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Rajya Sabha Election: आखिर BJP ने बिट्टू-कुरियन पर क्यों खेला दांव?, MP-राजस्थान के साथ केरल-पंजाब पर है नजर
Wed, 21 Aug 2024 05:05 PM IST
श्वेता महतो
डिजिटल ब्यूरो।
डिजिटल ब्यूरो।
Published by: श्वेता महतो
Updated Wed, 21 Aug 2024 05:05 PM IST
सार
2024 के लोकसभा चुनाव में यादव का टिकट काटकर भाजपा ने सिंधिया को उम्मीदवार बनाया था। उस दौरान अमित शाह ने वादा किया था कि केपी का ख्याल रखा जाएगा। लेकिन पहले केपी को लोकसभा का टिकट नहीं दिया गया और अब राज्यसभा सीट भी हाथ नहीं लगी।
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राजस्थान के दिग्गज नेताओं की उम्मीदों पर BJP हाईकमान ने पानी फेरा
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
राज्यसभा की नौ सीटों के लिए भाजपा ने मंगलवार को उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। इनमें केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को पार्टी ने राजस्थान से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। जबकि केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन को मध्य प्रदेश से टिकट दिया गया है। हरियाणा से किरण चौधरी को प्रत्याशी बनाया गया है। लोकसभा चुनाव में शिकस्त खाने वाले पार्टी के बड़े कई नेता राज्यसभा सदस्य बनने की जुगत में थे, लेकिन पार्टी ने दूसरे दलों से आए कई नेताओं को प्रत्याशी बनाकर उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफा देने से खाली हुई थी। गुना लोकसभा सीट से सांसद चुने जाने के बाद सिंधिया ने राज्यसभा सीट को छोड़ दिया था। इसके बाद गुना के पूर्व सांसद केपी यादव से लेकर नरोत्तम मिश्रा और जयभान सिंह पवैया के राज्यसभा जाने की चर्चा थी, लेकिन बीजेपी ने कुरियन के नाम के ऐलान के बाद सभी दावेदारों की हसरत अधूरी रह गई है। इनमें सबसे बड़ा झटका केपी यादव को लगा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में यादव का टिकट काटकर भाजपा ने सिंधिया को उम्मीदवार बनाया था। उस दौरान अमित शाह ने वादा किया था कि केपी का ख्याल रखा जाएगा। लेकिन पहले केपी को लोकसभा का टिकट नहीं दिया गया और अब राज्यसभा सीट भी हाथ नहीं लगी। सूत्रों के अनुसार,केपी यादव के लिए नई भूमिका अब मध्यप्रदेश के निगम मंडलों में तय की जा रही है।
दरअसल,बीजेपी ने कुरियन के जरिए केरल के समीकरण को साधने का दांव चला है। कुरियन ईसाई समुदाय से आते हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी केरल की वायनाड लोकसभा सीट पर आने वाले उपचुनाव को साधने का दांव चला है। कुरियन अभी केंद्रीय कैबिनेट में मत्स्य पालन, पशुपालन डेयरी विभाग के राज्यमंत्री है। कुरियन 1980 से भाजपा के अलग अलग मोर्चों में काम करते रहे है।
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इसलिए रवनीत बिट्टू का लगा नंबर
इसी तरह पार्टी ने राजस्थान की सीट से भाजपा ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को उम्मीदवार बनाया है, जबकि पहले सतीश पुनिया, अरुण चतुर्वेदी और राजेंद्र सिंह राठौड़ के उच्च सदन जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं। रवनीत बिट्टू के नाम पर मुहर लगने के बाद बीजेपी के सारे दिग्गजों की उम्मीदों पर राज्यसभा जाने के कयासों पर विराम लग गया है। बीजेपी ने बिट्टू को भेजकर पंजाब में सिख वोटों को साधने का दांव चला है।
पंजाब में 60 प्रतिशत आबादी सिखों की है। बिट्टू पगड़ीधारी सिख हैं। उन्हें मंत्री बनाने के बाद राज्यसभा भेजते हुए पार्टी इस आबादी के करीब जाने की कोशिश कर रही है। पार्टी की रणनीति सिख चेहरों को आगे रखते हुए ग्रामीण एरिया में पैठ बनाने की है। सूत्रों का कहना है कि, राजस्थान के साथ हरियाणा के रोहतक से दीपेंद्र हुड्डा के लोकसभा सांसद चुने जाने के बाद वहां भी सीट खाली हो गई। अब इस सीट पर भी चुनाव हो रहे हैं। इस सीट के लिए पहले रवनीत बिट्टू का नाम सामने आया था, लेकिन विरोध बढ़ता देख भाजपा अब रवनीत बिट्टू को राजस्थान से राज्यसभा भेजे जाने का निर्णय लिया गया।
