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श्रमिक स्पेशल ट्रेन का औसत किराया 600 रुपये, 360 करोड़ का मिला राजस्व : रेलवे
Mon, 15 Jun 2020 09:31 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 15 Jun 2020 09:31 PM IST
सार
लॉकडाउन के चलते देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके घर वापस पहुंचाने के लिए चलाई गई श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में प्रति व्यक्ति औसत किराया 600 रुपये वसूला गया। भारतीय रेलवे ने सोमवार को इससे संबंधित जानकारी दी।
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श्रमिक स्पेशल ट्रेन (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
रेलवे ने कहा कि एक मई से चलाई जा रही इन ट्रेन से करीब 60 लाख श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया। इससे करीब 360 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने कहा कि भारतीय रेलवे ने प्रवासी मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए अब तक 4,450 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई हैं।
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यादव ने कहा, 'श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए औसत किराया 600 रुपये प्रति यात्री रहा। यह मेल, एक्सप्रेस ट्रेन का सामान्य किराया है न कि स्पेशल ट्रेन के लिए वसूला जाने वाला ऊंचा किराया। इन ट्रेनों के माध्यम से हमने करीब 60 लाख लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया। इनके परिचालन पर आई लागत का करीब 15 फीसदी ही वसूल किया गया। जबकि 85 फीसदी राशि का वहन केंद्र सरकार द्वारा किया गया।'
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अधिकारी ने कहा कि एक प्रवासी श्रमिक ट्रेन की परिचालन लागत करीब 75 से 80 लाख रुपये है। अधिकतर प्रवासी मजदूर अपने गंतव्य तक पहुंच चुके हैं। बहुत कम ऐसे मजदूर बचे हैं जो अब वापस अपने घर जाना चाहते हैं। बचे हुए प्रवासी मजदूरों के लिए हमने राज्य सरकारों से तीन जून तक उनकी जरूरत के हिसाब से ट्रेनों की मांग बताने को कहा था। अब तक हमें 171 ट्रेन उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
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यादव ने कहा, '14 जून तक हमने 222 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया। उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद हमने राज्य सरकारों से फिर से उनकी अतिरिक्त ट्रेनों की मांग बताने को कहा है। जब तक राज्यों की ओर से मांग की जाती रहेगी हम ट्रेन का संचालन करते रहेंगे।' रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने दोहराया कि इन ट्रेनों का संचालन 85-15 प्रतिशत की केंद्र-राज्य भागीदारी पर किया गया।