Raisina Dialogue: क्या है रायसीना डायलॉग? जिसमें शामिल हो रहे 115 देशों के प्रतिभागी, जानें सम्मेलन का एजेंडा
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विस्तार
रायसीना डायलॉग सम्मेलन के नौवें संस्करण की शुरुआत 21 फरवरी से हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में इस हाई-प्रोफाइल सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में ग्रीस के प्रधानमंत्री क्यारीकोस मित्सोटाकिस मुख्य अतिथि हैं।
सम्मेलन में दुनियाभर के राजनेता और दूसरे क्षेत्रों के अग्रणी लोग हिस्सा ले रहे हैं। इसमें वैश्विक समुदाय के सामने आने वाले गंभीर मुद्दों पर वार्ता की जाएगी। यह कार्यक्रम 23 फरवरी तक चलेगा।
आइये जानते हैं आखिर रायसीना डायलॉग क्या है? सम्मेलन के मौजूदा संस्करण में क्या-क्या होना है? कार्यक्रम के मेहमान कौन हैं? सम्मेलन का एजेंडा क्या है?
रायसीना डायलॉग क्या है?
रायसीना डायलॉग एक वार्षिक सम्मेलन है जो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित किया जाता है। रायसीना डायलॉग भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर भारत का प्रमुख सम्मेलन है जिसका उद्देश्य वैश्विक समुदाय के सामने आने वाले सबसे चुनौतीपूर्ण मुद्दों को हल करना है। रायसीना डायलॉग की शुरुआत साल 2016 में की गई थी।
हर साल, राजनीति, व्यापार, मीडिया और नागरिक समाज के नेता नई दिल्ली में जुटते हैं। इस दौरान ये दुनिया की स्थिति पर चर्चा करते हैं और समसामयिक मामलों पर सहयोग के अवसर तलाशते हैं। संवाद में राष्ट्र प्रमुख, कैबिनेट मंत्री और स्थानीय सरकार से जुड़े अधिकारी शामिल होते हैं। इसके अलावा निजी क्षेत्र, मीडिया और शिक्षा जगत के विचारक भी कार्यक्रम से जुड़ते हैं।
सम्मेलन की मेजबानी भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के साथ साझेदारी में ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन करता है। इसमें कई संस्थानों, संगठनों और व्यक्तियों का समर्थन भी हासिल होता है।
सम्मेलन के मौजूदा संस्करण में क्या-क्या होना है?
रायसीना डायलॉग का नौवां संस्करण 21-23 फरवरी, 2024 तक आयोजित किया जाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 फरवरी को संवाद का उद्घाटन किया। वहीं, ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोटाकिस मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन सत्र में शामिल हुए।
नौवें रायसीना डायलॉग में कई देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे जिनमें मंत्री, पूर्व राष्ट्राध्यक्ष और सरकारों के प्रमुख, सैन्य कमांडर, उद्योगपति, प्रौद्योगिकी प्रमुख, शिक्षाविद, पत्रकार, रणनीतिक मामलों के विद्वान, विशेषज्ञ, अग्रणी थिंक टैंक और युवा शामिल होंगे।
इस बार का विषय है 'चतुरंगा: संघर्ष, प्रतियोगिता, सहयोग, निर्माण'।
सम्मेलन का एजेंडा क्या है?
तीन दिनों के सम्मेलन के दौरान दुनियाभर के नेता बातचीत के जरिए एक-दूसरे से जुड़ेंगे। इस सम्मेलन के लिए छह विषय तय किए हैं। इनमें (1) टेक फ्रंटियर्स: विनियम और वास्तविकताएं, (2) ग्रह के साथ शांति: निवेश और नवाचार, (3) युद्ध और शांति: शस्त्रागार और विषमताएं, (4) उपनिवेशवाद से मुक्ति: संस्थान और समावेशन, (5) 2030 के बाद का एजेंडा: लोग और प्रगति और (6) लोकतंत्र की रक्षा: समाज और संप्रभुता।
115 देशों के 2500 से अधिक प्रतिभागी व्यक्तिगत रूप से संवाद में शामिल होंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, सम्मेलन को दुनियाभर में लाखों लोग विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों पर देखेंगे।
किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
तीन दिवसीय सम्मेलन में अलग-अलग दिन अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा होगी। ये कार्यक्रम दिल्ली की विभिन्न होटलों में आयोजित किए जाने हैं। कुछ अहम मुद्दे ऐसे हैं:
पहले दिन (21 फरवरी):
- भारत-आर्मीनिया संवाद
- यूएनएससी प्रथम: बहुपक्षवाद में सुधार
- नए ईंधन, नई आकांक्षाएं और नई सुरक्षा
- साउथ राइजिंग: जी20 में साउथ फर्स्ट दृष्टिकोण को संस्थागत बनाना
- निवारण और अलगाव: पश्चिम के चीन रुख को समझना
- नई मूल्य श्रृंखलाएं: इलेक्ट्रॉनिक्स, पारिस्थितिकी तंत्र और समृद्धि
- बिम्सटेक पार्ले: समावेशी विकास और सतत विकास
- ऊर्जा: पहुंच, सामर्थ्य, उपलब्धता
- हिंद-प्रशांत से लेकर मेड अटलांटिक तक: विकास की ज्यामिति
- AI किसका है?
- व्यापार के केंद्र में: भारतीय अवसर
- हिंद-प्रशांत में यूरोप
- दिल्ली आम सहमति: एक वैश्विक जलवायु ढांचे की ओर
- लोग, ग्रह और समृद्धि: निवेश, वित्त और विकास
- उभरती प्रौद्योगिकियां: एसडीजी
- संहिता, न्यायालय और संविधान: प्रभाव पर तकनीकी के एकाधिकार को चुनौती
- द रशिया फाइल्स
- एंग्री प्लैनेट: लचीलेपन और अनुकूलन के युग में निवेश
- रिपोर्ट का लॉन्च: स्ट्रॉन्गर टुगेदर (आपदाओं से जुड़ी)
- द अमेरिका फाइल्स पर बातचीत (अमेरिकी चुनाव)
- लोकतंत्र
- द यूरोप फाइल्स
- ड्रोन, क्लोन और फोन
- हिंद-प्रशांत में लचीलापन
- रिपोर्ट का लॉन्च: हिंद-प्रशांत में क्षेत्रीय एकीकरण: संपर्क, सहयोग और नई आपूर्ति-श्रृंखला का जुड़ाव
- समावेशी परिदृश्य: ब्रिक्स, जी20 और वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ)
- डेमोक्रेटिक डॉलर
- पश्चिम एशिया
- क्वाड टेक एलायंस
- द अफ्रीका फाइल्स
- एजियन सागर से दक्षिण चीन सागर तक: समुद्री घेराबंदी का जवाब