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राहुल गांधी ने रक्षा मंत्री पर साधा निशाना, बोले- क्या शर्मिंदगी है जो आपके बॉस ने चुप करा दिया

Sat, 18 Nov 2017 09:49 PM IST
शशिधर पाठक/नई दिल्ली
शशिधर पाठक/नई दिल्ली Updated Sat, 18 Nov 2017 09:49 PM IST
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Rahul Gandhi targets the defense minister said what embarrassment your boss has quieted you
rahul gandhi

फ्रांस की डेसाल्ट एवियेशन से हुए 36 राफेल फाइटर जेट युद्धक सौदे पर कांग्रेस पार्टी ने केन्द्र सरकार पर अपना घेरा बढ़ा दिया है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की इस मामले में सफाई आने के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सीधे निर्मला पर पलटवार किया है। 

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राहुल ने अपने ताजा बयान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर शिकंजा कसा है। राहुल ने ट्वीट करके निर्मला सीतारमण से कहा है कि प्रिय रक्षा मंत्री क्या शर्मिंदगी है कि आपके बॉस  ने आपको चुप करा दिया है। कृपया हमें बताओ।
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इसी के साथ राहुल गांधी ने रक्षा मंत्री से तीन सवाल पूछे हैं। पहले सवाल में उन्होंने रक्षा मंत्री एक राफेल लड़ाकू विमान  की आने वाली अंतिम कीमत पूछी है। दूसरा सवाल उनका सीधे प्रधानमंत्री पर है। 
इसमें कांग्रेस उपाध्यक्ष ने पूछा है कि क्या प्रधानमंत्री ने पेरिस में 36 राफेल युद्धक विमानों के सौदे की घोषणा करने से पहले सुरक्षा मामलों की केन्द्रीय समिति(सीसीएस) से अनुमति ली थी। राहुल के तीसरे सवाल में फिर पीएम निशाने पर हैं। 

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कांग्रेस उपाध्यक्ष ने जानना चाहा है कि आखिर क्या वजह रही जो प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड को नजरअंदाज करके एक निजी कंपनी को इस सौदे में भागीदार बनाया। जबकि इस कंपनी के पास रक्षा क्षेत्र में कोई भी अनुभव नहीं है।

निर्मला के बयान पर राहुल का पलटवार

Rahul Gandhi targets the defense minister said what embarrassment your boss has quieted you
Nirmala Sitharaman

दरअसल यह निर्मला के बयान पर राहुल गांधी का पलटवार है। कुछ दिन पहले राफेल डील में घोटाले की आशंका जाहिर करते हुए पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सत्ता पक्ष पर हमला बोला था। इसके बाद राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। 

धीरे-धीरे रक्षा क्षेत्र से जुड़े इस सौदे को लेकर सरगर्मी बढऩे लगी तो वायुसेनाध्यक्ष एयरचीफ मार्शल बीएस धनोवा ने अपनी सफाई दी थी। इसके बाद माकूल अवसर देखकर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण का बयान आया था। 

निर्मला ने अपने बयान में कांग्रेस को नसीहत भी दी थी और उनके नेताओं को सैनिकों के मनोबल का ध्यान रखने का हवाला दिया था। रक्षा मंत्री ने सौदे को पूरी तरह पारदर्शी बताया था और कहा था कि यह निर्णय वायुसेना की अपरिहार्य आवश्यकता को ध्यान में रखकर लिया गया था। 

निर्मला के सामने के बाद अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस डिफेंस एंड एरोस्पेस भी मैदान में कूद पड़ी। रिलायंस ने कांग्रेस पार्टी को कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी तक दे दिया। ऐसे में कांग्रेस उपाध्यक्ष ने अब इस मुद्दे को नये सिरे से धार देने की कोशिश की है।

कांग्रेस के लिए हिट है राफेल डील का मुद्दा

कांग्रेस पार्टी के लिए राफेल युद्धक विमानों के सौदे का मुद्दा हिट है। पार्टी इसे गुजरात विधानसभा चुनाव में भी कुछ उद्योगपतियों को ही केन्द्र सरकार द्वारा लाभ पहुंचाए जाने का तर्क दे रही है। 

यह मुद्दा संसद के पिछले सत्र में भी उठ चुका है, लेकिन तब सरकार ने इस पर पूरी जानकारी नहीं दी थी। वैसे भी वायुसेना को 1998 से 126 मध्यम और बहुउद्देश्यीय चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान चाहिए थे। 

इसकी आरएफपी यूपीए सरकार के समय में जारी हुई थी और छह अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद यूरोफाइटर टाइफून तथा राफेल युद्धक विमान ने बाजी मारी थी। राफेल एल वन थी और कामर्शियल ट्रायल(कीमत पर सहमति) में भी सफल रहा। 

इसी आधार पर यूपीए सरकार ने 10.2 बिलियन डॉलर(उस समय के अमेरिकी डॉलर मूल्य) पर सौदे को अंतिम रूप दे दिया था। इस सौदे के तहत 18 विमान फ्रांस से तैयार हालत में तथा शेष भारत में ऑफसेट क्लाज के तहत तकनीकी हस्तांतरण के माध्यम से डेसाल्ट एवियेशन और एचएएल के सहयोग द्वारा तैयार होने थे।

क्यों मिला कांग्रेस को मुद्दा

मोदी सरकार ने यूपीए सरकार के समय में हुए सौदे तथा आरएफपी प्रक्रिया को रद्द कर दिया तथा नये सिरे से सौदा करके फ्रांस से तैयार हालत में 36 राफेल युद्धक विमान लेने के निर्णय को अंतिम रूप दे दिया है। 

प्रति विमान यह सौदा जहां यूपीए सरकार के सौदे से करीब ढाई गुणा मंहगा है, वहीं इसमें तकनीकी हस्तांतरण का क्लॉज भी नहीं है। सबसे अहम और सवाल भरा पक्ष यह है कि केन्द्र सरकार ने इसमें सार्वजनिक क्षेत्र  तथा लड़ाकू विमान निर्माण में अहम योगदान देने वाली हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड को नजरअंदाज करके रक्षा क्षेत्र की अनुभवहीन कंपनी रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को भागीदार बनाया है।

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