गुजरात की तरह ही यूपी में कांटे का होगा राज्यसभा चुनाव
केन्द्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शिव प्रताप शुक्ल को पूरा भरोसा है कि भाजपा उपचुनाव में फूलपुर और गोरखपुर की दोनों सीटें जीतेगी। इतना ही नहीं पार्टी उ.प्र. से नौंवी राज्यसभा सीट भी जीतेगी। हालांकि नौंवी सीट के लिए भाजपा के पास पर्याप्त मत नहीं है।
आठ प्रत्याशियों के बाद उसके पास 27 विधायक ही बचते हैं। नौंवे प्रत्याशी के रूप में भाजपा ने अनिल अग्रवाल को उतारा है। विपक्ष के कुछ वरिष्ठ नेताओं को भी लग रहा है कि अनिल अग्रवाल चुनाव में हल्के नहीं पड़ेंगे। ऐसे में उ.प्र. की राज्यसभा सीटों के चुनाव गुजरात की तरह का नजारा देखने को मिल सकता है।
कांग्रेस के उ.प्र. की राजनीति में मंझे हुए एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि अनिल अग्रवाल को हल्के में मत आंकिए। वह राज्यसभा का चुनाव जीत सकते हैं। सूत्र का कहना है कि भाजपा के पास आठ सीटों के बाद 27 वोट बचते हैं। उ.प्र. में रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया, अमन मणि त्रिपाठी समेत चार निर्दल हैं।
माना यह जा रहा है कि चारों निर्दलीयों के वोट भाजपा के पाले में आसानी से जा सकते हैं। इसका एक कारण उ.प्र. और केन्द्र में भाजपा की सरकार होना तथा अमित शाह जैसा भाजपा अध्यक्ष होना भी है। हालांकि भाजपा के नेता अपने 27 विधयाकों के बाद अन्य प्रथम वरीयता के मतों के मिलने का दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह अभी की स्थिति है, लेकिन अंत में हमें प्रथम वरीयता के पूरे 37 मत मिल जाएंगे।
तोड़-फोड़...जोड़... या .......
जाहिर है ऐसे में विधायकों के प्रथम वरीयता का मत पाने के लिए कुछ दलों के विधायकों को भाजपा उम्मीदवार के पाले में लाने के लिए कसरत शुरू होगी। इसके लिए विधायक अपनी पार्टी से बगावत या क्रास वोटिंग कर सकते हैं। बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी भी जेल में हैं और उनका वोट काफी माने रखता है।
कुल मिलाकर राज्यसभा चुनाव में मतदान की नौबत आना तय माना जा रहा है। इतना ही नहीं यह चुनाव समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती के लिए नाक का सवाल बन गया है।
समाजवादी पार्टी ने जहां जया बच्चन को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है, वहीं बसपा ने भीमराव अंबेडकर को मैदान में उतारा है। बसपा के प्रत्याशी की जीत कांग्रेस और सपा के विधायकों के दम पर ही सुनिश्ति हो सकेगी।
समाजवादी पार्टी के पास कुल 47, बसपा के पास 19 और कांग्रेस के पास सात विधायक हैं। इस तरह से सपा के पास एक सदस्य को राज्यसभा में भेजने के बाद प्रथम वरीयता के दस वोट बचेंगे। इस तरह से बसपा के प्रत्याशी के पास 19, 10, और 07 को मिलाकर 36 विधायकों का समर्थन गणित है। ऐसे में भाजपा और संयुक्त विपक्ष(सपा, बसपा और कांग्रेस) की निगाह निर्दल मतो पर टिकी है।
किसकी फंसेगी सीट
बसपा ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को फूलपुर और गोरखपुर में समर्थन दिया है।
बदले में समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और रालोद ने बसपा उम्मीदवार को राज्यसभा में भेजने का निर्णय लिया। बसपा, सपा, कांग्रेस, रालोद की यह स्थिति 2019 को ध्यान में रखकर बनने वाले राजनीतिक गठबंधन उ.प्र. विधानसभा की दलगत स्थिति संभावना पर टिकी है।
समझा जा रहा है कि इसके बाबत मायावती भी सहयोगियों पर दबाव बढ़ाएंगी। ऐसी दशा में जया बच्चन की सीट खतरे में पड़ने की संभावना पैदा हो सकती है। बहुत हद तक संभव है समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव कोई अप्रत्याशित निर्णय लेकर सबको चौंका दें।
राज्य विधानसभा की दलगत स्थिति
403 सदस्यीय राज्य विधानसभा में भाजपा के 311, अपना दल(एस) के 09, एसबीएसपी के 04 विधायक हैं। इस तरह से सत्तापक्ष के पास कुल 324 विधायकों हैं। वहीं विपक्ष के खेमे में समाजवादी पार्टी के 47, बसपा के 19, कांग्रेस के 07, राष्ट्रीय लोकदल का एक, निषाद पार्टी का एक और तीन निर्दल विधायक हैं। यही विधायक राज्यसभा की रिक्त हुई 10 सीटों के लिए नये सदस्यों का चुनाव करेंगे।