Rajasthan Politics: चौतरफा दबाव से कैसे निपटेंगे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत? विरोधियों ने तेज किए हमले
Rajasthan Politics: पार्टी के नेता रोहन गुप्ता कहते हैं कि राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की लोकप्रियता और पार्टी विधायकों के बीच में बने भरोसे से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन यह स्थिति भी तभी तक रहती है, जबतक कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेता अपने मुख्यमंत्री के साथ खड़े हैं...
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कांग्रेस पार्टी गुजरात विधानसभा चुनाव में अग्नि परीक्षा के दौर से गुजर रही है। हिमाचल में मतदान हो चुके हैं और कांग्रेस को वहां के 'रिवाज' और 'एंटी इंकम्बेंसी' से कुछ उम्मीद है। इस बीच राजस्थान के प्रभारी अजय माकन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। नवनिर्वाचित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को ऐसे दौर में अपनी चुनौतियां पता हैं। उन्हें मालूम है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के ठीक बाद राजस्थान के राजनीतिक हालात से दो-चार होना है। राजस्थान के तमाम नेताओं ने भी कांग्रेस मुख्यालय के रुख को भांपकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी चाहते हैं कि मुख्यमंत्री गहलोत अपनी सम्मानजनक स्थिति को खुद महसूस कर लें। देखना है कि अशोक गहलोत इस चौतरफा दबाव से कैसे निपटते हैं?
गुजरात चुनावों के खत्म होने का इंतजार
पार्टी के नेता रोहन गुप्ता कहते हैं कि राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की लोकप्रियता और पार्टी विधायकों के बीच में बने भरोसे से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन यह स्थिति भी तभी तक रहती है, जबतक कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेता अपने मुख्यमंत्री के साथ खड़े हैं। एक पूर्व केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि राजस्थान एक पेचीदा मसला है। वह कहते हैं कि गुजरात विधानसभा चुनाव के खत्म होने के बाद उन्हें इस मसले के सुलझ जाने की उम्मीद है। मौजूदा समय में हरीश चौधरी समेत कई नेता मुख्यमंत्री गहलोत के कामकाज को लेकर मुखर हो रहे हैं।
प्रताप सिंह खाचरियावास ने आईएएस अफसरों के एसीआर के मुद्दे को उठाकर अपना विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि नियम से एसीआर भरने की जिम्मेदारी मंत्री की होती है, लेकिन यह मुख्यमंत्री ने अपने पास ले रखी है। मंत्री राजेंद्र गुढ़ा भी अपने मुख्यमंत्री पर लगातार हमलावर हैं। गुढ़ा तो सचिन पायलट को बाकायदा मुख्यमंत्री बनाने की मांग भी कर रहे हैं। अब राजेंद्र यादव को भी मुख्यमंत्री कम रास आ रहे हैं। कोटपुतली को जिला बनाने की मांग कर रहे हैं। हरीश मीणा और दिव्या मदेरणा के सुर भी अब अशोक गहलोत के विरोध में हो रहे हैं।
नाउम्मीद नहीं हैं युवा नेता सचिन पायलट
सचिन पायलट को भी उम्मीद है कि राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन होगा। अभी राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने में करीब एक साल का समय बचा है। सचिन पायलट के समर्थकों ने भी अपनी मांग तेज कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजस्थान दौरे के दौरान सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों को कठघरे में खड़ा किया था। पायलट ने भी सार्वजनिक मंच से कुछ ऐसे संदेश दिए हैं, जो तमाम कांग्रेस के नेताओं को हजम नहीं हो रहे हैं। हालांकि गहलोत मंत्रिमंडल की एक नेता का कहना है कि यह राजनीति है। यहां थोड़ा-बहुत चलता रहता है। हम केवल इतना कह सकते हैं कि अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार अपने पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी।