Rajya Sabha Election: चुनाव के बाद कैसा होगा राज्यसभा का गणित, किसकी सीटें बढ़ेंगी और संख्याबल में कौन होगा कम
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विस्तार
राज्यसभा की 56 सीटों के लिए चुनाव की प्रक्रिया जारी है। मंगलवार (20 फरवरी) को नाम वापसी का आखिरी दिन है। अगर किसी भी उम्मीदवार ने नाम वापस नहीं लिया तो तीन राज्यों में 27 तारीख को मतदान होगा। वहीं, 12 राज्यों से 41 उम्मीदवार निर्विरोध राज्यसभा पहुंच जाएंगे।जिन राज्यों में चुवान होने के आसार हैं उनमें उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में 10 सीटों के लिए 11 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसी तरह कर्नाटक की चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। हिमाचल प्रदेश की एक सीट के लिए दो उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं।
किस राज्य में राज्यसभा की कितनी सीटें खाली हो रही हैं? जहां मतदान की स्थिति आई वहां नतीजे कब तक आएंगे? जो सीटें खाली हो रही हैं उनमें अभी किस पार्टी के पास कितनी सीटें हैं? चुनाव में कहां किस पार्टी को कितनी सीटें मिल सकती हैं? चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्यसभा की स्थिति कैसी हो जाएगी? आइये समझते हैं…
15 राज्यों की 56 राज्यसभा सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। इनमें से 13 राज्यों की 50 सीटों पर मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 2 अप्रैल को खत्म हो रहा है। वहीं, दो राज्यों से जुड़े पांच सांसदों का कार्यकाल 3 अप्रैल का समाप्त हो रहा है। जबकि, राजस्थान से राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा का कार्यकाल भी 3 अप्रैल को समाप्त होना था, लेकिन मीणा पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। इन्हीं के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है। 15 फरवरी को नामांकन प्रक्रिया समाप्त हो गई। वहीं, 16 फरवरी को नामांकन पत्रों की जांच के बाद यह साफ हो गया कि किन राज्यों में मतदान होगा और कितने उम्मीदवार निर्विरोध राज्यसभा पहुंच सकते हैं।
सबसे ज्यादा 10 सीटें उत्तर प्रदेश में खाली हो रही हैं। इसके बाद छह-छह सीटें बिहार और महाराष्ट्र, पांच-पांच सीटें पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में खाली हो रही हैं। इसी तरह चार-चार सीटें गुजरात और कर्नाटक, तीन-तीन सीटें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और राजस्थान में खाली हो रही हैं। वहीं, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में एक-एक सीट खाली हो रही हैं।
56 सीटों के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव में 15 फरवरी को नामांकन की प्रक्रिया समाप्त हो गई। 16 फरवरी को नामांकन पत्रों की जांच हुई। 20 फरवरी तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। इसके बाद जहां आवश्यक होगा वहां मतदान कराया जाएगा। मतदान की तारीख 27 फरवरी है। 27 फरवरी को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक संबंधित राज्यों के विधायक राज्यसभा उम्मीदवारों के लिए मतदान करेंगे। शाम पांच बजे से वोटो की गिनती शुरू होगी। उम्मीद की जा सकती है कि 27 फरवरी देर रात तक सभी नतीजे आ जाएं।
