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रेल यात्रियों को नहीं भाया हल्दीराम, टाटा और नेस्ले का स्वाद, रेलवे से मांग रहे हैं वेज बिरयानी

Wed, 06 Jan 2021 05:55 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Wed, 06 Jan 2021 05:55 PM IST
सार

यात्रियों को सफर के दौरान खाने को लेकर कोई परेशानी नहीं हो, इसलिए हल्दीराम, टाटा, नेस्ले और आईटीसी सहित अन्य कंपनियों का रेडी टू-ईट मील मुहैया करवाया जा रहा है। लेकिन यात्री इस खाने से नाखुश हैं...

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Railway passengers asking Biryani instead of Haldirarm, Tata and ITC food
indian railway - फोटो : Amar Ujala (File)

विस्तार

कोरोना काल के पहले आए दिन भारतीय रेलवे के खाने और पेंट्रीकार को लेकर यात्रियों की शिकायतें सामने आती रहती थीं। लेकिन अब वही यात्री रेलवे से पेंट्रीकार शुरू करने और गर्म खाना देने की मांग कर रहे हैं।

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यात्रियों को हल्दीराम, नेस्ले और टाटा का रेडी-टू-ईट मील पसंद नहीं आ रहा है। इसके बदले में वे आईआरसीटीसी की रसोई में बनी वेज बिरयानी दोबारा से शुरू करने की मांग कर रहे है।
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आईआरसीटीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने के अनुरोध पर अमर उजाला से कहा कि कोविड प्रोटोकाल को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने सभी आईआरसीटीसी के कैंटिन में खाना पकाना फिलहाल बंद कर रखा है। यात्रियों को सफर के दौरान खाने को लेकर कोई परेशानी नहीं हो, इसलिए हल्दीराम, टाटा, नेस्ले और आईटीसी सहित अन्य कंपनियों का रेडी- टू-ईट मील मुहैया करवाया जा रहा है। लेकिन यात्री इस खाने से नाखुश हैं।
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उन्होंने आगे बताया, हमें लगातार सुझाव मिल रहे हैं कि आईआरसीटीसी दोबारा से ट्रेनों में किचन शुरू करें। यात्री रेडी-टू-ईट की जगह वेज बिरयानी और साधारण खाना फिर से देने की मांग कर रहे हैं। यात्रियों की मांग को देखते हुए कैंटिन और ट्रेनों में पेंट्रीकार शुरू करने के संदर्भ में रेलवे बोर्ड से आग्रह किया है। जैसे ही वहां से अनुमति मिलेगी फिर से ट्रेनों में खाना देना शुरू हो जाएगा।

रेलवे का खाना पड़ रहा है सस्ता

रेलवे द्वारा राजधानी, शताब्दी और लंबी दूरी की स्पेशल ट्रेनों में यात्रियों को रेडी-टू-ईट फूड दिया जा रहा है। इनमें यात्रियों को राजमा चावल 80 रुपये, वेज बिरयानी 125 रुपये और कढ़ी चावल 150 रुपये में दिया जा रहा है। जबकि आईआरसीटीसी की तरफ से कोविड के पहले वेज बिरयानी और साधारण थाली 80 रुपये में दी जाती थी।

यात्रियों की आईआरसीटीसी से मांग है कि 'राजधानी, शताब्दी जैसी ट्रेनों का महंगा टिकट खरीदने के बाद भी हमें बाहर से खाना खरीद कर खाना पड़ रहा है। ये रेडी-टू-ईट फूड महंगा भी होता है। वहीं उसमें स्वाद भी नहीं होता है।'



ट्रेनों में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए आईआरसीटीसी ने पेंट्रीकार को बंद कर दिया था। यात्रियों को सफर के दौरान खाने को लेकर कोई असुविधा नहीं हो इसे देखते हुए आईआरसीटीसी ने रेडी टू ईट फूड देना शुरू कर दिया है।

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