अनुच्छेद 370 की तरह अब राज्यसभा में बिना नोटिस नहीं लाया जाएगा कोई बिल
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संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए राज्यसभा में अचानक लाए विधेयक के झटके से विपक्षी सांसद अभी भी उबर नहीं पाए हैं। गुरुवार को उन्होंने मांग की कि सरकार अब और कोई विधेयक अचानक लाकर उन्हें न चौंकाए। दरअसल विपक्ष को आशंका है कि सरकार किसी भी दिन नागरिकता संशोधन विधेयक इसी तरह लाकर उन्हें चौंका सकती है।
राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में यह मांग तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू की उपस्थिति में सरकार से की। नायडू ने संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी को निर्देशित किया कि आगे से राज्यसभा में पेश किए जाने वाले हर बिल की कॉपी सभी सांसदों में कम से कम 48 घंटे पहले बांटी जानी चाहिए।
मौका देने को तैयार नहीं विपक्ष
सरकार के आश्वासन के बावजूद विपक्षी दल उसे किसी तरह का मौका देने को तैयार नहीं है। इसीलिए उन्होंने अभी से ही तय कर लिया है कि राज्यसभा और लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पर उनके कौन-कौन से वक्ता होंगे और वे किन मुद्दों को उठाएंगे।
नागरिकता संशोधन विधेयक के जरिए केंद्र सरकार गैर मुसलमान उन सभी भारतीय मूल के लोगों को भारत की नागरिकता देने जा रही है जो बांग्लादेश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, म्यानमार जैसे पड़ोसी देशों में बतौर अल्पसंख्यक रह रहे हैं और प्रताड़ित किए जा रहे हैं। इसके जरिए उन लोगों को भी भारत की नागरिकता मिल जाएगी जो असम के राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर में नहीं आ पाए हैं।
तृणमूल कांग्रेस का मानना है कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की खिलाफत उसे राजनीतिक रूप से फायदा पहुंचा रही है। यही वजह है कि वे पश्चिम बंगाल की तीन के तीनों विधानसभा उपचुनाव जीत गए। इनमें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष द्वारा खाली की गई खड़कपुर सीट है और कलियागंज सीट भी जिस पर पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को 65,000 वोटों की बढ़त मिली थी।