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Bengal: 'छेड़छाड़ की शिकायतें गलत प्रेरणा से प्रेरित', इन हाउस प्रारंभिक जांच में राज्यपाल बोस को क्लीनचिट
Sun, 21 Jul 2024 01:48 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sun, 21 Jul 2024 01:48 AM IST
सार
राजभवन पैनल की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कहा गया है, दो मई, 2024 को कथित घटना का समय, प्रधानमंत्री की राजभवन यात्रा के साथ मेल खाता है, जो सत्यता के बारे में संदेह के बादल पैदा करता है। आरोपों के पीछे एक भयावह मकसद का संकेत देता है।
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस
- फोटो : ANI
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विस्तार
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस के खिलाफ लगे छेड़छाड़ के आरोप को राजभवन पैनल की आंतरिक प्रारंभिक जांच रिपोर्ट ने खारिज कर दिया है। शनिवार को सार्वजिनक की गई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राजभवन की पूर्व महिला कर्मचारी की शिकायतें गलत प्रेरणा से प्रेरित थीं। पांडिचेरी न्यायिक सेवा के पूर्व जिला न्यायाधीश डी रमाबाथिरानी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में 24 अप्रैल और 2 मई को राज्यपाल के खिलाफ कथित यौन दुर्व्यवहार को निराधार बताया गया है।
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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 24 अप्रैल और 2 मई को राजभवन में राज्यपाल बोस ने उससे छेड़छाड़ सहित यौन दुर्व्यवहार किया। छेड़छाड़ से संबंधित तीन से सात मई के बीच समाचार पत्रों में खबरें छपीं, जिन पर विचार करने के अलावा, एक सदस्यीय जांच समिति ने गवाह के रूप में राजभवन के आठ कर्मचारियों से भी पूछताछ की, जिनमें दो एडीसी और राज्यपाल के ओएसडी शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया है, दो मई, 2024 को कथित घटना का समय, प्रधानमंत्री की राजभवन यात्रा के साथ मेल खाता है, जो सत्यता के बारे में संदेह के बादल पैदा करता है। आरोपों के पीछे एक भयावह मकसद का संकेत देता है। इसमें कहा गया है कि विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) ने कथित घटना होने से पहले ही परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया था। इन परिस्थितियों को देखते हुए, यह अत्यधिक असंभव लगता है कि राज्यपाल शिकायतकर्ता के साथ दुर्व्यवहार करने के लिए ऐसे क्षण का चयन करेंगे। रिपोर्ट में आरोपों को गलत प्रेरित करार दिया गया। यह भी नोट किया गया कि राजभवन की अन्य महिला कर्मचारियों ने गवाही दी कि उन्हें राज्यपाल से किसी अनुचित व्यवहार का सामना नहीं करना पड़ा।
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वहीं, तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को कचरे का टुकड़ा बताया। उन्होंने राज्यपाल पर अपनी पसंद के जज के साथ जांच पैनल बनाकर खुद को क्लीन चिट देने का आरोप लगाया। घोष ने पूछा, 'अगर उन्हें यकीन है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है, तो वह राज्यपाल के रूप में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत छूट क्यों मांग रहे हैं? उन्हें जांचकर्ताओं द्वारा पूछताछ का सामना करने दें।
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शनिवार देर शाम अपनी बात रखते हुए टीएमसी सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने रिपोर्ट को 'न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप' बताया। बनर्जी ने पोस्ट किया, 'बंगाल के राज्यपाल के मामले में अभियोजक अपने ही मामले का न्यायाधीश नहीं हो सकता। कथित अपराध के अपराधी द्वारा न्यायिक समिति का गठन सभी कानूनों के तहत किया गया है। आज रिपोर्ट का प्रकाशन न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप के समान है।' उनके एक्स हैंडल ने गृह मंत्री अमित शाह और बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को टैग किया।
बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के समक्ष एक अपील दायर की, जिसमें एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें उन्हें और तीन अन्य को बोस के खिलाफ कोई भी अपमानजनक या गलत बयान देने से रोका गया था। राज्यपाल की ओर से दायर मानहानि के मुकदमे में एकल पीठ ने मंगलवार को अंतरिम आदेश पारित किया था। बनर्जी की अपील में आदेश को चुनौती दी गई है, जो 14 अगस्त तक प्रभावी है। आदेश में नवनिर्वाचित विधायकों सयंतिका बनर्जी और रेयात हुसैन सरकार और टीएमसी नेता कुणाल घोष को बोस के खिलाफ कोई भी अपमानजनक या गलत बयान देने से रोक दिया गया। यह मामला अब एक खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।