अप्रैल में सेवानिवृत्त हो रहे 55 सांसदों में से सबसे ज्यादा 27 भारतीय जनता पार्टी से हैं। भाजपा के किरोड़ी लाल मीणा पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। उनका कार्यकाल भी 3 अप्रैल को समाप्त होना था। इस तरह कुल 28 सीटें भाजपा के पास थीं। सेवानिवृत्त हो रहे 10 सांसद कांग्रेस, चार टीएमसी, तीन बीआरएस, दो-दो राजद, जदयू, बीजद और एक-एक सपा, एनसीपी, शिवसेना, वाईएसआरसीपी और टीडीपी के हैं।
भाजपा के 21 उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो चुका है। उत्तर प्रदेश में पार्टी के सात उम्मीदवारों का जीतना तय है। ऐसे में पार्टी को 28 सीटें मिलनी तय हैं। इसके अलावा अगर पार्टी उत्तर प्रदेश में अपने आठवें उम्मीदवार को जिता लेती है और हिमाचल प्रदेश में पार्टी उम्मीदवार अगर जीत दर्ज करता है तो यह संख्या 30 पहुंच सकती है। ऐसे में पार्टी की मौजूदा ताकत में दो सीटों का इजाफा करने की गुंजाइश है।
वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस के छह उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है। कर्नाटक में पार्टी के दो उम्मीदवारों का जीतना तय है। ऐसे में पार्टी को आठ सीटें मिलनी तय हैं। कांग्रेस अगर कर्नाटक में अपने तीसरे उम्मीदवार और हिमाचल में अभिषेक मनु सिंघवी को जीत दिलाने में सफल रहती है तो यह संख्या 10 तक पहुंच सकती है। ऐसे में अगर कहीं भी गणित बिगड़ता है तो कांग्रेस की राज्यसभा में मौजूदा ताकत घट सकती है।
बीआरएस, जदयू की स्थिति होगी कमजोर, सपा-वाईएसआर की सदस्य संख्या बढ़ना तय: बीआरएस के तीन सदस्यों का कर्यकाल खत्म हो रहा है लेकिन, पार्टी के केवल एक सदस्य का राज्यसभा पहुंचा तय हो गया है। इसी तरह जदयू के दो सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है जबकि चुनाव में पार्टी के एक सदस्य का राज्यसभा पहुंचा तय हो गया है। वहीं, टीडीपी के एक सदस्य का कार्यकाल पूरा हो रहा है पार्टी का कोई सदस्य राज्यसभा नहीं जा रहा है।
वाईएसआर के एक सदस्य का कार्यकाल पूरा हो रहा है जबकि पार्टी के तीन सदस्यों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है। इसी तरह सपा के एक सदस्य का कार्यकाल पूरा हो रहा है। पार्टी के दो सदस्यों की जीत तय है, अगर पार्टी तीसरे उम्मीदवार को जीत दिला पाती है तो उसे दो सीटों का फायदा होगा। तीसरे उम्मीदवार के नहीं जीतने की स्थिति में भी पार्टी एक सीट के फायदे में रहेगी।
हरियाणा: भाजपा के लेफ्टिनेंट जनरल डीपी वत्स (रिटायर्ड) का कार्यकाल 2 अप्रैल को खत्म हो रहा है। यहां से भाजपा ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला को अपना उम्मीदवार बनाया है। बराला का निर्विरोध चुना जाना तय है।
छत्तीसगढ़: यहां भाजपा की सरोज पांडेय का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। पार्टी ने उन्हें फिर से मौका नहीं दिया है। उनकी जगह इस बार देवेंद्र प्रताप सिंह को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है। सिंह का निर्विरोध चुना जाना तय है।
उत्तराखंड: यहां भाजपा के अनिल बलूनी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। पार्टी ने उनकी जगह इस बार महेंद्र भट्ट को उम्मीदवार बनाया है। भट्ट का निर्विरोध चुना जाना तय है।
