फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Rajiv Gandhi and Venkataraman advised TN Seshan Accept CEC post only if there is no option

TN Seshan: टीएन शेषन की किताब में चौंकाने वाला खुलासा, CEC के पद को लेकर राजीव गांधी-वेंकटरमन ने दी थी ये सलाह

Sun, 11 Jun 2023 08:53 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 11 Jun 2023 08:53 PM IST
सार

राजीव गांधी ने शेषन से कहा- क्या? क्या वह आपको सीईसी का पद देने जा रहे हैं? वह बाद में पछताएंगे। यह नौकरी न तो आपके लिए अच्छी है और न ही आपको सीईसी के रूप में नियुक्त करना चंद्रशेखर के लिए अच्छा होगा। 

विज्ञापन
Rajiv Gandhi and Venkataraman advised TN Seshan Accept CEC post only if there is no option
टीएन शेषन - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) टीएन शेषन ने अपनी आत्मकथा 'थ्रू द ब्रोकन ग्लास' में चौंकाने वाला खुलासा किया है। इसमें उन्होंने बताया है कि वह सीईसी बनने को लेकर किस तरह दुविधा में थे। इस पद के लिए जब उनके नाम का प्रस्ताव रखा गया तो वह संकट में आ गए। उन्होंने प्रधानमंत्री राजीव गांधी और तत्कालीन राष्ट्रपति वेंकटरमन से संपर्क किया। दोनों ने उन्होंने सलाह दी कि अगर उनके पास कोई अन्य पद नहीं है तो इसे स्वीकार कर लें। 

विज्ञापन

रूपा प्रकाशन द्वारा मरणोपरांत प्रकाशित इस पुस्तक में बताया गया है कि इसके बाद भी वह उलझन में थे। फिर उन्होने कांची के शंकराचार्य से मशविरा लेने का फैसला किया। शंकराचार्य के पास पहुंचे तो उन्होंने कहा कि वह इसे स्वीकार कर लें और यह एक सम्मानजनक काम है। इसके बाद शेषन ने कानून मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी को फोन किया और कहा कि वह कार्यभार संभालने के लिए तैयार हैं। 
 

विज्ञापन
विज्ञापन

किताब में कहा गया है,"... तत्कालीन सीईसी (पेरी शास्त्री) का खराब स्वास्थ्य के कारण निधन हो गया। सरकार ने कुछ ऐसा किया जो बहुत ही नासमझी भरा था। यह रमा देवी (सचिव, कानून) को कार्यवाहक सीईसी के रूप में नियुक्ति की प्रक्रिया के लिए आगे बढ़ी। देवी के पदभार संभालने के चौथे दिन मुझे कैबिनेट सचिव विनोद पांडे का फोन आया।"
 

विज्ञापन

पांडे ने कहा कि सरकार योजना आयोग के तत्कालीन सदस्य शेषन को सीईसी नियुक्त करने की योजना बना रही है। किताब में कहा गया है, "यह जानकर मुझे हैरानी हुई कि कोई मुझे सीईसी बनाने के बारे में सोचेगा। इसलिए, मेरी तत्काल प्रतिक्रिया 'नहीं' कहने की थी क्योंकि मेरा कभी चुनावों से कोई लेना-देना नहीं रहा था।" कानून मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी ने उनसे कहा, "मुझे आपसे जवाब चाहिए, ताकि मैं आपको सीईसी बनाने के लिए कागजात संबंधी प्रक्रिया कर सकूं।"
 

शेषन ने कुछ समय के लिए फैसले पर विचार किया। वह यह सोचने की कोशिश कर रहे थे कि वह किसकी सलाह ले सकते हैं। रात के दो बज रहे थे। उन्हें राजीव गांधी का नंबर पता था और उन्होंने उन्हें फोन किया। जब गांधी प्रधानमंत्री थे तब शेषन कैबिनेट सचिव थे। गांधी ने उन्हें अपने आवास पर आने के लिए कहा और शेषन रात करीब ढाई बजे वहां पहुंचे। 
 

पुस्तक के अनुसार, गांधी ने शेषन से कहा- "क्या? क्या वह आपको सीईसी का पद देने जा रहे हैं? वह बाद में पछताएंगे। यह नौकरी न तो आपके लिए अच्छी है और न ही आपको सीईसी के रूप में नियुक्त करना चंद्रशेखर के लिए अच्छा होगा। इस पद को तभी लें जब कोई अन्य पद उपलब्ध न हो।" बाद में, शेषन ने राष्ट्रपति आर वेंकटरमन से मिलने का समय मांगा और राष्ट्रपति भवन जाकर उन्हें खबर दी। वेंकटरमन की सलाह थी- "सीईसी का पद आपके लिए ठीक नहीं होगा। आपको कोई दूसरी नौकरी नहीं मिल सकती। अगर कोई विकल्प नहीं है, तो यह पद ले लीजिए।" 
 

उन्होंने फिर अपने भाई और अपने ससुर से बात की लेकिन उनकी सलाह ने उन्हें और भी भ्रमित कर दिया। अंत में, शेषन ने कांची के शंकराचार्य से संपर्क करने का फैसला किया और इसलिए उन्होंने कांची मठ को फोन किया तथा वहां अपने एक मित्र के जरिए सवाल आगे तक पहुंचाया। शेषन ने लिखा- वह (मित्र) शंकराचार्य से पूछने के लिए तैयार हो गया। उसने 20 मिनट बाद फोन किया... बड़ा आश्चर्य हुआ। इससे पहले कि मैं शंकराचार्य से पूछ पाता, उन्होंने खुद कहा- यह एक सम्मानजनक काम है, इसे स्वीकार करने के लिए कहो और उन्होंने स्वीकृति दे दी।"
 

इसके बाद उन्होंने तुरंत स्वामी को फोन किया और कहा कि वह सीईसी बनने के लिए तैयार हैं। शेषन ने 12 दिसंबर, 1990 को भारत के नौवें सीईसी के रूप में कार्यभार संभाला और 11 दिसंबर, 1996 तक इस पद पर बने रहे। पुस्तक में उन्होंने भारतीय चुनाव प्रणाली में एक व्यापक परिवर्तन लाने के लिए अपने अकेले संघर्ष का विस्तार से वर्णन किया है और उन घटनाओं को भी साझा किया है जो उनके उस रवैये को दर्शाती हैं जिसने केंद्र सरकारों को भी आश्चर्यचकित कर दिया। उनके अनुसार, सीईसी का काम उनके द्वारा धारण किए गए अधिक संतोषजनक पदों में से एक था।
 

उन्होंने लिखा, मेरे कार्यकाल के दौरान लोग चुनाव के महत्व के बारे में अधिक जागरूक हो गए। मतदान करने वाली आबादी का प्रतिशत काफी बढ़ गया, चाहे वह गांवों, कस्बों या शहरों में हो, और चुनाव अब पहले की तुलना में अलग तरह से देखे जाते हैं।"  शेषन का 2019 में निधन हो गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed