वाम दल शामिल हैं। 

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Rajya Sabha: privilege notice against Piyush Goyal ; Know why Derek came to Rajya Sabha even after suspension
पीयूष गोयल, डेरेक ओ ब्रायन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के कई नेताओं ने राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। जिन दलों के नेताओं ने नोटिस दिया है, उनमें तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस, आप, द्रमुक, राजद, जदयू, राकांपा और वाम दल शामिल हैं। 

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सूत्रों ने कहा कि 'इंडिया' के दलों ने राज्यसभा के सभापति को नोटिस देकर गोयल की कुछ टिप्पणी के खिलाफ शिकायत की। गोयल न्यूज पोर्टल 'न्यूजक्लिक' को लेकर बोल रहे थे कि उसने चीनी प्रचार को फैलाने के लिए कथित तौर पर चीन से जुड़ी फर्मों से धन प्राप्त किया। 
 

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गोयल ने विपक्षी दलों और न्यूज पोर्टल 'न्यूजक्लिक' के बीच संबंधों पर सवाल उठाया। इस पोर्ट पर 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने चीन से जुड़ी फर्मों से धन प्राप्त करने का आरोप लगाया है।
 

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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अपने ट्वीट में कहा, 'आज दोपहर एक बजे राज्यसभा में 'इंडिया' के दलों के नेताओं ने विपक्ष को 'देशद्रोही' कहने के लिए सदन के नेता पीयूष गोयल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया।' विशेषाधिकार हनन नोटिस पर हस्ताक्षर करने वाले कांग्रेस नेता ने कहा, 'सदन के पटल पर उनसे माफी मांगने से कम कुछ नहीं चलेगा।'
 

बाद में सदन में गोयल ने कहा कि वह ऐसे किसी भी शब्द को वापस लेते हैं जो संसदीय नहीं हो सकता है और उन्होंने सभापति से इसे रिकॉर्ड से हटाने का आग्रह किया। सभापति ने कहा कि वह रिकॉर्ड देखेंगे और अगर कुछ असंसदीय है तो वह सदन के रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि अगर कुछ भी असंसदीय है तो वह इसे हटा देंगे।
 

ब्रायन के निलंबन पर नहीं हुआ मतदान
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन के निलंबन को लेकर आज राज्यसभा में उस समय हंगामा हो गया जब सभापति ने पहले घोषणा की कि उन्हें सदन से हटना होगा लेकिन बाद में कहा कि उन्हें निलंबित करने के प्रस्ताव पर मतदान नहीं हुआ है और इसलिए वह कार्यवाही में शामिल होना जारी रख सकते हैं।

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि उन्होंने उन्हें निलंबित करने के प्रस्ताव पर मतदान की अनुमति न देने का 'दूरदर्शी' निर्णय लिया है। सभापति ने इससे पहले सदन में अमर्यादित व्यवहार के लिए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता को निलंबित करने की घोषणा की थी।

 

कांग्रेस के प्रमोद तिवारी सहित कई सदस्यों ने सभापति से ओ ब्रायन के मामले में नरम रुख अपनाने का आग्रह किया लेकिन सभापति ने पूछा कि उन्हें नरमी क्यों दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा, 'अगर ओ ब्रायन को इस सत्र के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया होता, तो क्या आपको लगता है कि उन्हें फिर से सदन में प्रवेश करने की अनुमति दी जाती? क्या वह फिर से वापस आ सकते हैं?'

धनखड़ ने कहा कि उनके लिए किसी भी सदस्य के खिलाफ कार्रवाई दुख का विषय है। उन्होंने कहा, 'मैंने अपना दुख खत्म कर दिया है, किसी ने ऐसा नहीं किया। यदि प्रस्ताव पूरी तरह से पारित हो जाता तो ओ ब्रायन फिर से सदन में प्रवेश नहीं कर सकते थे।

राज्यसभा से पारित हुए कई अहम बिल
राज्यसभा ने मंगलवार को भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2023, राष्ट्रीय नर्सिंग और मिडवाइफरी आयोग विधेयक, 2023 और राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग विधेयक, 2023 भी संक्षिप्त चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया।

भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक
आईआईएम की प्रबंधन जवाबदेही राष्ट्रपति को सौंपने के प्रावधान पर संसद ने मंगलवार को बिल पारित कर दिया। इस बिल के अनुसार अब प्रमुख बी-स्कूलों के विजिटर राष्ट्रपति होंगे। उनके पास ही कामकाज का ऑडिट और निदेशकों को हटाने या नियुक्त करने की शक्तियां होंगी। राज्यसभा ने भारी मतों से भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) बिल 2023 को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य प्रतिष्ठित संस्थानों की शैक्षणिक स्वायत्तता को संरक्षित रखते हुए प्रशासन को मजबूत करना है। लोकसभा ने चार अगस्त को इस बिल को मंजूरी दे दी थी।नेशनल

राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग विधेयक
राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग विधेयक दंत चिकित्सक अधिनियम, 1948 को निरस्त करने वाला है और दंत चिकित्सा शिक्षा और पेशे को विनियमित करने के लिए राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग (एनएमसी) स्थापित करने का प्रस्ताव करता है। इसका उद्देश्य दंत चिकित्सा शिक्षा को किफायती और गुणवत्तापूर्ण मौखिक स्वास्थ्य देखभाल को सुलभ बनाना भी है।

राष्ट्रीय नर्सिंग और मिडवाइफरी आयोग विधेयक, 2023
इसका का उद्देश्य राष्ट्रीय नर्सिंग और मिडवाइफरी आयोग (एनएनएमसी) की स्थापना करना और भारतीय नर्सिंग परिषद अधिनियम, 1947 को निरस्त करना है। लोकसभा ने इन दोनों विधेयकों को 28 जुलाई को पारित कर दिया था। राज्यसभा की मंजूरी के साथ प्रस्तावित कानूनों को लेकर संसदीय प्रक्रिया पूरी हो गई है।
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