आंध्र प्रदेश: यहां टीडीपी सांसद के. रवींद्र कुमार, भाजपा सांसद सीएम रमेश और वाईएसआर कांग्रेस सांसद वी. प्रभाकर रेड्डी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इस चुनाव में तीनों सीटें वाईएसआर कांग्रेस के पास जाने की उम्मीद है। यहां सत्ताधारी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने वाईवी सुब्बारेड्डी, गोल्ला बाबू राव और एम. रघुनाथ रेड्डी को अपना उम्मीदावार बनाया है। नामांकन के आखिरी दिन निर्दलीय पी. प्रभाकर नायडू के नामांकन किया है। नायडू का नामांकन को खारिज हो गया। इसके साथ ही वाईएसआर कांग्रेस के तीनों उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया।
तेलंगाना: यहां रिटायर हो रहे तीनों सांसद बीआरएस के हैं। इस बार इनमें से दो सीटें कांग्रेस के खाते में जा रही हैं। जबकि एक सीट बीआरएस को जा रही है। कांग्रेस ने यहां से रेणुका चौधरी, अनिल यादव और बीआरएस की ओर से वद्दिराजू रविचंद्र ने नामांकन किया है। तीनों का निर्विरोध चुना जाना तय है।
ओडिशा: बीजद के दो और भाजपा के एक सांसद का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इनमें रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी शामिल हैं। इस बार भी वैष्णव को भाजपा ने यहां अपना उम्मीदवार बनाया है। बीजद ने सुभाशीष खुंतिया और देबाशीष सामंतरे को उम्मीदवार बनाया है। तीनों का निर्विरोध चुना जाना तय है।
राजस्थान: यहां एक सीट भाजपा के किरोड़ी लाल मीणा के इस्तीफे से खाली हुई है। मीणा का कार्यकाल 3 अप्रैल को खत्म होना था। इसके साथ ही भाजपा के भूपेंद्र यादव और कांग्रेस के मनमोहन सिंह का कार्यकाल भी 3 अप्रैल को खत्म हो रहा है। यहां से भाजपा ने मदन राठौड़ और चुन्नीलाल गरासिया को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं, कांग्रेस से सोनिया गांधी पार्टी उम्मीदवार हैं। तीनों का निर्विरोध चुना जाना तय है।
गुजरात: भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा इस बार गुजरात से राज्यसभा उम्मीदवार हैं। यहां के चार सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इनमें से दो भाजपा और दो कांग्रेस से हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया, पुरुषोत्तम रुपाला शामिल हैं। दोनों को भाजपा ने इस बार मैदान में नहीं उतारा है। कांग्रेस के नरनभाई रावत और अमीन याज्ञनिक का कार्यकाल भी पूरा हो रहा है। इस बार ये चार सीटें भाजपा को मिलनी तय हैं। भाजपा ने यहां से जेपी नड्डा के अलावा, हीरा कारोबारी गोविंद भाई ढोलकिया, जशवंतसिंह परमार और मयंक नायक को उम्मीदवार बनाया है। चारों का निर्विरोध चुना जाना तय है।
पश्चिम बंगाल: यहां पांच सीटें खाली हो रही हैं। इनमें से चार टीएमसी और एक कांग्रेस के पास है। कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी इस बार बंगाल की जगह हिमाचल प्रदेश के उम्मीदवार हैं। टीएमसी ने पत्रकार सागरिका घोष, सुष्मिता देव, मोहम्मद नदीमुल हक और ममता ठाकुर को उतारा है। वहीं, भाजपा से समिक भट्टाचार्य उम्मीदवार हैं। पांचों का निर्विरोध चुना जाना तय है। टीएमसी ने नदीमुल हक अकेले मौजूदा सांसद हैं जिन्हें दोबार टिकट दिया गया है।
मध्य प्रदेश: राज्य की पांच सीटें खाली हो रही हैं। इस वक्त इनमें से चार भाजपा और एक कांग्रेस के पास है। चुनाव के बाद भी यही स्थिति रहने वाली है। इस चुनाव में भाजपा ने चार और कांग्रेस को उम्मीदवार उतारा है। सभी का निर्विरोध निर्वाचन तय है। भाजपा के एल. मुरुगन, कविता पाटीदार, अजय प्रताप सिंह और कैलाश सोनी का कार्यकाल पूरा हो रहा है। वहीं, कांग्रेस के राजमणि पटेल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इस बार भाजपा से डॉ. एल. मुरुगन, उमेशनाथ महाराज, बंसीलाल गुर्जर, माया नारोलिया और कांग्रेस से अशोक सिंह निर्विरोध राज्यसभा जा सकते हैं। भाजपा ने सिर्फ मुरुगन को दोबारा टिकट दिया है।
