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क्यों कहा जाता है राफेल को लड़ाकू विमानों का सरताज, हैरान कर देगी इसकी ताकत

Thu, 07 Mar 2019 02:40 PM IST
अमित मंडल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Thu, 07 Mar 2019 02:40 PM IST
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rafale deal explained why did india chose rafale fighter jet and narendra Modi role in deal
राफेल की ताकत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान में घुसकर की गई वायुसेना की कार्रवाई और उसके बाद पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों को खदेड़ने का जिक्र करते हुए तीन मार्च को कहा कि आज राफेल लड़ाकू विमान की कमी महसूस हो रही है। अगर राफेल विमान हमारे पास होता तो परिणाम इससे कुछ अलग होता। आखिर राफेल विमान में ऐसी क्या बात है कि इसे दुनिया के बेहतरीन लड़ाकू विमानों में शुमार किया जाता है। आइए जानते हैं इसकी ताकत, साथ ही जानेंगे किस तरह भारत-फ्रांस के बीच इसे लेकर डील हुई और इसमें क्या विवाद हुए। 
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राफेल विमान की खासियत

राफेल एक दो इंजन वाला मध्यम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) है। इसे फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन बनाती है। राफेल लड़ाकू विमानों को 'ओमनिरोल' विमानों की श्रेणी में रखा गया है, जो किसी भी युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने की क्षमता रखते हैं। यह लड़ाकू विमान हवाई हमला, जमीन में सेना की मदद और दुश्मन पर बड़े हमले को अंजाम दे सकती है। इसके अलावा परमाणु हथियारों के खिलाफ भी इसे इस्तेमाल किया जा सकता है। 
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जानिए राफेल की ताकत

लंबाई- 10.3 मीटर 
ऊंचाई- 5.3 मीटर
विमान का वजन - 24,500 किलोग्राम 
इंजन- एम888-2 के दो इंजन
अधिकतम गति- 1,389 किलोमीटर प्रति घंटा
मारक क्षमता- 3,700 किलोमीटर

कौन-कौन से हथियार

गन- जीआईएटी 30/719बी

हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल- एमआईसीए आईआर/ईएम, मैजिक II 

हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल- एबीडीए अपाचे, स्कल्प ईजी, एएएलएम, जीबीयू-12, पेववे II, एएम 39 एक्जोसेट, एएसएमपी-ए न्यूक्लियर

राफेल खरीदने की वजह

राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की प्रक्रिया में टेंडर जारी किया गया। जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय विमान निर्माता कंपनियों ने अपने विमान के बारे में पेशकश की। वायुसेना ने इनमें से छह बड़ी विमान कंपनियों को छांटा। इसमें लॉकहेड मार्टिन का एफ-16, बोइंग एफ / ए -18 एस, यूरोफाइटर टाइफून, रूस का मिग-35, स्वीडन की साब की ग्रिपेन और डसॉल्ट एविएशन की रफाल विमान थे। 
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वायुसेना ने इन छह विमानों के परीक्षण और उनकी कीमत को ध्यान में रखने हुए यूरोफाइटर और राफेल को छांटा। ये सबसे कम कीमत पर मिल रहा था और इसका रखरखाव भी आसान बताया जा रहा था।
 

राफेल विमान खरीदने में देरी क्यों हुई

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लड़ाकू विमान राफेल

कब शुरू हुई खरीद प्रक्रिया

भारतीय वायु सेना ने साल 2001 में अतिरिक्त लड़ाकू विमानों की मांग की थी। वायुसेना के बेड़े में बड़े पैमाने पर भारी और हल्के वजन वाले विमान हैं। इसमें रक्षा मंत्रालय मध्यम वजन वाले लड़ाकू विमान शामिल करना चाहता था। असल में खरीद प्रक्रिया साल 2007 में शुरू हुई। तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने अगस्त 2007 में 126 विमान खरीदने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी। 

कितने राफेल खरीदे जाने हैं

इस सौदे की शुरुआत 10.2 अरब डॉलर (5,4000 करोड़ रुपये) से होनी थी। 126 विमानों में 18 विमानों को तुरंत लेने और बाकी की तकनीक भारत को सौंपे जाने की बात तय हुई थी। लेकिन बाद में इस सौदे में बदलाव किया गया। राफेल विमान खरीदने के लिए भारत और डसॉल्ट एविएशन ने साल 2012 में दोबारा बातचीत शुरू हुई। साल 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार ने साल 2016 में नई शर्तों और कीमत के साथ सौदे में बदलाव किया। 

इसलिए खरीद में देरी 

विमान खरीदने की प्रक्रिया की बातचीत के दौरान भारत और फ्रांस दोनों देशों में चुनाव हुए और सरकार बदल गई। विमान की कीमत भी खरीद में देरी की वजह थी। विमान की कीमत लगभग 740 करोड़ रुपये है। भारत उन्हें कम से कम 20 फीसदी कम लागत पर चाहता था। यूपीए सरकार के दौरान 126 जेट खरीदने की बात हुई थी, एडीए सरकार में इसे घटाकर 36 कर दिया गया। 

मोदी सरकार के दौरान क्या हुआ

अप्रैल 2015 में नरेंद्र मोदी ने पेरिस का दौरा किया। तभी 36 राफेल खरीदने का निर्णय लिया गया। सरकार ने इस सौदे पर साल 2016 में दस्तखत किए। जब फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वां ओलांद ने जनवरी में भारत का दौरा किया तब राफेल जेट विमानों की खरीद के 7.8 अरब डॉलर के सौदे पर हस्ताक्षर हुए। लेकिन भारत को राफेल मिलने में लगातार देरी होती गई। इसी बीच इसे लेकर भारत में सियासत भी शुरू हो गई। मोदी सरकार पर राफेल घोटाला का आरोप लगना शुरू हो गया। कांग्रेस ने सवाल उठाना शुरू किया कि विमानों की संख्या घटाकर 36 क्यों कर दी गई? इसे ऊंची कीमत पर क्यों खरीदा गया? एचएएल की जगह ठेका अनिल अंबानी की कंपनी को क्यों दिया गया। मामले ने इस कदर तूल पकड़ा कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हो गई और इस पर सुनवाई चल रही है।   
 
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