Bharat Jodo : राहुल का 'मेड इन फरीदाबाद' वाला दांव करेगा चुनावी राह आसान! शंघाई और पकौड़े का बनाया कॉम्बिनेशन
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव में तो अभी वक्त है, लेकिन राहुल गांधी लगातार भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से सियासी माहौल को गर्म कर रहे हैं। राहुल गांधी ने दिल्ली पहुंचने पर जिस तरीके से जनता से संवाद किया वह सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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लोकसभा चुनाव में अभी डेढ़ साल का वक्त बाकी है, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने अभी से सभी सियासी समीकरणों को साधने की योजना बना ली है। ये वो समीकरण हैं, जिनमें पीएम नरेंद्र मोदी पूरी महफिल लूट ले जाते हैं। मोदी की तरह ही राहुल गांधी ने अब 'लोकल वाला दांव' खेलकर जनता से सीधे कनेक्ट करने की शुरुआत की है। चीन के शंघाई की दुकानों पर 'मेड इन फरीदाबाद' प्रोडक्ट बिकने का सपना दिखाकर राहुल गांधी ने न सिर्फ यह संदेश दिया है कि आने वाले चुनावों में वह किस तरीके की पारी खेलने वाले हैं, बल्कि अपनी सभाओं में जनता से दो तरफा संवाद करते हुए उससे हामी भरवा कर वे सियासी बिसात बिछाने लगे हैं।
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव में तो अभी वक्त है, लेकिन राहुल गांधी लगातार भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से सियासी माहौल को गर्म कर रहे हैं। राहुल गांधी ने दिल्ली पहुंचने पर जिस तरीके से जनता से संवाद किया वह सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सियासी पंडितों का कहना है कि जिस तरह से राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सत्ता पक्ष पर हमलावर होते हुए विदेश नीति, रोजगार और हिंदू मुस्लिम राजनीति पर खुलकर बातचीत कर रहे हैं, वह लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी का संकेत है।
पीएम की शैली में जनता से सीधा संवाद कर रहे राहुल
राजनीतिक विश्लेषक आरएन शर्मा कहते हैं कि राहुल गांधी ने अभी भारत जोड़ो यात्रा के एक संवाद कार्यक्रम में भारत की विदेश नीति का जिक्र करते हुए जब यह बात कही कि शंघाई की दुकान पर जब मेड इन फरीदाबाद के कपड़े देखेंगे तो सही मायने में भारत की ताकत का एहसास होगा। शर्मा का कहना है कि राहुल गांधी ऐसे संवाद करके न सिर्फ स्थानीय लोगों से अपना एक कनेक्शन बनाने की कोशिश कर रहे हैं बल्कि उसी पैटर्न पर आगे बढ़ने की तैयारी में है जिस पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता से संवाद करते हैं।
आरएन शर्मा कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी ताकतों में जनता से सीधा संवाद यानी स्थानीय कनेक्ट शामिल रहता है। उनका कहना है राहुल गांधी भी उसी तरह से भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जगह-जगह पर जनता से सीधा संवाद और स्थानीय कनेक्ट बना रहे हैं।
100 दिन की भारत जोड़ो में देखा बेरोजगारों का हाल
कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान पहले दिन से ही न सिर्फ जनता के मुद्दों को लेकर के आगे बढ़ रहे हैं बल्कि जनता से सीधे संवाद भी कर रहे हैं। राहुल गांधी ने जब लाल किले से इस बात का जिक्र किया कि अपनी 100 दिन की यात्रा में उन्होंने बेरोजगार इंजीनियरों को देखा। पढ़े लिखे लोगों को नौकरी न पाने का मलाल सिर्फ बेरोजगारों ने ही नहीं बल्कि उनके परिवार वालों के चेहरे पर भी दिखा। और इस पूरे संवाद के दौरान राहुल गांधी ने जब लाल किले पर मौजूद लोगों से इस पूरे मामले में दो तरफा बातचीत की तो वह स्थानीय लोगों से सीधे जुड़ने का एक माध्यम बनी।
राहुल गांधी ने संवाद शैली में बदलाव किया
राजनीतिक विश्लेषक कृष्णलाल कहते हैं कि किसी भी नेता के लिए दो तरफा संवाद सामने वाले से जुड़ने का सबसे बेहतर तरीका होता है। कृष्णलाल के मुताबिक राहुल गांधी अब उसी राह पर जनता से सीधे संपर्क कर रहे हैं जिस राह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी जनसभाओं में लोगों से मिलते हैं। उनका कहना है कि राजनैतिक तौर पर या राहुल गांधी को कितना फायदा पहुंचाएगा या तो चुनाव के नतीजे बताएंगे लेकिन यह बात बिल्कुल तय है कि बीते कुछ दिनों में खासतौर से भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने संवाद शैली में बदलाव तो किया ही है। जब युवाओं से मिलते हैं तो उनसे दोतरफा संवाद करते हैं।
युवाओं से जुड़ने के लिए की रोजगार व पकौड़े की बात
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और इस यात्रा के दौरान किए जाने वाले संवाद को राजनैतिक गलियारों में सियासी जानकार बखूबी परख रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हिमांशु शितोले कहते हैं कि राहुल गांधी ने हाल के दिनों में जब युवाओं से रोजगार, पकौड़े, और शंघाई को लेकर सीधे तौर पर बातचीत की तो वह एक युवाओ से जुड़ने का माध्यम था। शितोले कहते हैं कि राहुल गांधी की पूरी यात्रा के दौरान आप उनके कम्युनिकेशन स्किल को बारीकी से समझें तो वह न सिर्फ दो तरफा संवाद रहा बल्कि आने वाले चुनावों एक बड़ी सियासी नींव के तौर पर भी देखी जा रही है।
प्यार, मोहब्बत व नफरत का इसलिए जिक्र किया
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जिस तरीके से राहुल गांधी ने सबसे ज्यादा फोकस प्यार, मोहब्बत और नफरत जैसे शब्दों और उसकी व्याख्या करके किया वह भी राहुल गांधी की एक संदेश देने की कोशिश है। सियासी जानकार मानते हैं कि 2024 में होने वाले लोकसभा के चुनाव में राहुल गांधी इन्हीं सारे मुद्दों के आधार पर चुनावी मैदान में उतरेंगे। कांग्रेस को भी इस बात का अंदाजा है यही वजह है भारत जोड़ो यात्रा के समाप्त होते ही कई दूसरे बड़े आयोजन 2024 होने वाले लोकसभा चुनावों तक करने वाली है।
कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अगर नफरत की वजह प्यार और मोहब्बत की बात करके जनता के बीच में जाती है तो इसमें बुराई क्या है। वह मानते हैं कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिसमें देश के ज्यादा से ज्यादा लोगों तक आप सीधे तौर पर कनेक्ट हो सकते हैं। उनका कहना है कि यही वजह है राहुल गांधी अपनी सभी सभाओं में नफरत को तोड़ने और प्यार बढ़ाने की बात लगातार कर रहे हैं। उधर, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि यह राजनीतिक यात्रा है।