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आंकड़े: कोयले की आवाजाही बढ़ाने के लिए रेलवे ने कराई वैगनों की मरम्मत, 150 करोड़ रुपये से अधिक का आया खर्च
Mon, 02 May 2022 07:48 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Mon, 02 May 2022 07:48 PM IST
सार
रेलवे ने ऐसे वैगनों की मरम्मत के लिए पांच नए मरम्मत स्थल भी स्थापित किए हैं। बिजली संकट और तेज गति से कोयले की ढुलाई के दबाव को देखते हुए रेलवे ने मरम्मत करने पर जोर दिया है ताकि बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति प्रभावित न हो।
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भारतीय रेलवे (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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विस्तार
रेलवे ने बिजली संयंत्रों तक कोयले की आवाजाही बढ़ाने के लिए पिछले चार महीनों में करीब 2,000 क्षतिग्रस्त और जीर्ण-शीर्ण वैगनों की मरम्मत पर 150 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। आंकड़ों से ये खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि जनवरी में लगभग 9,982 ऐसे वैगनों को क्षतिग्रस्त के रूप में सूचीबद्ध किया गया था, जिनकी संख्या 2 मई तक घटकर 7,803 हो गई। रेलवे ने देश में कोयले की मांग की पूर्ति के लिए समय पर 2,179 वैगनों की मरम्मत का प्रबंधन किया।
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जेसीबी से अनलोडिंग की वजह से खराब होते हैं वैगन
अधिकारियों ने कहा कि प्रत्येक वैगन की मरम्मत के लिए रेलवे को लगभग 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये का खर्च आया है। सूत्र बताते हैं कि वैगनों को हो रहा नुकसान मंत्रालय के लिए चिंता का विषय बन गया है क्योंकि बिजली संयंत्रों द्वारा कोयले को उतारने में लगे निजी ठेकेदारों ने मैनुअल अनलोडिंग की जगह पर जेसीबी से अनलोडिंग शुरू कर दी है।
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एक अधिकारी ने बताया कि जेसीबी वैगनों के अंदरूनी हिस्से से टकराते हैं जिससे वैगन को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि जबकि पहले अनलोडिंग मैनुअल रूप से की जाती थी। अब यह जेसीबी के माध्यम से की जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप क्षतिग्रस्त वैगनों की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि इन छतिग्रस्त वैगन की मरम्मत तीन प्रकार की जाती है। उन्होंने बताया कि अनुमान है कि लगभग 2,179 वैगनों की मरम्मत में रेलवे को 150 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है।
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ऐसे बढ़ी-घटी क्षतिग्रस्त वैगनों की संख्या
आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि 1 जनवरी को 9,982 वैगनों को क्षतिग्रस्त दिखाया गया था और 6 जनवरी तक यह संख्या बढ़कर 10,687 हो गई थी। वहीं, 11 जनवरी को क्षतिग्रस्त वैगनों की संख्या 9,839 थी और 21 जनवरी को क्षतिग्रस्त वैगनों की संख्या 9,097 हो गई थी। आधिकारिक आंकड़ों में कहा गया है कि 11 फरवरी को यह संख्या घटकर 7,267 पर आ गई थी। इसके बाद फिर 2 मई को बढ़कर 7,531 हो गई।
मरम्मत पर है जोर
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि रेलवे ने ऐसे वैगनों की मरम्मत के लिए पांच नए मरम्मत स्थल भी स्थापित किए हैं। बिजली संकट और तेज गति से कोयले की ढुलाई के दबाव को देखते हुए रेलवे ने मरम्मत करने पर जोर दिया है ताकि बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति प्रभावित न हो।
वैगनों के टर्नओवर के समय में भी बढ़ोतरी हुई
सूत्रों का कहना है कि कोयला क्षेत्रों के पास स्टॉक उपलब्ध नहीं होने के कारण कोयला लदान के लिए इंतजार कर रहे वैगनों के टर्नओवर के समय में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले यह समय सात दिन था जो अब बढ़कर लगभग 15से 20 दिन हो गया है। सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में स्थिति ऐसी हो गई है कि रेलवे ने कोयले को ले जाने के लिए लगभग 40-50 क्षतिग्रस्त वैगनों को चालू कर दिया है। एक कोयला ट्रेन में आमतौर पर 84 वैगन तक होते हैं।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि कोयला रेक की आवाजाही में तेजी लाने के लिए, रेलवे ने रेक के संचालन की अवधि में 2,500 किमी की वृद्धि की है, जिसका अर्थ है कि जिन रेक की पहले हर 7,500 किमी चलने के बाद मरम्मत की जाती थी, उन्हें अब 10,000 किमी चलने के बाद गैरेज में भेजा जाता है।
40 ट्रेनें हुई हैं रद्द
इस बीच, भारतीय रेलवे ने देश के विभिन्न हिस्सों में बिजली संकट के मद्देनजर अब तक कोयले की ढुलाई के लिए लगभग 40 ट्रेनों को रद्द कर दिया है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, रेलवे ने कोयले की रेक (माल ट्रेन) की अपनी औसत दैनिक लोडिंग बढ़ाकर 400 प्रति दिन कर दी है, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है। हालांकि, इसके लिए कई यात्री ट्रेनें रद्द की गईं या देरी से अपने गंतव्य तक पहुंची।