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Supreme Court: राहुल ने खटाखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा; सजा बरकरार रखने के हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

Sat, 15 Jul 2023 04:55 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 15 Jul 2023 04:55 PM IST
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Rahul Gandhi reached Supreme Court Demand for stay on sentence in Modi surname case Latest News Update
राहुल गांधी। - फोटो : अमर उजाला

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी उपनाम मामले में सजा पर रोक की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कांग्रेस नेता ने 2019 के मानहानि मामले के संबंध में सात जुलाई को दिए गए गुजरात हाईकोर्ट के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है। राहुल गांधी ने ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ प्रसन्ना एस. के जरिए याचिका दायर की है। सात जुलाई को हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी थी और दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार करने वाले सत्र अदालत के आदेश को बरकरार रखा था।

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इससे पहले गुजरात में कांग्रेस नेता के खिलाफ मानहानि का मामला दायर करने व उन्हें सजा दिलाने वाले भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी ने भी सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दायर की थी। दरअसल, 2019 में मोदी उपनाम को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में 23 मार्च को सूरत की सीजेएम कोर्ट ने राहुल को दो साल की सजा सुनाई थी।
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याचिका में क्या दलीलें?

  • राहुल ने याचिका में कहा कि अगर हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाई गई तो इससे लोकतांत्रिक संस्थानों को व्यवस्थित तरीके से बार-बार कमजोर करने की कोशिशों को बल मिलेगा। इससे लोकतंत्र का दम घुट जाएगा। यह भारत के राजनीतिक माहौल और भविष्य के लिए हानिकारक होगा।
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  • याचिका में कहा गया  कि अगर विवादित फैसले पर रोक नहीं लगाई गई, तो इससे स्वतंत्र भाषण, स्वतंत्र अभिव्यक्ति, स्वतंत्र विचार और स्वतंत्र बयान का दम घुट जाएगा।
  • याचिका में यह भी कहा गया कि राहुल को दोषी ठहराने और दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार करने की गलती तीन बार की गई। यह और भी बड़ा कारण है कि शीर्ष कोर्ट को जल्द से जल्द मामले में दखल दे और जो भी नुकसान हुआ, उसे रोके।
  • याचिका में कहा गया कि अगर याचिकाकर्ता की सजा पर राक नहीं लगाई गई तो वह अपने करियर के अहम आठ साल गंवा सकते हैं।


क्या है मामला?
2019 लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार की एक रैली में राहुल गांधी ने कहा था, 'कैसे सभी चोरों का उपनाम मोदी है?' इसी को लेकर भाजपा विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। राहुल के खिलाफ आईपीसी की धारा 499 और 500 (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया गया था।



निचली अदालतों में अब तक क्या हुआ?
23 मार्च को निचली अदालत ने राहुल को दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी। इसके अगले ही दिन राहुल की लोकसभा सदस्यता चली गई थी। राहुल की अपना सरकारी घर भी खाली करना पड़ा था। निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ दो अप्रैल को राहुल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जस्टिस प्रच्छक ने मई में राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद सात जुलाई को कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया और राहुल की याचिका खारिज कर दी थी। 

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
गुजरात हाइ्रकोर्ट ने राहुल की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि राजनीति में शुचिता’ अब समय की मांग है। जनप्रतिनिधियों को साफ छवि का होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि दोषसिद्धि पर रोक लगाना नियम नहीं, बल्कि अपवाद है। इसे विरले मामलों में ही इस्तेमाल किया जाता है। जस्टिस प्रच्छक ने 125 पेज के अपने फैसले में कहा था कि राहुल गांधी पहले ही देशभर में 10 मामलों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में निचली अदालत का आदेश न्यायसंगत, उचित और वैध है।

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