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जजों को अतिरिक्त पेंशन: सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट न्यायाधीश वेतन, सेवा शर्तें संशोधन विधेयक 2021 पारित
Mon, 13 Dec 2021 04:49 PM IST
सुरेंद्र जोशी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 13 Dec 2021 04:49 PM IST
सार
केंद्रीय कानून व न्याय मंत्री किरण रिजिजू ने सोमवार को हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश (वेतन और सेवा शर्तें) संशोधन विधेयक 2021 राज्यसभा में पेश किया। इस विधेयक को लोकसभा 8 दिसंबर को ही पारित कर चुकी है।
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किरण रिजिजू
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के जजों के वेतन व सेवा शर्त अधिनियम में संशोधन का विधेयक सोमवार को राज्यसभा ने भी पारित कर दिया। इससे सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को अतिरिक्त पेंशन का रास्ता साफ हो गया। राज्यसभा ने इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया।
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इस संशोधित विधेयक के पारित होने से यह स्पष्ट होगा कि सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों को कब से अतिरिक्त पेंशन मिलेगी। केंद्रीय कानून व न्याय मंत्री किरण रिजिजू ने सोमवार को हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश (वेतन और सेवा शर्तें) संशोधन विधेयक 2021 राज्यसभा में पेश किया। इस विधेयक को लोकसभा 8 दिसंबर को ही पारित कर चुकी है। यह विधेयक हाईकोर्ट जज वेतन व सेवा शर्तें कानून 1954 और सुप्रीम कोर्ट जज वेतन व सेवा शर्तें कानून 1958 में संशोधन करेगा।
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राज्यसभा में विधेयक पेश करते हुए मंत्री रिजिजू ने कहा कि यह एक बहुत ही सीमित संशोधन विधेयक है, जिसे हम उक्त अधिनियमों में सीमित उद्देश्य के लिए बदलाव के लिए लाए हैं। यह किसी भी तरह से न्यायाधीशों के वेतन को प्रभावित नहीं करने वाला है। यह केवल सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की पेंशन में बढ़ोतरी से संबंधित है।
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राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने विधेयक पर चर्चा शुरू करने के लिए विपक्ष से आग्रह किया। इस पर राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने उपसभापति से कहा कि वे पहले सदन के 12 निलंबित विपक्षी सदस्यों पर निर्णय लें। खड़गे की मांग का द्रमुक तिरुचि शिवा समेत विपक्ष के कुछ अन्य सदस्यों ने भी समर्थन किया।
हालांकि उपसभापति सिंह ने कहा कि सभापति पहले ही सभी दलों से आग्रह कर चुके हैं कि वे निलंबन के मुद्दे का सौहार्दपूर्ण हल निकालें। इसके बाद हरवंश ने कांग्रेस की एमी याज्ञनिक को विधेयक पर चर्चा शुरू करने को कहा। इस पर याज्ञनिक ने अदालतों में बड़ी संख्या केस लंबित होने का मामला उठाया। उन्होंने जनता को न्याय पाने में हो रही मुश्किलों का भी मुद्दा उठाया।
द्रमुक के केपी विल्सन ने कहा कि हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु मौजूदा 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि 57 लाख मामले हाईकोर्टों में और लगभग 75,000 मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। चर्चा के बाद राज्यसभा ने सर्वसम्मति से इस विधेयक को पारित कर दिया।