Rajasthan CM: भाजपा में दो महारानियों में टक्कर, किसे मिलेगा राजस्थान में नेतृत्व का मौका
भाजपा को तीन राज्यों में मिली शानदार जीत में महिला मतदाताओं की विशेष भूमिका मानी जा रही है। इसके पहले भी महिला मतदाता भाजपा की बड़ी ताकत बनकर उभरी हैं। चूंकि, अगले छह महीने के अंदर ही लोकसभा चुनाव भी होने हैं, भाजपा किसी महिला को मुख्यमंत्री बनाकर महिला मतदाताओं को आकर्षित करने की एक और कोशिश कर सकती है...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजस्थान में भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा कौन होगा, इस पर तमाम कयासबाजी जारी है। सबसे ज्यादा संभावना इस बात की जताई जा रही है कि भाजपा आगामी चुनौतियों को देखते हुए किसी नए चेहरे पर दांव लगाएगी। ऐसे में राजस्थान में गजेंद्र सिंह शेखावत, पूर्व राजस्थान अध्यक्ष सतीश पूनिया, सांसद बाबा बालक नाथ, राज्यवर्धन सिंह राठौर सहित कई नामों की चर्चा चल रही है। इसके साथ ही जयपुर राजघराने की दिया कुमारी को भी इस दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है।
यदि पार्टी किसी महिला को मुख्यमंत्री बनाने की रणनीति पर अमल करती है, तो दिया कुमारी इस रेस में सबसे आगे निकल सकती हैं। लेकिन चूंकि वसुंधरा राजे सिंधिया पहले ही इस पद पर अपनी दावेदारी ठोंक रही हैं, आने वाले दिनों में राजस्थान भाजपा में दो महारानियों के बीच टक्कर देखने को मिल सकती है। दिया कुमारी नए चेहरे के तौर पर भाजपा आलाकमान की पहली पसंद हो सकती हैं तो वसुंधरा राजे सिंधिया अपने अनुभव और विधायकों-संगठन पर पकड़ के कारण उन पर भारी पड़ सकती हैं।
भाजपा को तीन राज्यों में मिली शानदार जीत में महिला मतदाताओं की विशेष भूमिका मानी जा रही है। इसके पहले भी महिला मतदाता भाजपा की बड़ी ताकत बनकर उभरी हैं। चूंकि, अगले छह महीने के अंदर ही लोकसभा चुनाव भी होने हैं, भाजपा किसी महिला को मुख्यमंत्री बनाकर महिला मतदाताओं को आकर्षित करने की एक और कोशिश कर सकती है।
महिला समीकरणों में वसुंधरा राजे सिंधिया का नाम सबसे ताकतवर है, वे पहले भी दो बार राजस्थान की कमान संभाल चुकी हैं। राजनीतिक-प्रशासनिक अनुभव, संगठन पर पकड़ और पूरे राजस्थान में मतदाताओं में लोकप्रिय होने के कारण वे इस पद की बड़ी दावेदार हो सकती हैं। जयपुर स्थित अपने आवास पर नवनिर्वाचित विधायकों को भोजन पर आमंत्रित कर उन्होंने अपनी दावेदारी भी पेश कर दी है। इसके पहले वे राजस्थान के राज्यपाल से भी मुलाकात कर चुकी हैं। इसे भी उनकी मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी के तौर पर देखा जा रहा है।
लेकिन कहा जा रहा है कि जिस तरह भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें राजस्थान में मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं किया, यह संकेत स्पष्ट है कि पार्टी अब नए जमाने की राजनीति को देखते हुए किसी नए चेहरे पर दांव खेल सकती है। यह समीकरण पूरी तरह दिया कुमारी के साथ जा सकता है, जो पार्टी नेतृत्व के करीब बताई जाती हैं।