Rajasthan: क्यों बार-बार ऐसे बयान दे रहे गहलोत, हाईकमान के साथ पायलट को संदेश, वसुंधरा को भी डाला संकट में
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विस्तार
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कई बार यह बयान दे चुके हैं कि राजनीति में जो कुछ दिखता है वह होता नहीं। जो होता है वह कभी दिखता नहीं। ऐसा ही कुछ नजारा गुरुवार को दिल्ली के कांग्रेस दफ्तर में हुई उनकी प्रेस कांफ्रेंस में नजर आया। वैसे सीएम गहलोत ने प्रेस वार्ता जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के लिए बुलाई थी। लेकिन उन्होंने इस दौरान एक तीर से कई निशाने साधे। गहलोत ने हाईकमान के साथ-साथ पायलट को भी संदेश दिया। दूसरी तरफ पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को भी संकट में डाल दिया।
गहलोत की यह प्रेस वार्ता तब हुई जब राजस्थान कांग्रेस के उम्मीदवारों की पहली लिस्ट आने वाली है। बुधवार को पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई और फिर खबर आई कि कुछ नामों पर मतभेद हैं। ऐसी चर्चा है कि सीएम गहलोत जिन लोगों को टिकट दिलाना चाह रहे थे, इनमें से कुछ नामों पर हाईकमान को आपत्ति है। इन नामों में मंत्री शांतिलाल धारीवाल जैसे नेताओं के नाम शामिल हैं। जो सरकार पर आए संकट के समय गहलोत के समर्थन में खुलकर सामने आए थे। ये विधायक तब कांग्रेस हाईकमान को नीचा दिखाने में भी लगे थे।
सीईसी की बैठक को लेकर सूत्रों के हवाले से खबर आई कि पहली सूची में देरी मंत्रियों और विधायकों के नामों पर आपत्ति के कारण हुई है। गहलोत फिर से अपने सभी मंत्रियों को टिकट दिलाने के इच्छुक हैं। वह यह भी चाहते हैं कि पार्टी 2019 में कांग्रेस में शामिल हुए सभी छह पूर्व बसपा विधायकों के साथ-साथ निर्दलीय विधायकों को भी मैदान में उतारे। लेकिन कांग्रेस नेतृत्व उन लोगों को टिकट देने से इंकार कर रहा है। गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में गहलोत से जब पूछा गया कि टिकट में देरी की वजह क्या है तो उन्होंने इन खबरों का खंडन किया।
एक सवाल के जवाब में सीएम ने कहा कि चयन प्रक्रिया को लेकर विपक्ष का दर्द यह है कि कांग्रेस पार्टी में मतभेद क्यों नहीं हैं। मुझे यकीन है कि आप सचिन पायलट के बारे में बात कर रहे हैं। सभी फैसले सबकी राय से हो रहे हैं। मैं सचिन के फैसलों में हिस्सा ले रहा हूं। पायलट के साथ चल रहे सत्ता संघर्ष के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'हम सभी एकजुट हैं। मैंने किसी भी एक उम्मीदवार का विरोध नहीं किया है।'
टिकट वितरण के समय गहलोत का बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि राजस्थान कांग्रेस के भीतर गहलोत और सचिन पायलट के नेतृत्व वाले खेमों के बीच खींचतान की ख़बरें लंबे समय तक आती रही हैं। मुख्यमंत्री पद ही 2018 में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच विवाद की मुख्य जड़ था। पद को लेकर खींचतान होती रही और इसी वजह से 2020 में विद्रोह हुआ। दिल्ली की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इससे जुड़े सवाल का भी गहलोत ने जवाब दिया। सचिन पायलट का ज़िक्र आते ही मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी की ओर इशारा करते हुए गहलोत ने फिर दोहराया, 'मैं सीएम पद छोड़ना चाहता हूं लेकिन यह पद है जो मुझे नहीं छोड़ रहा है।' वैसे, गहलोत के इस बयान में दो बातें अहम हैं। एक तो चौथी बार सीएम बनने वाली बात और दूसरी यह है कि सीएम पद उनको नहीं छोड़ रहा है। शायद गहलोत की इस टिप्पणी को पायलट ज़्यादा अच्छी तरह समझ रहे होंगे।
हाईकमान और पायलट को संदेश
गहलोत के बयान को उनकी एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। गहलोत अच्छी तरह जानते हैं कि चुनाव के बाद यदि सरकार सत्ता में लौटती है, तो एक बार फिर पायलट कैंप से चुनौती मिलेगी। ऐसे में चुनाव से पहले गहलोत सियासी संदेश देना चाहते हैं। ताकि उन्हें जनता की सहानुभूति मिल सके। गहलोत कई बार कह चुके हैं कि वह जो कुछ बोलते हैं, सोच समझकर बोलते हैं। ऐसे में उनके बयान को सियासी बयान माना जा रहा है। हालांकि कांग्रेस यह बोल चुकी है कि राजस्थान का चुनाव सामूहिक नेतृत्व के साथ लड़ा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि गहलोत एक रणनीति के तहत बार-बार इस तरह के बयान देते हुए नजर आ रहे हैं। अगर उनकी सरकार की वापसी नहीं होती है, तो गहलोत पर संकट आ सकता है। क्योंकि तीन बार सत्ता में रहते हुए चुनाव हारने का ठप्पा गहलोत पर लगेगा। ऐसे में पायलट कैंप एक बार फिर गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोल सकता है।
20 अक्तूबर को दौसा के सिकराय में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की सभा होने जा रही है। इसी सभा के बाद टिकटों की घोषणा होने के आसार है। इस रैली के पहले बयान देकर सीएम ने हाईकमान को अपनी निष्ठा संदेश दे दिया है। उन्होंने कहा कि 'मैं पद छोड़ना चाहता हूं, लेकिन पद मुझे नहीं छोड़ रहा है।' हालांकि कुछ देर बाद वो अपनी बात को संभालते हुए सफाई देते दिखे कि उनका मतलब गांधी परिवार के भरोसे से था। यानी सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने उन्हें ये जिम्मेदारी सौंपी है। गहलोत का बयान यह जाहिर करता है कि भविष्य में उनके संदर्भ में कोई फैसला लेने से पहले हाईकमान जरूर सोचेगा। उन्होंने इस बयान के जरिए बताने की कोशिश की उन्हें सीएम पद का कोई लालच नहीं है। लेकिन वे सरकार सरकार मजबूरी में इस पद पर काबिज है।
राजे को भी संकट में डाल गए गहलोत
प्रदेश में अपनी सियासी जमीन तलाशने में जुटी वसुंधरा को भी गहलोत ने अपने बयान से झटका दे दिया है। उन्होंने भाजपा पर तंज करते हुए कहा कि उनकी वजह से भाजपा को वसुंधरा राजे को दंडित नहीं करना चाहिए। गहलोत ने कहा कि यह भाजपा का आंतरिक मामला है और वह इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे। लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि मेरी वजह से वसुंधरा को सजा नहीं मिलनी चाहिए। अगर ऐसा होता है तो यह उसके साथ अन्याय होगा। इससे पहले मई में गहलोत ने धौलपुर में कहा था कि वह 2020 में कांग्रेस विधायकों के विद्रोह से बच गए, क्योंकि भाजपा नेता वसुंधरा राजे और कैलाश मेघवाल ने धन-बल के माध्यम से उनकी सरकार को गिराने की साजिश का समर्थन नहीं किया था।