बिहार: राज्यसभा की छह सीटों के लिए बिहार में नामांकन करने वाले सभी प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित होंगे। यहां भाजपा से भीम सिंह और धर्मशीला गुप्ता, राजद से मनोज झा और संजय यादव, कांग्रेस से डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह और जदयू से संजय झा ने नामांकन किया है। जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है उनमें राजद के मनोज झा और अहमद अशफाक करीम, भाजपा के सुशील कुमार मोदी, जदयू के वशिष्ठ नारायण सिंह और अनिल हेगड़े, कांग्रेस के डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह शामिल हैं।
महाराष्ट्र: यहां भी राज्यसभा की छह सीटें खाली हो रही हैं। इस वक्त इनमें से तीन सीटें भाजपा और एक-एक सीट एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस के पास है। इस चुनाव में भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, पूर्व विधायक मेधा कुलकर्णी और आरएसएस नेता डॉ. अजीत गोपछड़े को टिकट दिया है। वहीं, कांग्रेस ने चंद्रकांत डी. हंडोरे को उतारा है। वहीं, एकनाथ शिंदे की शिवसेना की ओर से मिलिंद देवड़ा और एनसीपी अजित पवार गुट की तरफ से प्रफुल्ल पटेल चुनाव मैदान में हैं।
यहां विश्वास जगताप ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल किया था। जगताप का नामांकन खारिज हो गया। ऐसे में सभी छह उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय है। महाराष्ट्र में जिन सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है उनमें भाजपा के प्रकाश जावड़ेकर, वी. मुरलीधरन और नारायण राणे, एनसीपी की वंदना चव्हाण, शिवसेना के अनिल देसाई और कांग्रेस के कुमार केतकर शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश: मौजूदा चुनाव में सबसे ज्यादा 10 सीटें उत्तर प्रदेश में खाली हो रही हैं। इन 10 सीटों के लिए 11 उम्मीदवार मैदान में हैं। अगर कोई उम्मीदवार नाम वापस नहीं लेता है तो यहां भी 27 फरवरी को मतदान होगा।
जिन सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें नौ भाजपा के हैं। इनके अलावा सपा की जया बच्चन का कार्यकाल भी पूरा हो रहा है। जया को सपा ने फिर से टिकट दिया है। जया के अलावा सपा ने रामजीलाल सुमन और आलोक रंजन को भी उम्मीदवार बनाया है। वहीं, भाजपा की ओर से आरपीएन सिंह, चौधरी तेजवीर सिंह, अमरपाल मौर्य, संगीता बलवंत, सुधांशु त्रिवेदी, साधना सिंह, नवीन जैन और संजय सेठ मैदान में हैं। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 37 प्राथमिक वोटों की जरूरत होगी। सपा के पास 108 विधायक हैं। पार्टी दो उम्मीदवारों को जितने की स्थिति में है। जबकि तीसरे उम्मीदार को जीतने के लिए तीन प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत है। पल्लवी पटेल जैसे विधायकों की बगावत का सामना कर रही पार्टी के लिए यह संख्या बढ़ भी सकती है।