लुधियाना से 2 बार सांसद रह चुके रवनीत बिट्टू लोकसभा चुनाव 2024 से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। बिट्टू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत बेअंत सिंह के पोते और पूर्व मंत्री तेज प्रकाश सिंह के बेटे हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें लुधियाना से टिकट दिया, लेकिन उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से 20 हजार 942 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। लोकसभा चुनाव में हार के बाद भी भाजपा ने पंजाब से किसी और को न चुनकर मोदी 3.0 सरकार में बिट्टू को केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया है। इसके बाद उनका राज्यसभा में जाकर सांसद के तौर पर शपथ लेना बेहद जरूरी है।
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मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफा देने से खाली हुई थी। गुना लोकसभा सीट से सांसद चुने जाने के बाद सिंधिया ने राज्यसभा सीट को छोड़ दिया था। इसके बाद गुना के पूर्व सांसद केपी यादव से लेकर नरोत्तम मिश्रा और जयभान सिंह पवैया के राज्यसभा जाने की चर्चा थी, लेकिन बीजेपी ने कुरियन के नाम के ऐलान के बाद सभी दावेदारों की हसरत अधूरी रह गई है। इनमें सबसे बड़ा झटका केपी यादव को लगा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में यादव का टिकट काटकर भाजपा ने सिंधिया को उम्मीदवार बनाया था। उस दौरान अमित शाह ने वादा किया था कि केपी का ख्याल रखा जाएगा। लेकिन पहले केपी को लोकसभा का टिकट नहीं दिया गया और अब राज्यसभा सीट भी हाथ नहीं लगी। सूत्रों के अनुसार,केपी यादव के लिए नई भूमिका अब मध्यप्रदेश के निगम मंडलों में तय की जा रही है।
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दरअसल,बीजेपी ने कुरियन के जरिए केरल के समीकरण को साधने का दांव चला है। कुरियन ईसाई समुदाय से आते हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी केरल की वायनाड लोकसभा सीट पर आने वाले उपचुनाव को साधने का दांव चला है। कुरियन अभी केंद्रीय कैबिनेट में मत्स्य पालन, पशुपालन डेयरी विभाग के राज्यमंत्री है। कुरियन 1980 से भाजपा के अलग अलग मोर्चों में काम करते रहे है।
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इसलिए रवनीत बिट्टू का लगा नंबर
इसी तरह पार्टी ने राजस्थान की सीट से भाजपा ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को उम्मीदवार बनाया है, जबकि पहले सतीश पुनिया, अरुण चतुर्वेदी और राजेंद्र सिंह राठौड़ के उच्च सदन जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं। रवनीत बिट्टू के नाम पर मुहर लगने के बाद बीजेपी के सारे दिग्गजों की उम्मीदों पर राज्यसभा जाने के कयासों पर विराम लग गया है। बीजेपी ने बिट्टू को भेजकर पंजाब में सिख वोटों को साधने का दांव चला है।
पंजाब में 60 प्रतिशत आबादी सिखों की है। बिट्टू पगड़ीधारी सिख हैं। उन्हें मंत्री बनाने के बाद राज्यसभा भेजते हुए पार्टी इस आबादी के करीब जाने की कोशिश कर रही है। पार्टी की रणनीति सिख चेहरों को आगे रखते हुए ग्रामीण एरिया में पैठ बनाने की है। सूत्रों का कहना है कि, राजस्थान के साथ हरियाणा के रोहतक से दीपेंद्र हुड्डा के लोकसभा सांसद चुने जाने के बाद वहां भी सीट खाली हो गई। अब इस सीट पर भी चुनाव हो रहे हैं। इस सीट के लिए पहले रवनीत बिट्टू का नाम सामने आया था, लेकिन विरोध बढ़ता देख भाजपा अब रवनीत बिट्टू को राजस्थान से राज्यसभा भेजे जाने का निर्णय लिया गया।
लुधियाना से 2 बार सांसद रह चुके रवनीत बिट्टू लोकसभा चुनाव 2024 से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। बिट्टू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत बेअंत सिंह के पोते और पूर्व मंत्री तेज प्रकाश सिंह के बेटे हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें लुधियाना से टिकट दिया, लेकिन उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से 20 हजार 942 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। लोकसभा चुनाव में हार के बाद भी भाजपा ने पंजाब से किसी और को न चुनकर मोदी 3.0 सरकार में बिट्टू को केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया है। इसके बाद उनका राज्यसभा में जाकर सांसद के तौर पर शपथ लेना बेहद जरूरी है।