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इस बिल को पास कराने के लिए एकजुट हुआ पक्ष-विपक्ष

Wed, 14 Dec 2016 09:05 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 14 Dec 2016 09:05 PM IST
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Rajya Sabha passes bill on rights of differently-abled

राज्यसभा में बुधवार को निशक्त व्यक्ति अधिकार विधेयक 2014 पास हो गया है। संसद में चल  रहे लगातार  हंगामें के बीच सरकार और विपक्ष के सभी सदस्यों ने एक सुर से इसका समर्थन किया।  नोटबंदी के मुद्दे पर सदन में पिछले कई हफ्तों से विपक्ष के हंगामे के वजह से कोई कामकाज नहीं हो पाया था। राज्यसभा के उपसभापति पी जे कुरियन ने इस समर्थन भरे माहौल पर खुशी जताते हुए ऐसा दृश्य बरकरार रखने की उम्मीद जताई। 

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सुबह ही विपक्ष की ओर से नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद और बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा कि सारे काम बाद में होंगे पहले हमें यह बिल संसद में पास कर देना चाहिए वो भी बिना बहस के। सरकार ने भी सहमति जताई और इसे राज्यसभा में पेश कर दिया गया। बिल में कई संशोधन भी थे। इसे पास कराने में काफी समय लगा। मगर सभी सदस्यों ने शांति से प्रक्रिया में हिस्सा लिया। हालांकि 12 बजे प्रश्नकाल शुरू होने के बाद बिल की प्रक्रिया को रोक दिया गया। 
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विपक्षी सदस्यों ने प्रश्नकाल में नोटबंदी के मुद्दे पर एक बार फिर हंगामा शुरु कर दिया। विपक्ष इस बिल के अलावा सदन के किसी भी  कामकाज  पर सहमत  नहीं था। सदन दो बजे तक के लिए स्थगित किया गया। दो बजे के बाद दोबारा बिल को पास कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने संशोधन पेश किए और सर्वसम्मति के साथ इस बिल को पारित कर दिया गया। 

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सीपीएम के सीताराम येचुरी इसकी भाषा पर एतराज जताया

Rajya Sabha passes bill on rights of differently-abled

इस दौरान सीपीएम के सीताराम येचुरी इसकी भाषा पर एतराज जताया। साथ ही बिल में मेंटल डिसेबिलिटी, इंटेलेक्चुअल डिसेबलिटी की श्रेणी पर सवाल उठाते हुए कहा कि कौन सी अथॉरिटी इस श्रेणी की विकलांगता को तय करेगी। जवाब में मंत्री ने कहा कि इसके लिए मेडिकल बोर्ड का गठन होगा।अब यह बिल लोकसभा में जाएगा जहां से मंजूरी मिलने के बाद इसके अमली  जामा पहनाने  का रास्ता साफ हो जाएगा। 

चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता कर्ण सिंह ने कहा कि ये बिल पास कर हम भारत के करोड़ों लोगों को लाभ पहुंचाएंगे। दिव्यांगों को 4 फीसदी का आरक्षण का पूरी तरह से पालन किया जाए। लोगों को इनके बारे में प्रशिक्षित करने की जरूरत है। वहीं सपा नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि डिसएबल की परिभाषा को और सरल करिए। वो सर्टिफिकेट बनवाने जाते हैं। इसमें उन्हें कम परेशानी हो। उनके आरक्षण का कोटा बढ़ाया जाए। 

बसपा नेता सतीश मिश्रा ने कहा कि बीएसपी इस बिल का पूर्ण रूप से समर्थन करती है। इन्हें डिसेबल कहना सही नहीं है। इन्हें डिफरेंटली एबल कहा जाना चाहिए। इनको मिले रिजर्वेशन को सरकार ठीक से लागू करें। लोगों को मजबूर होकर कोर्ट न जाना पड़े।

विधेयक की खास बातें 

Rajya Sabha passes bill on rights of differently-abled

सरकार की ओर से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कर्ण सिंह के जवाब में कहा कि अब तीन प्रतिशत आरक्षण था, अब 4 फीसदी करने जा रहे हैं। हमने 2015 में विशेष भर्ती अभियान चालू किया। हमने देशव्यापी परिचय पत्र बनेगा वो सारे देश में चलेगा। उनका लाभ उनको मिलेगा। 2 करोड़ उनसठ लाख इनकी जनसंख्या है। हमने केरल में दिव्यांग विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा हमने की है। नए बिल से सब लाभान्वित होंगे।

विधेयक का उद्देश्य निर्धारित मानक के तहत निशक्तता वाले व्यक्तियों के लिए सरकारी नौकरियों और उच्च शैक्षिक संस्थानों में आरक्षण को वर्तमान के तीन प्रतिशत से बढ़ाकर चार प्रतिशत करना है। इसमें निशक्तता के स्वरूप को वर्तमान में सात से बढ़ाकर 21 करना है जिसमें आटिज्म स्पेक्ट्रम डिसॉर्डर, सेरेब्रल पाल्सी, मस्कुलर डिस्ट्रोफी शामिल है।

सरकार के पास इसमें और तरह की निशक्तता को जोडने का अधिकार होगा। विधेयक में निशक्त जनों के खिलाफ अपराधों के लिए जुर्माने का भी प्रावधान है। इसमें निशक्त जनों की सरकारी इमारतों में पहुंच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।  विधेयक का उद्देश्य निशक्त जन :समान अवसर, अधिकार संरक्षण एवं पूर्ण भागीदारी: कानून, 1995 को प्रतिस्थापित करना है। 

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