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नीलगिरी में पटरियों पर दौड़ेंगी बसें, एक साथ इतने यात्री कर पाएंगे सफर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नीलगिरी
Updated Thu, 29 Nov 2018 04:23 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pexels.com
तमिलनाडु के नीलगिरी में अब बसें पटरियों पर दौड़ेंगी, यह कहना है नीलगिरी माउंटेन रेलवे (एनएमआर) का। अगर सबकुछ ठीक रहा तो इस रेलबस सेवा की शुरुआत अगले कुछ हफ्तों में दक्षिणी रेलवे से की जा सकती है। रेलबस सेवा के तहत बसें रेल की पटरियों पर दौड़ेंगीं। इससे रेलवे को तो एक नई उपलब्धी मिलेगी ही साथ ही पर्यटकों पर भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा।
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यूं तो रेलबस तीन सप्ताह पहले ही मेट्टुपलायम पहुंच चुकी है। लेकिन इसपर अभी काम चल रहा है कि अगर इसमें थोड़ा बदलाव किया जाए तो क्या ये कुन्नूर से उदगमंदलम तक दौड़ पाएगी। इसके अलावा इस बात पर भी काम चल रहा है कि ये रेलबसें चढ़ाई कर पाने में सक्षम हैं या नहीं।
दक्षिणी रेलवे के वरिष्ठ मैकेनिकल इंजीनियर का कहना है, "यह रेलबसें कुछ हफ्ते पहले ही दक्षिण मध्य रेलवे पहुंची थीं। अब इसे रेलवे यार्ड तक लाने के कोशिश हो रही है।" उन्होंने कहा, "हालांकि, एनएमआर ट्रैक पर रेलबस के ट्रायल से पहले काफी सारे मकैनिकल काम किए जाने की आवश्यक्ता है। ट्रायल करने के लिए काफी मंजूरी की भी आवश्यक्ता है और हमारे सीनियर्स जरूरी मंजूरी लेने पर काम कर रहे हैं।"
फिलहास इस काम की एनएमआर हेरिटेज रेलवे सर्विस निगरानी कर रही है। एनएमआर ने जब मेट्टुपालयम में रेलबस की वीडियो देखी तो वह हैरान रह गए। रेलबस के बारे में बताते हुए रेलवे इंजीनियर्स का कहना है कि यह एक तरह की बस है जो रेलवे की पटरियों पर चलेगी।
इसमें इंजन लगा होगा, यह स्वसंचालित वाहन की तरह होगी। यह डीजल पर चलती है, इसे चलाने के लिए फर्नेस तेल और कोयले की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें करीब 60 लोग बैठ पाएंगे और एक स्टाफ मेंबर की जरूरत होगी। जैसे ड्राइवर या पायलट, जो इस रेलबस को चलाएंगे।
इस सेवा के शुरू होने से उत्साहित होने के साथ ही वैज्ञानिकों को इस बात की चिंता भी है कि जो रेलबस बड़ोदा के मैदानी इलाके में चलती है क्या वह एनएमआर सेक्शन की खड़ी ढाल वाली जगहों पर चल पाएगी या नहीं।
इंजीनियर का कहना है, "यह एक बस है जो 5एचपी इंजन की सहायता से चलती है। हम इसकी क्षमता को लेकर निश्चिंत नहीं हैं कि ये ढलान पर चढ़ाई पर पाएगी या नहीं। इसकी डीजल की खपत, गति और व्यवहार्यता के बारे में बाद में पता चलेगा।" बता दें रेलबसों को शुरुआत में मेट्रो रेल जैसी स्थानीय ट्रेनों के विकल्प के रूप में चुना गया था।"