PM की कुर्सी: राहुल तैयार लेकिन सहयोगी दलों को अभी नतीजों का इंतजार
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव में बड़ी पार्टी बनकर आने और मौका मिलने पर प्रधानमंत्री बनने की बात कहकर ये साफ कर दिया है कि वे 2019 में मोदी के मुकाबले के लिए तैयार हैं। बीते चार सालों में कई राज्यों में सत्ता गंवाने के बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष इतना आत्मविश्वास जुटाने में कामयाब दिख रहे हैं कि वे मोदी के सामने खुद को विकल्प के तौर पर पेश करें।
कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालने के बाद पार्टी के भीतर भी अब राहुल के नेतृत्व को लेकर उठने वाली आवाजें बंद हो चुकी हैं। पार्टी की पहचान राहुल की कांग्रेस के तौर पर होने लगी है।
ऐसे में पूरा दारोमदार उन भाजपा विरोधी राजनीतिक दलों के नेताओं पर है जिन्हें भाजपा के खिलाफ एक वैकल्पिक राजनीतिक गुलदस्ते की शक्ल देने की कोशिश कांग्रेस पिछले दो सालों से कर रही है।
लिहाजा राहुल के सुर के साथ सहयोगियों के सुर तभी मिलेंगे जब कांग्रेस पूर्ण बहुमत से आती है। सबसे बड़ी पार्टी बनकर भी राहुल के पीएम बनने पर सहयोगी तैयार होंगे इसकी बानगी एनसीपी की प्रतिक्रिया से साफ झलकती है। एनसीपी चुनाव में प्रदर्शन देख लेना चाहती है।
2019 में प्रधानमंत्री कौन होगा यह लाख टके का सवाल
एनसीपी सांसद माजिद मेनन राहुल को शुभकामनाएं देते हैं साथ ही कहते हैं कि 2019 में प्रधानमंत्री कौन होगा यह लाख टके का सवाल है। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बन भी जाएगी तब भी यह जरूरी नहीं है कि सभी दल उन्हें लीडर मानने के लिए सहमत हों।
मेनन का कहना है कि उनका मुख्य मकसद भाजपा को सत्ता से बाहर करना है। एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक कहते हैं कि अगर देश के लोग कांग्रेस में अपना भरोसा जताते और देश में शासन चलाने के लिए चुनते हैं तो राहुल गांधी प्रधानमंत्री बन सकते हैं।
दरअसल एनसीपी नेता शरद पवार हाल में विपक्षी गठजोड़ की राजनीति में खुद की दावेदारी छोड़ चुके हैं। साथ ही भाजपा विरोधी ताकतों को एक मंच पर लाने की प्रक्रिया में उन्होंने ही कांग्रेस को अगुवाई करने को कहा था। बावजूद एनसीपी का कहना है कि सबकुछ चुनाव में प्रदर्शन पर निर्भर है।
प्रधानमंत्री बनने के लिए यूपी की भूमिका अहम
भारत में प्रधानमंत्री बनने के लिए यूपी की भूमिका हमेशा से अहम रही है। राहुल के सबसे बड़ी पार्टी बनने की बात पर राज्यों खासकर यूपी में जहां कांग्रेस कमजोर होती गई है वहां बेहतर प्रदर्शन के लिए दो बड़े क्षेत्रीय दलों सपा-बसपा के सहारे के बिना संभव नहीं है।
ऐसे समय जब दोनों ही दलों ने कांग्रेस को अलग रखकर आपस में समझौता कर सीटों का बंटवारा भी शुरू कर दिया राहुल का पीएम बनने का बयान शायद दोनों दलों के नेता अखिलेश यादव और मायावती को रास आए। ऐसे में सहयोगी पार्टियों का राहुल गांधी को इस पद के लिए समर्थन पूरी तरह से अंकगणित पर निर्भर है।
बिहार से राजद नेता तेजस्वी यादव का बयान कांग्रेस अध्यक्ष का उत्साहवर्धन कर सकता है। तेजस्वी का कहना है कि हम पहले से महागठबंधन में हैं। अगर वे पीएम बनते हैं खुशी की बात है और बनना ही चाहिए।
वामपंथी दलों में सीपीएम ने पहले कही भाजपा-कांग्रेस से बराबर की दूरी बनाने की बात कही है। जबकि सीपीई नेता डी. राजा का कहना है कि अभी समय सभी धर्मनिरपेक्ष दलों के एक होने का है। भाजपा को हराने के लिए हमें एकजुट होने की जरूरत है। कांग्रेस पार्टी की ओर से राहुल के बयान पर प्रवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि वे प्रधानमंत्री क्यों नहीं बनेंगे।