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राजस्थान: लॉकडाउन के बाद भी तेजी से बढ़े महिलाओं के खिलाफ अपराध, राज्यवर्धन बोले-राज्य में अंधा कानून

Sun, 11 Jul 2021 07:25 PM IST
सुरेंद्र जोशी राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 11 Jul 2021 07:25 PM IST
सार

राजस्थान से आई यह खबर चौंकाने वाली है। लॉकडाउन के दौरान दुष्कर्म जैसे अपराध बढ़ना चिंताजनक है, क्योंकि इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था सख्त थी।
 

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Rajasthan: Crime against women increased rapidly even after lockdown, Rajyavardhan said - blind law in the state
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामले तेजी से बढ़े हैं। राज्य में पिछले छह महीने में जिस तरह से मामले सामने आए हैं वह बहुत ही हैरान करने वाले हैं। भाजपा नेता राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने इसे लेकर अशोक गहलोत नीत कांग्रेस सरकार पर प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि देश में सब दूर देश का कानून चलता है, लेकिन यहां अंधा कानून चलता है। 

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कोरोना लॉकडाउन की वजह से पुलिस दिन-रात सड़कों पर तैनात रही, फिर भी अपराधी वारदातों को अंजाम देते रहे। राज्य में पिछले छह महीने में दुष्कर्म की वारदात में 30 फीसदी तक इजाफा हुआ। वहीं, पिछले एक महीने में 550 केस सामने आए। बीते वर्ष कुल 13 हजार 750 दुष्कर्म के केस सामने आए थे। ये वो केस हैं जो पुलिस थानों में शिकायत के बाद दर्ज  हुए हैं। कुछ ऐसे मामले भी हैं जो रिकॉर्ड में ही नहीं हैं। 
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राजस्थान पुलिस के पिछले तीन साल के जारी महिला अपराधों के आंकड़ों के मुताबिक साल 2019 में छेड़छाड़ के कुल 3054 मामले दर्ज हुए थे, जो 2020 में कम होकर 2978 रह गए थे। हालांकि 2021 के दौरान मई तक ऐसे मामले बेतहाशा बढ़ गए और इनकी संख्या 3508 तक पहुंच गई। दुष्कर्म के मामले इस साल मई तक बेहद बढ़े हैं। 2019 में जहां 2298 और 2020 में 1807 दुष्कर्म के केस दर्ज हुए थे, वहीं इस साल मई तक यानी पांच माह में ही कुल 2461  केस दर्ज हो चुके हैं।
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महिला अत्याचार के केस भी तेजी से बढ़े
महिला उत्पीड़न के मामले भी इस साल तेजी से बढ़े हैं। वर्ष 2019 मे 7058 और वर्ष 2020 में दर्ज 4103 मामलों की तुलना में वर्ष मई 2021 तक महिला उत्पीड़न के 6254 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। दहेज की वजह से हुई आत्महत्या के मामलों में भी इस साल वृद्धि हुई है। 2019 में दहेज हत्या के 176 और साल 2020 के 187 मामलो की तुलना में इस साल मई तक दहेज हत्या के 178 मामले दर्ज हुए हैं। साल 2019 में 76 और साल 2020 में 63 दहेज आत्महत्या के मामले पंजीकृत हुए थे, जबकि मौजूदा साल में अब तक कुल 86 मामले पूरे राज्य में दर्ज हो चुके हैं।
इस तरह कोरोना काल में महिला अपराध 38 फीसदी बढ़े हैं। 

महिला अत्याचार में राजस्थान पहले नंबर पर: राठौड़
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पूरे देश में देश का कानून चलता है, लेकिन राजस्थान में अंधा कानून चलता है। नेशनल क्राइम ब्यूरो रिपोर्ट के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आज महिलाओं के ऊपर अत्याचार के मामलों में दुर्भाग्य से राजस्थान देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है जबकि दलितों पर अपराध में राजस्थान दूसरे से पहले स्थान की ओर अग्रसर है। 

राजस्थान में, पिछले 6 महीने में दुष्कर्म की वारदात में 30 फीसदी तक इजाफा हुआ। वहीं, पिछले एक महीने में 550 केस सामने आए। साल 2020 में 13 हजार 750 दुष्कर्म के केस सामने आए। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो 2019 के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि वर्ष 2018 से 2019 के बीच राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सिर्फ कोरोना काल में प्रदेश में महिला अपराध का आंकड़ा 38 फीसदी तक बढ़ा है।

2018 से लगातार बढ़ रहे प्रदेश में अपराध
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राज्यवर्धन सिंह  राठौड़ ने आगे कहा कि अपराधों के बढ़ते आंकड़ों का सिलसिला वर्ष 2018 से शुरू हुआ, वह वर्ष 2020 व 2021 में भी अनवरत जारी है। राजस्थान पुलिस द्वारा पेश किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2020 में 32 हजार से ज्यादा महिला अपराध दर्ज किए गए। महिला उत्पीडन के मामले में दलितों की संख्या कहीं ज्यादा है। 


अलवर में दुष्कर्म के एक साथ सात मामले
हाल ही में अलवर में बलात्कार के सात मामले आए हैं। वही, राजस्थान के झालवाड़ जिले में मोची मोहल्ला निवासी दलित युवक कृष्णा वाल्मीकि की सरे राह मॉब लिंचिंग की घटना सामने आई है। हमले में दलित युवक की मौत हो गई। अगर यही घटना किसी बीजेपी शासित राज्य में हुई होती, तो सुर्खियां बन चुकी होती। राहुल, प्रियंका से लेकर दलितों के ठेकेदार भी सब मौन हैं, क्योंकि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है।

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