सुप्रीम कोर्ट पहुंचा राहुल की नागरिकता का विवाद, सुनवाई के लिए न्यायालय तैयार
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की नागरिकता के बारे में फैसला होने तक उनके लोकसभा के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाने के लिये उच्चतम न्यायालय में गुरुवार को एक याचिका दायर की गई। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष जय भगवान गोयल और सी पी त्यागी की इस याचिका का उल्लेख किया गया। पीठ ने कहा, ‘हम इसे देखेंगे।’
इस याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा स्वेच्छा से ब्रिटेन की नागरिकता स्वीकार करने के सवाल पर भाजपा नेता सुब्रमणियन स्वामी के नवंबर, 2015 के बावजूद इस मामले में फैसला लेने में केंद्र और निर्वाचन आयोग की निष्क्रियता से असंतुष्ट हैं।
गृह मंत्रालय ने हाल ही में राहुल गांधी को एक नोटिस देकर उनकी नागरिकता के बारे में शिकायत में उठाए गए सवाल पर एक पखवाड़े के भीतर ‘तथ्यात्मक स्थिति’ स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस संबंध में गृह मंत्रालय और निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रथम दृष्ट्या साक्ष्य पेश किए गए हैं और ऐसी स्थिति में राहुल गांधी को लोकसभा चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी। राहुल उत्तर प्रदेश के अमेठी और केरल के वायनाड संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं।
अधिवक्ता बरूण कुमार सिन्हा द्वारा दायर इस याचिका में राहुल गांधी की नागरिकता के बारे में निर्णय होने तक उनका नाम मतदाता सूची से हटाने का निर्देश निर्वाचन आयोग को देने का भी अनुरोध किया गया है। गृह मंत्रालय ने हाल ही में राहुल गांधी को भेजे पत्र में कहा था कि उसे स्वामी से प्रतिवेदन मिला है जिसे उसके संज्ञान में लाया गया है कि बैकऑप्स लिमिटेड नाम की एक कंपनी 2003 में ब्रिटेन में पंजीकृत थी जिसमे राहुल गांधी एक निदेशक थे।
गृह मंत्रालय ने कहा था कि स्वामी के पत्र में इस बात का भी जिक्र है कि 10 अक्टूबर, 2005 और 31 अक्टूबर, 2006 के ब्रिटिश कंपनी के वार्षिक रिटर्न में राहुल गांधी की जन्म तिथि 19 जून, 1970 दी गई है और उनकी नागिरकता ब्रिटिश बताई गई है।
अदालत में यह याचिका तब दाखिल की गई है जब मंगलवार 30 अप्रैल को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राहुल गांधी को नोटिस जारी करते हुए 15 दिनं में जवाब देने के लिए तहा है। यह नोटिस उन्हें भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत के आधार पर भेजे गया है। स्वामी का आरोप है कि राहुल के पास ब्रिटिश नागरिकता है।
क्या होती है दोहरी नागरिकता
भारतीय संसद ने साल 2003 में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित कर विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान किया है। इसे ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया के नाम दिया गया है। जिसे बोलचाल में दोहरी नागरिकता के नाम से जाना जाता है।
इसके अनुसार, भारतीय मूल का कोई भी व्यक्ति जो संविधान लागू होने के बाद भारत या उसके किसी राज्य क्षेत्र का नागरिक रहा हो और जिसने पाकिस्तान और बांग्लादेश के अलावा किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण कर ली है, नागरिकता अधिनियम 1955 के अधीन पंजीकरण करा सकता है। यदि उसके देश में दोहरी नागरिकता का प्रावधान है।
पंजीकरण के बाद अगय व्यक्ति पांच साल में से एक साल भारत में रहता है तो उसे भारत की नागरिकता मिल सकती है। वर्तमान में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया सहित 16 देशों में बसे भारतीय मूल के लोगों को दोहरी नागरिकता प्रदान की जा सकती है। क्योंकि, इन देशों के नागरिक दोहरी नागरिकता ले सकते हैं।
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