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Gujarat: गेमिंग जोन को विनियमित करने के लिए बनाए ‘आदर्श नियम’, गुजरात सरकार ने हाईकोर्ट को बताया
Fri, 02 Aug 2024 10:58 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 02 Aug 2024 10:58 PM IST
सार
Gujarat: गुजरात सरकार ने उच्च न्यायालय को बताया कि ‘गेमिंग जोन’ के मालिकों को अब पुलिस और निगम प्राधिकारों से नियमित लाइसेंस और अग्नि अनापत्ति प्रमाण पत्र और भवन उपयोग अनुमति प्राप्त करने के अलावा ‘राइड सेफ्टी’ और निरीक्षण समितियों से मंजूरी लेनी होगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एएनआई
विस्तार
गुजरात सरकार ने शुक्रवार को उच्च न्यायालय को सूचित किया कि उसने राजकोट में 25 मई को हुई आग लगने की घटना जैसी त्रासदियों को रोकने के लिए ‘गेमिंग जोन’ और इस तरह की मनोरंजन-खेल गतिविधियों को विनियमित करने के लिए ‘‘आदर्श नियम’’ तैयार किए हैं।
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पुलिस और निगम प्राधिकारों से नियमित लाइसेंस और अग्नि अनापत्ति प्रमाण पत्र और भवन उपयोग अनुमति प्राप्त करने के अलावा, ‘गेमिंग जोन’ के मालिकों को ‘राइड सेफ्टी’ और निरीक्षण समितियों से मंजूरी लेनी होगी।
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महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने अदालत को बताया कि शहरों के लिए पुलिस आयुक्त ऐसी समिति गठित करेंगे, जबकि जिला स्तर पर जिलाधिकारी ऐसी समिति गठित करेंगे। मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति प्रणव त्रिवेदी की पीठ ने राज्य सरकार के हलफनामे पर विचार करते हुए मामले की सुनवाई 23 अगस्त के लिए तय की है।
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पीठ ने 25 मई को राजकोट के नाना-मावा इलाके में ‘गेमिंग जोन’ में लगी भीषण आग में चार बच्चों सहित 27 लोगों की मौत के बाद स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका शुरू की थी। जून में सुनवाई के दौरान, पीठ ने राज्य सरकार से इस पर जवाब मांगा कि क्या गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 33 के तहत नियम बनाए गए थे, जो लाइसेंसिंग प्राधिकरण की शक्तियों और कर्तव्यों का प्रावधान करता है।
त्रिवेदी ने पीठ को बताया कि राज्य के गृह विभाग ने लोगों द्वारा दिए गए सुझावों को शामिल करने के बाद ‘गुजरात एम्युजमेंट राइड’ और ‘गेमिंग जोन’ गतिविधियां सुरक्षा नियम, 2024 नामक ‘‘आदर्श नियम’’ तैयार किए हैं।