Rahul Gandhi: अब राहुल गांधी चलेंगे वायनाड कार्ड! इस दौरे से कांग्रेस को भी खूब मिलेगा बूस्टर
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विस्तार
राहुल गांधी ने अपनी सांसदी बहाली के बाद अब न सिर्फ सियासी तौर पर बल्कि इमोशनल तौर पर राजनीतिक राह को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। इस कड़ी में राहुल गांधी सबसे पहला दौरा 12 और 13 अगस्त को अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड का कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राहुल गांधी के वायनाड दौरे से न सिर्फ राहुल बल्कि समूची पार्टी के लिए एक बड़ा बूस्टर डोज मिलने वाला है। दरअसल राहुल गांधी की जब सांसदी बहाल हुई थी, तो पार्टी की ओर से सबसे पहले यही कहा गया था कि यह भारत देश की जनता और वायनाड की जनता की जीत है। यही वजह है कि राहुल गांधी अब वायनाड में पब्लिक इमोशनल कनेक्ट के साथ अपने सियासी सफर की बड़ी शुरुआत करने जा रहे हैं।
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इसलिए वायनाड जा रहे हैं राहुल
दरअसल राहुल गांधी की सांसदी जाने के बाद कांग्रेस पार्टी से लेकर उनके तमाम नेताओं ने इस बात को लेकर इमोशनल बैकग्राउंड बनाया था कि वायनाड की जनता ने राहुल गांधी को चुनकर संसद भेजा। लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने उस जनता की कद्र नहीं की। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यही वजह है कि राहुल गांधी उस जन भावनाओं के इमोशनल बैकग्राउंड के आधार पर ही वायनाड की पहली यात्रा कर एक सियासी संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। सियासी जानकार ओपी तंवर कहते हैं कि राहुल गांधी को इस बात का अंदाजा है कि उनकी सदस्यता बहाली को किस तरीके से एक इमोशनल तौर से जोड़कर आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए सबसे मुफीद जगह उनकी वह लोकसभा है, जहां के वोटरों के लिए राहुल गांधी की सदस्यता बहाली के बाद कांग्रेस के अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे ने भी जीत बताई थी। यही वजह है कि राहुल गांधी सबसे पहली यात्रा अपने लोकसभा क्षेत्र की करने जा रहे हैं।
कांग्रेस इसे बनाएगी अब बड़ा मुद्दा
कांग्रेस पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी की सदस्यता बहाली पार्टी के लिए एक बड़ी जीत और बूस्टर डोज के तौर पर देखी जा रही है। कांग्रेस पार्टी के संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी कहते हैं कि राहुल गांधी की संसद सदस्यता की बहाली देश के हर उस नागरिक के लिए जीत है, जो लोकतंत्र में भरोसा करता है। कांग्रेस पार्टी के नेताओं का मानना है कि राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाली को वह एक बड़ी जीत के तौर पर समूचे देश के लोगों से घर-घर जाकर साझा भी करेंगे। सियासी जानकारों का मानना है कि कांग्रेस पार्टी की रणनीति उसे आने वाले चुनावों में एक बड़े सियासी फायदे के रूप में दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषक ओपी तंवर का मानना है कि राहुल गांधी का वायनाड दौरा एक तरह से उनका बड़ा सियासी शॉट माना जा रहा है।
मोदी सरनेम को लेकर साल 2019 में राहुल गांधी ने एक टिप्पणी की थी, जिसके चलते उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर हुआ था। इस मामले में सूरत की अदालत ने राहुल गांधी को दोषी माना और उन्हें दो साल की सजा सुनाई। दो साल की सजा मिलने के चलते जनप्रतिनिधि कानून के प्रावधान के तहत राहुल गांधी को 24 मार्च 2023 को संसद सदस्यता से अयोग्य ठहरा दिया गया। सजा के खिलाफ राहुल गांधी ने गुजरात हाई कोर्ट में अपील की, लेकिन गुजरात हाई कोर्ट ने भी राहुल गांधी की सजा बरकरार रखी। जिसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। जहां सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की सजा पर रोक लगा दी। सजा पर रोक लगने के बाद राहुल गांधी की संसद सदस्यता फिर बहाल हो गई है।