प्रियंका-डिंपल ही नहीं राहुल-अखिलेश-जयंत भी करेंगे साझा रैलियां
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा के अखिलेश धड़े के साथ कांग्रेस और रालोद का चुनाव पूर्व गठबंधन अबतक तय नहीं है। हालांकि इन तीनों ही दलों के रणनीतिकारों ने चुनाव प्रचार की रणनीति का खाका भी तैयार कर लिया है।
इसके मुताबिक चुनाव प्रचार के दौरान न सिर्फ प्रियंका वाड्रा और सांसद डिंपल यादव कुछ साझा रैलियों को संबोधित करेंगी, बल्कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और रालोद के जयंत सिंह भी कई जगहों पर एक मंच पर नजर आएंगे।
सपा के अखिलेश धड़े की ओर से संकेत दिया जा रहा है कि शुक्रवार को नाम और निशान पर चुनाव आयोग में अंतिम सुनवाई के बाद गठबंधन की घोषणा कर दी जाएगी। दावा तो यहां तक है कि इस गठबंधन में जदयू सहित कुछ अन्य छोटे दलों को भी जगह दी जाएगी।
क्या है साझा रैलियों का महत्व?
अखिलेश धड़े के सूत्रों के मुताबिक पार्टी में नाम और निशान के लिए जारी जंग के बावजूद तीनों ही दलों के रणनीतिकार चुनाव प्रचार की रणनीति पर लगातार माथापच्ची कर रहे हैं। बीच में पंजाब और उत्तराखंड की रणनीति का काम देख रहे कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर फिर से सक्रिय हुए हैं। गठबंधन होने की स्थिति में संयुक्त रैलियां कराने और इन रैलियों की जगह की पहचान भी उन्हीं ने की है।
जहां तक गठबंधन का सवाल है तो कांग्रेस ने हर लोकसभा में कम से कम एक सीट के अतिरिक्त 20 और सीटें मांगी हैं। चूंकि कांग्रेस से गठबंधन पर एतराज मुलायम धड़े को था अखिलेश धड़े को नहीं। ऐसे में गठबंधन को ले कर संशय नहीं है।
क्या है साझा रैलियों का महत्व
इस मामले में प्रशांत किशोर उत्तर प्रदेश में बिहार के इतर चलना चाहते हैं। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि पर प्रतिकूल असर न पडने देने के लिए उन्होंने लालू प्रसाद और नीतीश की एक-दो संयुक्त रैलियों के जरिए ही संदेश दे दिया था।
उत्तर प्रदेश में उनकी योजना प्रिंयका-डिंपल के सहारे महिला मतदाताओं, अकेले प्रियंका केजरिए ब्राह्मïण मतदाताओं को और अखिलेश-राहुल-जयंत के जरिए स्वजातीय मतदाताओं के इतर युवा मतदाताओं को आकर्षित करने की है।