वहीं, भाजपा और उसके सहयोगियों के पास सात सदस्यों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्याबल है। आठवें उम्मीदवार के लिए पार्टी के पास प्रथम वरीयता के 29 वोट ही हैं। ऐसे में आठवें उम्मीदवार को जिताने के लिए प्रथम वरीयता के आठ वोट कम हैं। अगर सपा विधायकों के पाला बदलने की स्थिति में यह अंतर कम हो सकता है। कांग्रेस के दो और बसपा के एक सदस्य किसे वोट करते हैं यह भी गणित को बना बिगाड़ सकता है।
हिमाचल प्रदेश: भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। नड्डा इस बार गुजरात से पार्टी के उम्मीदवार हैं। यहां इस वक्त कांग्रेस सत्ता में है। कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी को अपना उम्मीदवार बनाया है। सिंघवी के सामने भाजपा ने हर्ष महाजन को उतारा है। हर्ष कांग्रेस से ही भाजपा में आए हैं। जीत के 35 प्रथम वरीयता के वोट की जरूरत होगी। कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं। सरकार को तीन निर्दलियों का भी समर्थन है। ऐसे में संख्याबल में कांग्रेस का पलड़ा भारी है।
कर्नाटक: कांग्रेस के तीन और भाजपा के एक सदस्य का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इनमें कांग्रेस के डॉ. एल. हनुमंथैया, सैयद नासिर हुसैन और जीसी चंद्रशेखर और भाजपा के राजीव चंद्रशेखर शामिल हैं। इस बार यहां कांग्रेस ने अजय माकन, सैयद नासिर हुसैन और जीसी चंद्रशेखर को टिकट दिया है। वहीं, भजपा और जेडीएस गठबंधन ने नारायणा कृष्णासा भांडगे और कुपेंद्र रेड्डी को टिकट दिया है। चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में होने से यहां चुनाव होने के आसार हैं। अगर किसी प्रत्याशी ने नाम वापस नहीं लिया तो 27 फरवरी को मतदान होगा।
224 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 135 विधायक हैं। भाजपा के 66 और जेडीएस के 19 विधायक हैं। अन्य विधायकों की संख्या चार है। चार सीटों के लिए हो रहे चुनाव के लिए एक सदस्य को जीतने के लिए 45 प्राथमिक वोट की जरूरत होगी। ऐसे में कांग्रेस अपने तीनों उम्मीदवारों को जिता सकती है। वहीं, भाजपा-जेडीएस गठबंधन को अपने दोनों उम्मीदवारों को जिताने के लिए पांच अतरिक्त वोट की जरूरत है। चार अन्य विधायक अगर भाजपा जेडीएस गठबंधन के उम्मीदवारों को वोट करते हैं तो केवल एक वोट के इधर से उधर होने पर मामला पलट सकता है।
चुनाव के बाद क्या स्थिति होगी?
|
राज्य |
खाली हो रही सीटें |
अभी किसके पास कितनी सीटें |
चुनाव बाद क्या स्थिति होगी |
|
उत्तर प्रदेश |
10 |
भाजपा: 9, सपा:1 |
भाजपा: 7-8, सपा: 2-3 |
|
बिहार |
6 |
राजद:2, जदयू: 2, भाजपा: 1, कांग्रेस: 1 |
राजद: 2, जदयू: 1, भाजपा:2, कांग्रेस: 1 |
|
महाराष्ट्र |
6 |
भाजपा: 3, शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस 1-1 |
भाजपा: 3, शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस 1-1 |
|
पश्चिम बंगाल |
5-5 |
टीएमसी: 4, कांग्रेस: 1 |
टीएमसी: 4, भाजपा: 1 |
|
मध्य प्रदेश |
भाजपा: 4, कांग्रेस: 1 |
भाजपा: 4, कांग्रेस: 1 |
|
|
गुजरात |
4 |
भाजपा: 2, कांग्रेस: 2 |
भाजपा: 4 |
|
कर्नाटक |
4 |
भाजपा: 1 कांग्रेस: 3 |
भाजपा: 1, कांग्रेस: 2-3, जेडीएस: 0-1 |
|
आंध्र प्रदेश |
3 |
टीडीपी, भाजपा, वाईएसआर |
वाईएसआर: 3 |
|
तेलंगाना |
3 |
बीआरएस: 3 |
कांग्रेस: 2, बीआरएस:1 |
|
ओडिशा |
3 |
बीजद: 2 भाजपा: 1 |
बीजद: 2 भाजपा: 1 |
|
राजस्थान |
3 |
भाजपा: 2 कांग्रेस: 1 |
भाजपा: 2 कांग्रेस: 1 |
|
छत्तीसगढ़, हरियाणा, उत्तराखंड |
1-1 |
भाजपा, भाजपा, भाजपा, |
भाजपा, भाजपा, भाजपा |
|
हिमाचल प्रदेश |
1 |
भाजपा |
कांग्रेस या भाजपा |