हाथ तो मिलवाया, क्या अब गहलोत और पायलट का दिल भी मिलवा पाएंगी प्रियंका गांधी?
- केसी वेणुगोपाल ने लगाया जैसलमेर से जयपुर तक का चक्कर
- अशोक गहलोत के ताजा बयान ने फिर किया सचिन पायलट खेमें को हैरान
- अशोक गहलोत ने कहा कि बिना 18 विधायकों के वह बहुमत साबित कर लेते
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विस्तार
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में झंडा फहराएंगे और सचिन पायलट दर्शक दीर्घा में बैठकर देखेंगे। यह कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के मैराथन प्रयास से मुमकिन हो पाया। इस रास्ते को तय करने के लिए प्रियंका ने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल को आगे किया। सचिन पायलट और अशोक गहलोत दोनों को मनाया। दोनों नेताओं मे 45 मिनट की बैठक करके आपसी गिला शिकवा को कुछ दूर कर लिया है। विधायकों की बैठक भी हो गई है। मुख्यमंत्री ने सचिन पायलट से हाथ भी मिलाया, गले भी लगाया, लेकिन क्या प्रियंका गांधी वाड्रा इनके दिल का भी मेल करा पाएंगी।
कैसे बनी बात?
प्रियंका गांधी वाड्रा की निगाह लगातार राजस्थान के डेवलपमेंट पर टिकी थी। हरियाणा से दीपेन्द्र हुड्डा, राजस्थान से भंवर जितेन्द्र सिंह प्रियंका गांधी को सहयोग कर रहे थे। दोनों नेताओं से सचिन पायलट के रिश्ते ठीक ठाक हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा ने जम्मू-कश्मीर के अब्दुल्ला परिवार से भी संपर्क साधने में कोई गलती नहीं की। समय बीता, जयपुर का मिजाज बीता। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी अपनी सरकार बचाने की हर जुगत करते दिखाई दिए। इन सबके बीच में सरकार के बचने और न बचने का संशय बना हुआ था। कांग्रेस पार्टी के सूत्र बताते हैं इस बीच जयपुर की राजनीति ने भी कई करवटें ले ली। भाजपा की नेता, पूर्व मुख्यमंत्री वसुधरा राजे की खामोशी ने भी बहुत कुछ बयां किया। चलते-चलते संपर्क सूत्रों की मेहनत, मान-मनौव्वल के बीच सचिन पायलट ने फोन पर बात करना शुरू कर दिया। कांग्रेस पार्टी के एक नेता ने बताया कि इसी बीच प्रियंका के कहने पर सचिन पायलट राहुल गांधी के आवास पर आए। वहां दो घंटे तक चर्चा चली। प्रियंका ने अपनी कही, राहुल ने भी अपनी कही और सचिन पायलट ने अपने दर्द बयां किए। सचिन पायलट ने बागी तेवर त्यागने का भरोसा दे दिया और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी नेताओं को आगे बढऩे की अनुमति दे दी।
अशोक गहलोत चल दिए जैसलमेर
इधर, सचिन पायलट कांग्रेस पार्टी की मुख्यधारा में इंट्री ले रहे थे। सचिन पायलट जयपुर जाने के निर्देश का पालन करते हुए लौटने, अपने सहयोगी विधायकों, समर्थकों को मनाने में जुट गए थे और दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जौसलमेर के लिए निकल गए। अशोक गहलोत ने खुद को राजस्थान सरकार और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अभिभावक के रूप में बताना शुरू कर दिया। सूत्र बताते हैं कि प्रियंका गांधी ने यह फिर अपना दबाव बढ़ाया। महासचिव केसी वेणुगोपाल को 12 अगस्त को जैसलमेर, राजस्थान रवाना किया गया। केसी वेणुगोपाल न केवल जैसलमेर होटल में अशोक गहलोत के पास गए, बल्कि उन्होंने प्रियंका गांधी और अशोक गहलोत की फोन पर बात भी कराई। इसके बाद विधायकों की बैठक की रणनीति तैयार हो सकी। इससे पहले सचिन पायलट और गहलोत के भेंट की रुपरेखा बनी। दोनों नेताओं ने 50 मिनट तक आपसी गिला शिकवा दूर किया। मिले। पार्टी के प्रवक्ता राजीव त्यागी के आकस्मिक निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की। विधायकों की बैठक के स्थान को तय करने में भी प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल को वीटो लगाना पड़ा। एक गुट बैठक को विधानसभा भवन में कराने का तर्क दे रहा था तो दूसरा मुख्यमंत्री आवास पर बैठक चाह रहा था। खैर अंतत: मुख्यमंत्री आवास पर ही बैठक हो सकी।
हाथ मिल गए, दिल कब मिलेंगे प्रियंका जी?
सचिन पायलट ने भरोसा दिया है कि वह अब बागी रुख अख्तियार नहीं करेंगे। राज्य सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी। शर्त बस एक है, सचिन पायलट के मान सम्मान की रक्षा हो, ठेस न पहुंचे। भंवर लाल शर्मा समेत अन्य के खिलाफ कदम वापस लिए जाएं। केसी वेणुगोपाल ने प्रियंका गांधी की सलाह पर राजस्थान के प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे से यह आदेश तत्काल करा दिया है। उनके द्वारा अपने सम्मान में रखी गई बातों के बड़े हिस्से को पार्टी ने मान लिया है। अगले कुछ दिन में यह अमल में भी आ जाएगा। लेकिन चलते-चलते अशोक गहलोत ने थोड़ा घाव पर नमक मल दिया। संकेत दे गए कि हाथ तो मिला, पर दिल मिलने में अभी देर है।
अशोक गहलोत ने मल दिया घाव पर नमक
सबकुछ ठीक हो गया। दोनों नेताओं ने हाथ मिला लिया, लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कसक बाहर आ ही गई। सबकुछ ठीक ठाक होने के बाद अशोक गहलोत ने कहा कि यदि सचिन पायलट के साथ गए 18 विधायक नहीं लौटते, तब भी उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत विधानसभा में बहुमत साबित कर देते। अशोक गहलोत के खेमे का यह बयान सचिन पायलट के करीबियों को अखर रहा है। बताते हैं अभी दोनों खेमे के नेताओं के बीच में कुछ कसक बाकी है। एक विधायक का कहना है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल ने जब यह रास्ता बनाया है तो आगे का भी रोड मैप बनने की उम्मीद है। अब विश्वास करके ही इंतजार किया जा सकता है।