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Rajnath Singh: 'अब युद्ध का चेहरा बदल चुका'; वायुसेना के नए योद्धाओं को रक्षा मंत्री ने दिया AAA का मंत्र
Sat, 13 Jun 2026 10:49 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हेदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हेदराबाद
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sat, 13 Jun 2026 10:49 AM IST
सार
हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी में आयोजित संयुक्त स्नातक परेड में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नए वायुसेना अधिकारियों को एडाप्ट, अडॉप्ट और अमेंड का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और ड्रोन, सैटेलाइट, सेंसर व साइबर तकनीकें नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं। उन्होंने कैडेट्स से भविष्य की युद्ध रणनीतियों को समझकर राष्ट्र सुरक्षा में योगदान देने का आह्वान किया।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
- फोटो : Ani Photos
विस्तार
आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप और नई तकनीकों से पैदा हो रही चुनौतियों के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय वायुसेना के नए अधिकारियों को भविष्य के युद्ध के लिए तैयार रहने का संदेश दिया है। तेलंगाना के हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी में 217वें कोर्स की संयुक्त स्नातक परेड (सीजीपी) को संबोधित करते हुए उन्होंने कैडेट्स को "एडाप्ट, अडॉप्ट और अमेंड" का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि आज की लड़ाइयां केवल सैनिकों और हथियारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ड्रोन, सैटेलाइट, सेंसर, रोबोटिक्स और साइबर तकनीकें युद्ध का स्वरूप बदल रही हैं।
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क्या कहा राजनाथ सिंह ने नए कैडेट्स से?
रक्षा मंत्री ने प्रशिक्षण पूरा करने वाले कैडेट्स को बधाई देते हुए कहा कि उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण समाप्त हुआ है, लेकिन असली जिम्मेदारी अब शुरू होने जा रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना हमेशा देश की सुरक्षा की ढाल और तलवार दोनों रही है। उन्होंने कैडेट्स से कहा कि बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालें, नई तकनीकों को अपनाएं और जरूरत पड़ने पर अपनी रणनीतियों में बदलाव भी करें। उन्होंने यह भी कहा कि केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि स्मार्ट वर्क और नवाचार भी भविष्य की सफलता की कुंजी होंगे।
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भारतीय वायुसेना के इतिहास का क्यों किया उल्लेख?
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में भारतीय वायुसेना की ऐतिहासिक भूमिका को भी याद किया। उन्होंने कहा कि 1947-48 के कश्मीर युद्ध के दौरान श्रीनगर एयरलिफ्ट ने युद्ध की दिशा बदल दी थी। वहीं 1971 के युद्ध में ढाका पर निर्णायक हवाई हमलों ने इतिहास रच दिया था। उन्होंने कहा कि आज के कैडेट्स उसी गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने जा रहे हैं। यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का एक बड़ा दायित्व है, जिसे वायुसेना ने हर चुनौती के समय निभाया है।
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