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राफेल: जेटली ने दाम बढ़ने को बताया बकवास अंकगणित, सरकार करेगी कैग रिपोर्ट का इंतजार
Sat, 19 Jan 2019 08:50 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Sat, 19 Jan 2019 08:50 AM IST
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अरुण जेटली
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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राफेल सौदे में दाम बढ़ने संबंधी द हिंदू की शुक्रवार को प्रकाशित हुई खबर को खारिज कर दिया और उसे ‘बकवास’ अंकगणित पर आधारित बताया है। जेटली ने कई ट्वीट कर कहा कि उच्चतम न्यायालय ने कीमतों की जांच की है और अब कैग इसकी जांच कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘राफेल पर नया लेख बकवास अंकगणित पर आधारित है- 2007 में नहीं हुए सौदे के दाम को दरकिनार करिए और 2016 के दामों से इसकी तुलना करिए और एक घोटाला खोजिए।’
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द हिंदू की रिपोर्ट में कहा गया है कि 126 लड़ाकू विमानों की बजाय 36 विमान खरीदने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले की वजह से प्रत्येक विमान की कीमत में 41.42 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। भारत की जरूरत के अनुसार 13 अतिरिक्त बिन्दुओं के ‘डिजायन और विकास’ के लिए 1.3 अरब यूरो के खर्च ने विमान के दाम में बहुत बढोत्तरी कर दी।
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वहीं रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि उसने कैग को सौदे से संबंधित सभी फाइलें देखने की अनुमति दे दी है और बेहतर होगा कि इस मुद्दे पर कैग की रिपोर्ट का इंतजार किया जाए। मंत्रालय ने उस खबर को ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ बताया है जिसमें दावा किया गया था कि तय प्रक्रियाओं को नजरअंदाज करके 126 (जिनकी पिछली संप्रग सरकार ने बात की थी) की जगह 36 राफेल विमान खरीदने के फैसले की वजह से हर विमान की कीमत 41 प्रतिशत बढ़ गई है।
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रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘खबर तथ्यात्मक रूप से गलत है। यह कोई नई बात नहीं बताती है। सरकार ने विभिन्न मंचों पर सभी मुद्दों का विस्तार से जवाब दिया है जिसमें सबसे हालिया संसद में चर्चा में रक्षामंत्री का जवाब है।’ अधिकारी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने ‘दाम और वाणिज्यिक लाभ’ की जानकारियों पर गौर किया है लेकिन उसे सौदे में कुछ भी प्रतिकूल नहीं मिला और उसने इसकी जांच का आदेश देने से इंकार किया।
प्रवक्ता ने कहा, ‘नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को राफेल सौदे से संबंधित सभी फाइलें देखने की इजाजत दे दी गई है। कैग जैसी अधिकृत एजेंसी की रिपोर्ट का इंतजार करना बेहतर होगा।’ मंत्रालय ने अपनी पूर्व स्थिति पर अडिग रहते हुए कहा कि सौदे के दाम संबंधी जानकारी का खुलासा नहीं किया जा सकता क्योंकि अनुबंध 2008 के भारत फ्रांस समझौते के तहत आता है।