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सिनेमा का टिकट ब्लैक करने वाला राजेंद्र बन गया कुख्यात डॉन छोटा राजन

Tue, 20 Aug 2019 10:36 PM IST
आसिम खान डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: आसिम खान Updated Tue, 20 Aug 2019 10:36 PM IST
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Rajendra Sadashiv Nikalje who blacked out tickets outside Sahakar cinema had become Chhota Rajan
छोटा राजन (फाइल फोटो)
उम्र 59 साल, नाम राजेंद्र सदाशिव निखलजे उर्फ छोटा राजन। मुंबई की जेल में सलाखों के पीछे पत्रकार ज्योर्तिमय डे (जेडे) की हत्या के दोषी के तौर पर आजीवन कैद की सजा काट रहा है। एक दो नहीं कोई 70 हत्या, हत्या के प्रयास, लोगों को धमकाने के मामलों का आरोपी रहे राजन के नाम का अब भी खौफ है। मंगलवार 20 अगस्त को अदालत ने राजन को होटल व्यवसायी बीआर शेट्टी की हत्या के प्रयास का दोषी माना है। लेकिन कम लोगों को पता होगा कि कभी राजेंद्र सदाशिव निखलजे सहकार सिनेमा, अशोक थियेटर के बाहर टाकीज के टिकट ब्लैक करके परिवार का गुजारा करता था। अब अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन है।
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छोटा राजन बनने की कहानी

तिलकनगर, चेंबूर मुंबई के निम्न मध्यमवर्गीय परिवार का राजेंद्र सदाशिव निखलजे 1982 तक सिनेमा के टिकट ही ब्लैक करता था। मुंबई पुलिस में सेवारत पुलिस के अधिकारी राजन की कहानी को कुछ अलग तरीके से देखते हैं। बताते हैं कि 80 के दशक में राजन ने पुलिस के एक कांस्टेबल पर हमला बोल दिया था। इसमें वह जेल भी गया और छूट कर आया तो जुर्म की दुनिया में चला गया। छोटा राजन को पहला गुरु राजन नायर मिला। राजन नायर बड़ा राजन के नाम से मशहूर था और बड़ा राजन की हत्या हो जाने के बाद उसके दाहिने हाथ राजेंद्र सदाशिव निखलजे छोटा राजन के नाम से मशहूर हो गया।
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गवली, दाऊद, राजन

मुंबई की दगड़ी की चाल से अरुण गवली का सिक्का चलता था। थोड़े समय के लिए अरुण गवली, अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन साथ आ गए। लेकिन यह तिकड़ी ज्यादा देर तक नहीं चल पाई। दाऊद और गवली में गैंगवार शुरू हो गई। गवली का भाई पपा गवली इसका शिकार बना। इस गैंगवार में छोटा राजन ने दाऊद का साथ दिया और जल्द ही दाऊद का दाहिना हाथ बन गया। 
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इसी दौरान छोटा राजन 1989 में दुबई भाग गया और उसने दाऊद इब्राहिम के इशारे पर कई लोगों की हत्या की। राजन और और दाऊद की यह जोड़ी लूट, हत्या, तस्करी, फिरौती पर राज करने लगी। लेकिन यह साथ भी अधिक दिनों तक नहीं चल पाया। 1993 में मुंबई बम धमाके के बाद छोटा राजन ने दाऊद से पंगा मोल ले लिया और खुद की गैंग चलाने लगा। यहीं से छोटा राजन और दाऊद दोनों एक दूसरे के लिए खून के प्यासे बन गए।

खूब चला चूहे बिल्ली का खेल

मुंबई बम धमाके में दाऊद का भी हाथ था। दाऊद के गैंग, देश में उसके वित्तीय ठिकाने, फाइनेंस मैनेजर और निवेश समेत हर खेल के बारे में छोटा राजन के पास जानकारी थी। छोटा राजन ने इस राज का बखूबी इस्तेमाल किया। भारतीय खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के लिए राजन एक हॉट केक की तरह था। राजन ने भी इसका खूब फायदा उठाया। दूसरी तरफ दाऊद इब्राहिम ने भी राजन को मारने के लिए सारे घोड़े खोल दिए।
 
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पिज्जा डिलिवरी ब्वॉय का चूक गया निशाना

छोटा राजन ने भी दाऊद को समेटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। राजन गैंग ने पिल्लू खान, बख्तियार अहमद खान और मांग्या को बैंकाक के होटल में मार दिया। इससे दाऊद गैंग ने राजन को जल्द निबटाने की योजना बनाई। दाऊद ने इसकी जिम्मेदारी छोटा शकील को दी और शकील ने सितंबर 2000 में बैंकाक के होटल में गुर्गों के साथ पिज्जा डिलिवरी ब्वॉय के रूप में एंट्री की। उसी होटल में दाऊद अपने शूटर रोहित वर्मा के साथ ठहरा था। 

छोटा राजन के बैंकाक में होने की सूचना मुंबई से लेकर दुबई तक फैले दाऊद के जासूस विनोद, ए मिश्रा और शरद दे रहे थे। शरद दाऊद के फाइनेंस आदि का काम संभालता था। पिज्जा ब्वॉय ने होटल का दरवाजा नॉक किया और रोहित वर्मा और उसकी पत्नी पर फायर झोंक दिया। लेकिन राजन पर यह निशाना चूक गया और छोटा राजन ने बैंकाक के होटल की पहली मंजिल से कूदकर जान बचाई। जवाब में राजन गैंग ने पहले विनोद को और फिर 2003 को शरद को निबटा दिया।

राजन आया मुंबई

25 अक्टूबर 2015 को मोहन कुमार के नाम से इंडोनेशिया के बाली में घूम रहा छोटा राजन हवाई अड्डे पर पकड़ लिया गया। बताते हैं उसके मुंह से अपना असली नाम निकल गया। थोड़ी देर में ही अधिकारियों मे राजन की असलियत का पता लगा लिया और इसके बाद भारतीय सुरक्षा और खुफिया ऐजेंसियों ने राजन के प्रत्यर्पण की कार्रवाई शुरू कर दी। सात नवंबर को छोटा राजन का प्रत्यर्पण कराकर भारत लाया गया। तब से वह जेल में है।

बेटा राजनीति में, बेटी एमबीए, इंजीनियर

छोटा राजन की तीन बेटियां हैं। अंकिता, निकिता और खुशी। इनमें से एक बेटी के ब्रिटेन से एमबीए करने की सूचना थी। दूसरी बेटी इंजीनियर है। राजन की पत्नी उसके जन्म स्थान तिलकनगर (चेंबुर), मुंबई में रहती है। राजन का बेटा रामदास अठावले की पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) में स्थानीय स्तर पर राजनीति करता है। एक पक्ष यह भी है कि छोटा राजन पिछले काफी समय से गणपति महोत्सव में रुचि लेता है। डॉनगिरी करने के दौरान वह बाकायदा सहयाद्रि क्रीड़ा मंडल, तिलकनगर को वित्तीय मदद भी देता था।
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