फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Rajasthan: How much do you know the youngest MBBS Sarpanch

जानिए राजस्थान की सबसे कम उम्र की महिला MBBS सरपंच के बारे में

Tue, 13 Mar 2018 03:53 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
बीबीसी, हिन्दी Updated Tue, 13 Mar 2018 03:53 PM IST
विज्ञापन
Rajasthan: How much do you know the youngest MBBS Sarpanch
शहनाज
राजस्थान के भरतपुर जिले का कामां पंचायत। यहां न तो लड़कियां डॉक्टरी की पढ़ाई करती हैं न ही इंजीनियरिंग की। ग्रेजुएशन और बीएड की पढ़ाई हाल फिलहाल में कुछ लड़कियों ने जरूर शुरू की है। लेकिन शहनाज ने कामां में एक नया कीर्तिमान रच दिया है। वो कामां पंचायत की पहली एमबीबीएस सरपंच बनी हैं। शहनाज सिर्फ 24 साल की हैं और एमबीबीएस की पढ़ाई का चौथा साल है।
विज्ञापन


इसी महीने की 30 तारीख से शहनाज को गुरुग्राम के सिविल अस्पताल में अपनी इंटरशिप शुरू करनी है। वो आगे पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी करनी चाहती थीं। लेकिन डॉक्टर बनने से पहले शहनाज सरपंच बन गईं। शहनाज राजनीति में उतरना चाहती थीं, लेकिन इतनी जल्दी भी नहीं।
विज्ञापन


अपने इस फैसले के बारे में बीबीसी से बातचीत करते हुए शहनाज ने बताया, "पिछले छह महीने में मेरी जिंदगी अचानक बदल गई। मुझसे पहले मेरे दादाजी भी यहां से सरपंच थे। लेकिन पिछले साल अक्टूबर में कोर्ट ने वो चुनाव खारिज कर दिया था। उसके बाद से ही चुनाव में घर से कौन खड़ा होगा, इसकी चर्चा शुरू हुई।"
विज्ञापन
विज्ञापन


राजस्थान में सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए दसवीं पास होना अनिवार्य है। शहनाज के दादाजी पर सरपंच के चुनाव में फर्जी शैक्षणिक योग्यता का सर्टिफिकेट देने का आरोप था, जिसके बाद कामां का सरपंच चुनाव रद्द कर दिया गया था।

शहनाज का पूरा परिवार राजनीति में ही है। उनके दादा 55 साल तक सरपंच रहे। पिता गांव के प्रधान रहे हैं। मां राजस्थान से विधायक, मंत्री और संसदीय सचिव रही हैं। शहनाज के सरपंच बनने के बाद वो परिवार की चौथी पीढ़ी हैं, जो राजनीति में जा रही हैं।

अपने फैसले के बारे में वो आगे कहती हैं, "पिताजी अगले साल प्रधान का चुनाव लड़ने वाले हैं। मां इस साल के अंत में होने वाले विधायक के चुनाव की तैयारी में जुटी हैं। इसलिए परिवार की राजनीति की इस विरासत को मैंने खुद ही आगे बढ़ाने का जिम्मा उठाया।"

लेकिन क्या ये वंशवाद को बढ़ावा देने जैसा नहीं...?

Rajasthan: How much do you know the youngest MBBS Sarpanch
शहनाज
सवाल के पूरा होने से पहले ही शहनाज अपना जवाब देना शुरू करती हैं, "मेरे सरपंच बनने से गांव में बेटियों की पढ़ाई लिखाई का स्तर बेहतर होगा। गांव के दूसरे मां-बाप भी सोचेंगे कि लड़कियों को क्यों न ज्यादा पढ़ाया जाए? इसकी शुरुआत मेरी मां ने की थी। वो पहली महिला प्रधान बनीं, जिन्होंने गांव से पर्दा प्रथा खत्म की थी।"

दरअसल शहनाज का नाम कामां में आज चर्चा का विषय इसलिए है, क्योंकि वो डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही हैं और इतनी कम उम्र में सरपंच बन गईं हैं। राजस्थान के इस इलाके में लड़कियों की पढ़ाई पर ज्यादा जोर नहीं दिया जाता है। राजस्थान के भरतपुर में साक्षरता दर 70.1% है, जो राज्य की साक्षरता दर से बेहतर है। राजस्थान की साक्षरता दर 66.1 फीसदी है। लेकिन भरतपुर में लड़कियों के मुकाबले लड़के ज्यादा पढ़े लिखे हैं।

शहनाज ने 5वीं क्लास तक पढ़ाई जयपुर में की है। 10वीं की पढ़ाई गुरुग्राम के श्रीराम राम स्कूल, अरावली से और 12वीं की पढ़ाई भी डीपीसी मारुति कुंज से की है। एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए शहनाज फिर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद आ गईं। पढ़ाई लिखाई के चक्कर में शहनाज, कामां में सिर्फ गर्मियों की छुट्टियों में ही रहती थीं।

इसके बावजूद पांच गांव में सरपंच के उपचुनाव में उन्हें 195 मतों के अंतर से सरपंच चुन लिया गया। बेटी की जीत पर शहनाज की मां जाहिदा खान ने बीबीसी से कहा, "हमारा परिवार वंशवाद की मिसाल नहीं बल्कि इस बात की मिसाल है कि साल दर साल आप अपने काम को और बेहतर करते हुए लगातार चुनाव जीत सकते हैं।" शहनाज, मेव मुस्लिम परिवार से आती हैं।

हरियाणा के मेवात और राजस्थान के अलवर और भरतपुर इलाकों में मेव मुस्लिम परिवार ज्यादा तादाद में रहते हैं। उन्हें आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से बहुत पिछड़ा माना जाता है। ऐसे परिवार से निकल कर शहनाज का सरपंच तक का सफर कामां इलाके की लड़कियों के लिए एक मिसाल है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed