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Defence: रक्षा मंत्री बोले- नई तकनीकों की दिशा में आगे बढ़े निजी क्षेत्र, नवाचार की संस्कृति को मिले बढ़ावा
Mon, 07 Oct 2024 10:21 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 07 Oct 2024 10:21 PM IST
सार
Defence: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा में निजी क्षेत्र की भूमिका को बढ़ाया जाएगा। आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार 2014 में सत्ता में आई, तो उसने रक्षा में निजी क्षेत्र की भागीदारी की कमी को आत्मनिर्भरता हासिल करने में एक बड़ी बाधा माना और इस दिशा में प्रयास शुरू किए।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को निजी क्षेत्र से आग्रह किया कि वह अपने मौजूदा प्रयासों को नई तकनीकों की दिशा में बढ़ाएं, ताकि भारतीय सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि युद्धों में नई तकनीकों का लगातार समावेश हो रहा है। केवल पारंपरिक हथियारों और गोला-बारूद का इस्तेमाल नहीं हो रहा है, बल्कि कई प्रकार की तकनीकी को भी हथियारों के रूप में शामिल किया जा रहा है। सिंह ने यह बातें दिल्ली के मानेकशॉ केंद्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहीं।
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उन्होंने कहा कि युद्धों और संघर्षों में नई तकनीकों का उपयोग हो रहा है। पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ कई तकनीकें इस्तेमाल की जा रही हैं, जो आमतौर पर लोगों के नागरिकों के उपयोग के लिए नहीं होती हैं। उन्होंने नव प्रवर्तकों से अनुरोध किया कि वे इन तकनीकों का गहन अध्ययन करें और उन्हें देश की रक्षा के लिए इस्तेमाल करें।
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उन्होंने देश में नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहे 'डिफेंस कनेक्ट' के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह मंच रक्षा औद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में नई उर्जा ला रहा है और देश की प्रतिभाओं को सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में साझेदार बना रहा है। उन्होंने आगे बताया कि आईडेक्स के तहत 26 उत्पाद विकसित किए गए हैं, जिनके लिए एक हजार करोड़ रुपये से अधिक के खरीद ऑर्डर दिए गए हैं। इसके अलावा, 37 उत्पादों के लिए 2,380 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर जारी किए गए हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा में निजी क्षेत्र की भूमिका को बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी जरूरी है। सिंह ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार 2014 में सत्ता में आई, तो उसने रक्षा में निजी क्षेत्र की भागीदारी की कमी को आत्मनिर्भरता हासिल करने में एक बड़ी बाधा माना और इस दिशा में प्रयास शुरू किए।
उन्होंने आगे कहा, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के दो प्रमुख आयाम थे। पहला, हथियारों और उपकरणों का निर्माण, जिसके लिए प्रौद्योगिकी उपलब्ध थी, लेकिन उत्पादन क्षमता की कमी थी। दूसरा, युद्ध की बदलती प्रकृति के मद्देनजर उच्च-तकनीकी अनुप्रयोगों की जरूरतों को पूरा करना था। पहले, केवल घरेलू रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) जैसी संस्थाएं ऐसी तकनीकी विकसित करने में जुटी हुईं थीं। लेकिन अब हम निजी क्षेत्र की भी महत्वपूर्ण भूमिका देख रहे हैं।